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उज्जैन के महाकाल महालोक में लाल बलुआ पत्थर से बनी सप्तऋषियों की भव्य प्रतिमाएं होंगी स्थापित

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उज्जैन के महाकाल महालोक में लाल बलुआ पत्थर से बनी सप्तऋषियों की भव्य प्रतिमाएं होंगी स्थापित


उज्जैन, 31 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्वप्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान श्री महाकालेश्वर मंदिर के आंगन में निर्मित श्री महाकाल महालोक की भव्यता में जल्द ही एक और आध्यात्मिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। परिसर में पहले स्थापित फाइबर की मूर्तियों के स्थान पर अब मजबूत और लंबे समय तक टिकने वाली पत्थर की भव्य कलाकृतियां स्थापित की जाएंगी। इसके बाद श्री महाकाल महालोक में ऋषि परम्परा के दर्शन होंगे।

महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक संजीव कुमार मालवीय ने सोमवार को बताया कि देश-विदेश के चुनिंदा शिल्पकारों को कार्यशाला के माध्यम से इस परियोजना से जोड़ा गया था। अधिकांश प्रतिमाओं का निर्माण पूरा हो चुका है और अब पेडस्टल व फिनिशिंग का काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि लगभग छह महीने के भीतर इन प्रतिमाओं को महाकाल लोक परिसर में विधिवत स्थापित कर दिया जाएगा।

उन्होंने बताया कि इन मूर्तियों को ओडिशा के कोणार्क से आए अनुभवी कारीगर तैयार कर रहे हैं, जिनके परिवार पीढ़ियों से पत्थर की मूर्तियां बनाने का काम करते आ रहे हैं। यह कारीगर कोणार्क सूर्य मंदिर जैसे ऐतिहासिक मंदिरों में भी काम कर चुके हैं। इन मूर्तियों को बनाने वाले प्रमुख कारीगर ईश्वर चंद्र महाराणा हैं, जिन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार भी मिल चुका है। उनके साथ लगभग 30 कारीगर काम कर रहे हैं। सभी मूर्तियां राजस्थान के बंशी पहाड़पुर के खास पत्थर से बनाई जा रही हैं, जो बेहद मजबूत और टिकाऊ माना जाता है। खास बात यह भी है कि इसी प्रकार के विशेष पत्थर का इस्तेमाल अयोध्या में बने भव्य राम मंदिर के निर्माण में भी किया गया है।

इन कलाकृतियों को हरिफाटक स्थित हाट बाजार में आकार दिया जा रहा है। महाकाल लोक परिसर के लिए तैयार की जा रही प्रतिमाओं में महर्षि कश्यप, अत्रि, वशिष्ठ, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और भारद्वाज के साथ भगवान शिव और देवगुरु बृहस्पति शामिल हैं। सप्त ऋषियों की हर मूर्ति करीब 15 फीट ऊंची है। इनके साथ एक बड़ी शिव प्रतिमा भी बनाई जा रही है। लगभग सभी मूर्तियां तैयार हो चुकी हैं, सिर्फ फिनिशिंग का काम बाकी है। मूर्तिकार इन प्रतिमाओं को ध्यान, आशीर्वाद और शांति की मुद्राओं में तराश रहे हैं।

माना जा रहा है कि इनके स्थापित होने के बाद श्रद्धालुओं को भारतीय ऋषि परंपरा, तपस्या और ज्ञान की समृद्ध विरासत को करीब से देखने का अवसर मिलेगा। स्थायी और कलात्मक पत्थर की इन प्रतिमाओं के स्थापित होने के बाद महाकाल लोक की आध्यात्मिक भव्यता और बढ़ने की उम्मीद है। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को भगवान महाकाल के साथ-साथ प्राचीन भारतीय ऋषि परंपरा और सनातन ज्ञान परंपरा की भी झलक देखने को मिलेगी।

गौरतलब है कि श्री महाकाल महालोक में मई 2023 में आए तेज आंधी-तूफान में फाइबर से बनी सप्त ऋषियों की मूर्तियां टूट गई थीं, जिससे सरकार की काफी आलोचना हुई थी। इसके बाद तय किया गया कि अब वहां मजबूत और टिकाऊ पाषाण यानी पत्थर से बनी मूर्तियां लगाई जाएंगी। नई योजना के तहत सप्तऋषियों, भगवान शिव और देवगुरु बृहस्पति की प्रतिमाएं राजस्थान के बंसी पहाड़पुर के ऐतिहासिक लाल बलुआ पत्थर से तैयार की जा रही हैं और इन पाषाण मूर्तियों का निर्माण अंतिम चरण में पहुंच चुका है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर