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केदारनाथ में ऊं के दर्शन कर आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव कर रहे हैं श्रद्धालु

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केदारनाथ में ऊं के दर्शन कर आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव कर रहे हैं श्रद्धालु


गुप्तकाशी, 14 मई (हि.स.)। केदारपुरी में भगवान शिव के सूक्ष्म नाम ॐ के स्वरूप को करीब से जानने के लिए तीर्थयात्री और पर्यटक गोल चौक में स्थापित ब्रास की मिश्रित धातु द्वारा निर्मित ॐ के दर्शन कर पुण्य अर्जित कर रहे हैं। इसी स्थान से बाबा केदारनाथ के मंदिर के साक्षात दर्शन भी हो जाते हैं।

ॐ चौक की मनोहारी यादों को सहेजने के लिए यात्री अपने मोबाइल से फोटो शूट कर रहे हैं। यही एक ऐसा स्थान है, जहां से ॐ और केदारनाथ मंदिर के युगल दर्शन एक साथ हो जाते हैं। लोनिवि गुप्तकाशी द्वारा वर्ष 2024 में ब्रास और स्टेनलेस स्टील की मिश्र धातु युक्त ॐ की स्थापना की गई थी।

लगभग 2 करोड़ 30 लाख रुपए की धनराशि द्वारा ॐ जिंक और कॉपर का मिश्रित ब्रास धातु है, जिसे स्टेनलेस स्टील के ढांचे के बीच में फिट करवाया गया है। ढांचे की मोटाई जहां 8 एमएम है, वही ब्रास धातु की मोटी 5 एमएम ली गई है। यह 19 अलग-अलग भागों में मानव संसाधनों से गौरीकुंड से केदारनाथ धाम पहुंचाया गया।

केदारपुरी में कई माह के अथक परिश्रम के बाद इसकी स्थापना की गई । इसका आधार दीर्घ वृत्ताकार है, जो दो टन का है । इसके ऊपर लगाये ॐ अक्षर का भार 5 टन है। उक्त ॐ की प्रतिमूर्ति में जिंक 37 फीसद तथा कॉपर 63 फीसद लगाया गया है।

गौरीकुंड से केदारनाथ धाम की पैदल यात्रा के बाद जो थकान तीर्थ यात्रियों के चेहरे पर होती है, अचानक गोल चौक में आते ही 16 फीट लंबा और 15 फीट चौड़ाई वाले ॐ को देखकर ये थकान एकदम गायब होकर यात्री के चेहरे पर आध्यात्म पसर जाता है।

लोनिवि गुप्तकाशी के अधिशासी अभियंता राजविंद सिंह ने बताया कि ब्रास मिश्र धातु से निर्मित ॐ की संरचना जर्मनी से ली गई एक रचना है। उन्होंने कहा कि निर्माण से पूर्व समस्त धातु की सत्यता के लिए नागपुर स्थित एनआईटी के प्रोफेसर द्वारा 6 माह तक परीक्षण और मूल्यांकन किया गया।

वेदपाठी विश्व मोहन जमलोकी ने बताया कि ॐ शब्द में अकार, उकार और मकार शब्द समाए हैं। जिसे भगवान शंकर के विराट अस्तित्व को एक सूक्ष्म स्वरूप में समाहित किया गया है। इस सूक्ष्म शब्द के उच्चारण से कई पुण्यों की प्राप्ति हो जाती है।

हिन्दुस्थान समाचार / बिपिन