home page

आत्मनिर्भरता की मिसाल : हौंसले और कठिन परिश्रम से टायर डॉक्टर व आइरन लेडी’ बनी कमला

 | 
आत्मनिर्भरता की मिसाल : हौंसले और कठिन परिश्रम से टायर डॉक्टर व आइरन लेडी’ बनी कमला


नैनीताल, 28 सितंबर (हि.स.)। नैनीताल जनपद के रामगढ़ विकासखंड की दाड़िमा ग्राम सभा निवासी 54 साल की कमला नेगी पिछले लगभग 20 वर्षों से रामगढ़-मुक्तेश्वर मार्ग पर ओड़ाखान गांव में वाहन मरम्मत का काम कर ‘टायर डॉक्टर’ व ‘आइरन लेडी’ जैसे नामों से अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं।

जहां शहरों में भी महिलाएं वाहनों की मरम्मत के कार्य करती नजर नहीं आती हैं और यह कार्य परंपरागत रूप से पुरुषों से जुड़े माने जाते हैं, इनके लिये ताकत की जरूरत भी मानी जाती है, ऐसे काम को कमला ने न केवल अपनाया, बल्कि अपने हुनर के बल पर क्षेत्र में भरोसे का नाम भी बनाया है। उनकी दुकान में साइकिल और दोपहिया वाहनों से लेकर कार, ट्रक, बस, डंपर और जेसीबी जैसे भारी वाहनों के टायरों की मरम्मत की सुविधा उपलब्ध है। वह सोशल मीडिया पर कमला नेगी आयरन लेडी ऑफ नैनीताल के नाम से भी सक्रिय हैं।

कमला बताती हैं कि उन्होंने वर्ष 2004 के आसपास बच्चों को किराये पर साइकिल देने के छोटे से काम से शुरुआत की थी। साइकिलों में पंचर होने पर उन्हें ठीक कराने के लिए किसी दूसरे व्यक्ति के पास ले जाने के बजाय उन्होंने स्वयं पंचर जोड़ना सीखना शुरू किया। धीरे-धीरे आसपास के लोग स्कूटर और मोटर साइकिल के पंचर लेकर भी उनके पास आने लगे। काम बढ़ा तो उन्होंने बड़े वाहनों के टायरों की मरम्मत का काम भी सीखा और उनका सफर साइकिल के छोटे पंचर से बढ़ते हुए कार, ट्रक, बस और अंततः बड़े भारवाहक डम्परों व जेसीबी जैसे भारी वाहनों के टायरों की मरम्मत तक पहुंच गया।

उनकी दुकान की उपयोगिता इसलिए भी अधिक है क्योंकि इस पर्वतीय मार्ग पर शीतला से नथुवाखान के बीच लगभग 25 किलोमीटर के दायरे में कोई दूसरी पंचर और वाहनों की मरम्मत की दुकान उपलब्ध नहीं है। ऐसे में स्थानीय लोगों के साथ रामगढ़-मुक्तेश्वर मार्ग से गुजरने वाले पर्यटकों और अन्य वाहन चालकों के लिए कमला की दुकान महत्वपूर्ण पड़ाव बन गई है। रास्ते में वाहन का टायर पंचर होने या कोई छोटी तकनीकी समस्या आने पर चालक यहां मरम्मत कराकर आगे की यात्रा जारी रख सकते हैं। दुकान के पास ही कमला का घर है और वहां उनका संपर्क नंबर भी उपलब्ध रहता है, जिससे रात में भी आपात स्थिति में जरूरतमंद उन्हें फोन कर सहायता के लिए बुला सकते हैं।

कमला का काम केवल पंचर बनाने तक सीमित नहीं है। वह टायरों की मरम्मत के साथ बाइक और कार की हल्की सर्विसिंग भी करती हैं। टायर, ब्रेक, क्लच और एक्सीलेटर की तार बदलने, इंजन ऑयल और गियर ऑयल बदलने, ग्रीसिंग करने तथा वाहन की छोटी-मोटी तकनीकी समस्याओं को दूर करने की सुविधा भी उनकी दुकान पर उपलब्ध है। इससे वाहन चालकों को रास्ते में आई छोटी खराबियों के लिए तत्काल समाधान मिल जाता है और बड़ी खराबी की स्थिति में वाहन को शहर तक ले जाना संभव हो पाता है। बड़े और भारी टायरों के साथ काम करने के लिए शारीरिक शक्ति व मेहनत के साथ तकनीकी समझ की भी जरूरत होती है, जिसे कमला ने वर्षों के अभ्यास से हासिल किया है।

कमला बताती हैं कि इस काम की शुरुआत में उन्हें सामाजिक तानों का सामना भी करना पड़ा। उन्हें तरह-तरह की बातें सुननी पड़ीं, लेकिन उन्होंने इन्हें अपने रास्ते की बाधा नहीं बनने दिया। वह लगातार काम सीखती रहीं और अपने कौशल को बेहतर बनाती गईं। समय के साथ वही लोग जरूरत पड़ने पर अपने वाहन की मरम्मत के लिए उन्हें बुलाने लगे। इस तरह उन्होंने आलोचनाओं का जवाब अपने काम और हुनर से दिया।

कमला नेगी के इस सफर में उनके पति हयात सिंह नेगी का भी सहयोग रहा है। अपने हुनर से आर्थिक रूप से मजबूत हो वह हवाई जहाज से भी देश के कई दर्शनीय स्थलों की यात्रा कर चुकी हैं। उनके कार्य और प्रयासों के लिए विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के साथ राज्य सरकार की ओर से भी उन्हें सम्मान और प्रशस्ति-पत्र मिल चुके हैं।

कमला नेगी की कहानी केवल एक महिला के वाहन मरम्मत जैसे कठिन काम को अपनाने की कहानी नहीं है, बल्कि यह पहाड़ में स्थानीय स्तर पर रोजगार, तकनीकी कौशल और आत्मनिर्भरता की संभावनाओं को भी सामने लाती है।

उन्होंने आवश्यकता से शुरू हुए छोटे काम को वर्षों की मेहनत से ऐसे व्यवसाय में बदला, जो आज स्थानीय वाहन चालकों और इस पर्वतीय मार्ग से गुजरने वाले यात्रियों के लिए उपयोगी सेवा बन चुका है। उनके काम से यह भी स्पष्ट होता है कि हुनर सीखने और लगातार मेहनत करने की इच्छा हो तो पारंपरिक रूप से किसी एक वर्ग या लिंग से जुड़े माने जाने वाले काम में भी अपनी पहचान बनाई जा सकती है।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. नवीन चन्द्र जोशी