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लोगों की अटूट श्रद्धा का केंद्र है पीपल के पेड़ पर विराजमान शिवलिंग

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लोगों की अटूट श्रद्धा का केंद्र है पीपल के पेड़ पर विराजमान शिवलिंग


लोगों की अटूट श्रद्धा का केंद्र है पीपल के पेड़ पर विराजमान शिवलिंग


लोगों की अटूट श्रद्धा का केंद्र है पीपल के पेड़ पर विराजमान शिवलिंग


खूंटी, 31 जुलाई (हि.स.)। प्राकृतिक सौंदर्य और प्राचीन धार्मिक स्थलों के लिए प्रसिद्ध खूंटी जिले में कई ऐसे स्थान हैं, जहां प्रकृति और आस्था का अनूठा संगम देखने को मिलता है। इन्हीं में से एक है तोरपा प्रखंड के जरिया महादेव टोली गांव में स्थित प्राचीन पीपल के पेड़ पर वर्षों से शिवलिंग विराजमान है। यह स्थल आज श्रद्धालुओं के लिए आस्था और कौतूहल का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, महादेव टोली गांव में इतने अधिक शिवलिंग मिले कि गांव का नाम ही महादेव टोली पड़ गया। गांव में आज भी अनेक प्राचीन शिवलिंग, देवी-देवताओं की पत्थर की मूर्तियां, सुदर्शन चक्र और रथ के पहिए जैसे पुरातात्विक अवशेष मौजूद हैं, जो इस क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व को दर्शाते हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि पीपल का यह पेड़ पहले काफी छोटा था। उसी समय से शिवलिंग इसकी जड़ों के बीच स्थापित है। समय के साथ जैसे-जैसे पेड़ ऊंचा होता गया, शिवलिंग भी जमीन से लगभग 25 से 30 मीटर की ऊंचाई पर पहुंच गया। आज भी श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना के लिए पेड़ पर चढ़ना पड़ता है। हालांकि अधिक ऊंचाई होने के कारण केवल सक्षम लोग ही वहां तक पहुंच पाते हैं, जबकि अन्य श्रद्धालु नीचे से ही भगवान भोलेनाथ के दर्शन कर पूजा करते हैं।

मंदिर के पुजारी लक्ष्मी नारायण चौबे बताते हैं कि उनका परिवार कई पीढ़ियों से यहां पूजा-अर्चना करता आ रहा है। उनके अनुसार, गांव में खुदाई के दौरान दर्जनों शिवलिंग मिले थे। इनमें से कुछ को अन्य गांवों के लोग अपने साथ ले गए, लेकिन आज भी यहां आठ-दस प्राचीन शिवलिंग सुरक्षित हैं। वर्तमान में यहां मंदिर का निर्माण कराया गया है।

सावन महीने के अलावा महाशिवरात्रि और मंडा पूजा के अवसर पर यहां विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं। इन अवसरों पर दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक और पूजा-अर्चना करते हैं। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य फलदायी होती है।

ग्रामीणों ने इस स्थल को पुरातात्विक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताते हुए सरकार और प्रशासन से इसके संरक्षण, सौंदर्यीकरण और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं के विकास की मांग की है। उनका कहना है कि यदि इस प्राचीन धरोहर का संरक्षण किया जाए तो यह धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बन सकता है और क्षेत्र के विकास को भी नई गति मिलेगी।

मंदिर की देखरेख करनेवाली समिति के सदस्य जरिया महादेव टोली निवासी नागेंद्र कुमार और बालगोविन्द सिंह कहते हैं कि यहां इतनी संख्या में शिवलिंग, सुदर्शन चक्र, प्राचीन देवी देवताओं की प्रतिमा मिलना बताता है कि यह जगह ऐतिहासिक और पुरातत्विक दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण है। सरकार और प्रशासन को इसके विकास पर ध्यान देना चाहिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / अनिल मिश्रा