जर्जर सड़कों ने रोकी पेरवाघाघ-पाण्डुपुडिंग के पर्यटन विकास की रफ्तार
-तोरपा-तपकारा से जलप्रपातों तक पहुंचना मुश्किल-पर्यटन सुविधाओं पर करोड़ों खर्च के बावजूद सड़क संपर्क बदहाल
खूंटी, 22 अगस्त (हि.स.)। झारखंड के प्रमुख और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर पर्यटन स्थलों में शुमार पेरवाघाघ और पाण्डुपुडिंग जलप्रपात तक पहुंचने वाली जर्जर सड़कें पर्यटन विकास की राह में बड़ी बाधा बन गई हैं। तोरपा और तपकारा से इन जलप्रपातों की ओर जाने वाले मार्गों की खराब स्थिति के कारण पर्यटकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सड़क की बदहाली का असर ऐसा है कि कई पर्यटक यहां आने की योजना बनाने के बाद रास्ते की स्थिति की जानकारी मिलने पर अपना कार्यक्रम बदल देते हैं।
सरकार और पर्यटन विभाग की ओर से राज्य के प्राकृतिक पर्यटन स्थलों को विकसित करने, पर्यटकों के लिए सुविधाएं बढ़ाने और आधारभूत संरचना तैयार करने पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसके बावजूद पर्यटन स्थलों तक पहुंचने वाली सड़कें यदि बदहाल रहें तो विकास की यह पूरी कवायद अधूरी साबित होती है। पेरवाघाघ इसका प्रमुख उदाहरण बनकर सामने आया है।
हालात बदले, बढ़ी पर्यटकों की आवाजाही
एक समय नक्सलवाद और उग्रवाद के कारण खूंटी जिले के कई प्राकृतिक पर्यटन स्थल वीरान पड़े रहते थे। सुरक्षा संबंधी चिंताओं के चलते बाहरी पर्यटक इन क्षेत्रों में जाने से बचते थे। अब केंद्र और राज्य सरकार के प्रयासों के बाद परिस्थितियों में काफी बदलाव आया है। जिले में सुरक्षा का माहौल बेहतर होने के साथ पर्यटन स्थलों की ओर सैलानियों की आवाजाही भी बढ़ी है।
पेरवाघाघ, पाण्डुपुडिंग, चंचला घाघ और रनिया प्रखंड के उलूंग जलप्रपात जैसे प्राकृतिक स्थल अब स्थानीय लोगों के साथ-साथ रांची और आसपास के जिलों के पर्यटकों को भी आकर्षित कर रहे हैं। खासकर सर्दियों के मौसम में इन स्थलों पर पिकनिक मनाने और प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। हालांकि खराब सड़कें पर्यटन की इस बढ़ती संभावनाओं पर ब्रेक लगा रही हैं।
जगह-जगह बड़े गड्ढे, उखड़ चुकी सड़क
पेरवाघाघ और पाण्डुपुडिंग जाने वाली सड़क की स्थिति कई स्थानों पर बेहद खराब है। सड़क पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं और कई हिस्सों में सड़क की ऊपरी सतह पूरी तरह उखड़ चुकी है। जंगलों के बीच से गुजरने वाली संकरी सड़क पर कई जगह वाहन लेकर निकलना भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
वाहन चालकों को इन रास्तों पर बेहद धीमी गति से और सावधानीपूर्वक वाहन चलाना पड़ता है। बारिश के दिनों में सड़क की स्थिति और खराब हो जाती है। गड्ढों में पानी भर जाने के कारण उनकी गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है। इससे पर्यटकों के साथ-साथ आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों को भी रोजमर्रा के आवागमन में परेशानी होती है।
नवंबर से मार्च तक रहता है मुख्य पर्यटन सीजन
पेरवाघाघ और पाण्डुपुडिंग का मुख्य पर्यटन सीजन नवंबर से मार्च तक माना जाता है। इस दौरान खूंटी के अलावा रांची, सिमडेगा, गुमला तथा पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं। घने जंगलों, पहाड़ी परिवेश और प्राकृतिक वातावरण के बीच बहता जलप्रपात सैलानियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है।
पेरवाघाघ में पर्यटन सुविधाओं को विकसित करने और क्षेत्र के सौंदर्यीकरण का काम भी चल रहा है। पर्यटन विभाग की ओर से इसके सौंदर्यीकरण पर करीब 8.82 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। विभागीय अधिकारियों के अनुसार परियोजना का करीब 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और इसे नए साल से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
ऐसे में यदि पर्यटन स्थल का सौंदर्यीकरण पूरा हो जाता है, लेकिन वहां तक पहुंचने वाली सड़क बदहाल रहती है, तो पर्यटकों को अपेक्षित सुविधा नहीं मिल पाएगी। इससे पर्यटन परियोजना का उद्देश्य भी प्रभावित होने की आशंका है।
सड़क निर्माण के लिए डीपीआर तैयार
पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता अनूप रंजन लकड़ा के अनुसार पेरवाघाघ की ओर जाने वाली सड़क के निर्माण के लिए डीपीआर तैयार कर प्रशासनिक स्वीकृति के लिए विभाग को भेजा गया है। फिलहाल यह सड़क ग्रामीण कार्य विभाग के अधीन है। प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद सड़क को पथ निर्माण विभाग को हस्तांतरित किया जाएगा और इसके बाद निर्माण की प्रक्रिया शुरू होगी।
उन्होंने बताया कि मौजूदा स्थिति को देखते हुए इस वर्ष के पिकनिक सीजन तक सड़क निर्माण पूरा होने की संभावना कम है। अगले वर्ष जनवरी से सड़क निर्माण का काम शुरू होने की उम्मीद है। इसका मतलब है कि इस वर्ष नवंबर से शुरू होने वाले पर्यटन सीजन में भी पर्यटकों को जर्जर सड़क से होकर ही जलप्रपात तक पहुंचना पड़ सकता है।
सड़क सुधरे तो बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी पर्यटन स्थल को विकसित करने के लिए केवल जलप्रपात का सौंदर्यीकरण या पर्यटक सुविधाएं विकसित करना पर्याप्त नहीं है। पर्यटकों को वहां तक पहुंचने के लिए सुरक्षित, सुगम और बेहतर सड़क संपर्क भी उपलब्ध कराना जरूरी है।
बेहतर सड़क बनने से पेरवाघाघ और आसपास के पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की संख्या बढ़ सकती है। इससे स्थानीय स्तर पर होटल, ढाबा, दुकान, वाहन सेवा, गाइड और अन्य पर्यटन गतिविधियों से जुड़े रोजगार के अवसर पैदा होंगे। स्थानीय उत्पादों और हस्तशिल्प की बिक्री को भी बढ़ावा मिल सकता है।
जानकारों का कहना है कि खूंटी में प्राकृतिक पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। सुरक्षा व्यवस्था में सुधार के बाद पर्यटकों का भरोसा भी बढ़ा है और अब जरूरत पर्यटन स्थलों तक बेहतर आधारभूत सुविधाएं पहुंचाने की है। पेरवाघाघ और पाण्डुपुडिंग तक मजबूत सड़क संपर्क को पर्यटन विकास की अगली महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। यदि सौंदर्यीकरण के साथ सड़क निर्माण भी समयबद्ध तरीके से पूरा होता है तो खूंटी जिले को राज्य के प्रमुख प्राकृतिक पर्यटन केंद्रों में स्थापित करने में मदद मिल सकती है।-----------
हिन्दुस्थान समाचार / अनिल मिश्रा

