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कांवरिया पथ पर दिखी मानवता की मिसाल, थके डाक बम को सहारा देकर मंदिर तक पहुंचाया

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कांवरिया पथ पर दिखी मानवता की मिसाल, थके डाक बम को सहारा देकर मंदिर तक पहुंचाया


देवघर, 07 अगस्त (हि.स.)। राजकीय श्रावणी मेला केवल आस्था का महापर्व ही नहीं, बल्कि अनेकता में एकता, सेवा और आपसी सहयोग की भावना का भी जीवंत उदाहरण बनकर सामने आ रहा है। सुल्तानगंज से पवित्र गंगाजल लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर बढ़ रहे कांवरियों के बीच सेवा, समर्पण और भाईचारे की कई मिसालें देखने को मिल रही हैं।

शुक्रवार को कांवरिया पथ पर ऐसा ही भावुक दृश्य देखने को मिला, जब एक साधारण कांवरिया थककर कमजोर पड़े एक डाक बम श्रद्धालु को सहारा देकर मंदिर की ओर ले जाता नजर आया। वहीं, एक अन्य स्थान पर दो महिला कांवरियों ने थककर निढाल हो चुके एक पुरुष डाक बम को संभाला और उसकी यात्रा पूरी करने में मदद की। इस मानवीय पहल को देखकर राहगीरों और अन्य श्रद्धालुओं ने भी कांवरियों की सराहना की।

मान्यता है कि डाक बम श्रद्धालु बिना रुके लगातार दौड़ते या तेज गति से चलते हुए बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचते हैं। लंबी और कठिन यात्रा के दौरान कई श्रद्धालु थककर कमजोर पड़ जाते हैं। ऐसे में साथी कांवरिया उनका सहारा बनकर उन्हें सुरक्षित मंदिर तक पहुंचाने में मदद करते हैं। कई बार किसी श्रद्धालु की तबीयत बिगड़ने पर अन्य कांवरिया उसके कांवर का जल बाबा बैद्यनाथ को अर्पित करने की जिम्मेदारी भी निभाते हैं।

श्रावणी मेला के दौरान कांवरिया पथ पर सामने आ रहे ऐसे दृश्य बताते हैं कि देवघर की कांवर यात्रा केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि मानवता, सहयोग और भाईचारे का भी सशक्त संदेश देती है।

पिछले आठ दिनों से कांवरियों का सैलाब लगातार बाबा नगरी की ओर उमड़ रहा है। तेज धूप और गर्मी के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह और संकल्प कम नहीं हुआ है। सुल्तानगंज की उत्तरवाहिनी गंगा से पवित्र जल लेकर पैदल बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचने और जलाभिषेक करने का उनका संकल्प हर कदम पर आस्था, सेवा और समर्पण की नई मिसाल पेश कर रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / Anup Kumar Roy