धरनादा नदी पर पुल का इंतजार: हर बरसात में कट जाता है दर्जनों गांवों का संपर्क, शिक्षा-स्वास्थ्य पर गहराया संकट
-खूंटी के कर्रा प्रखंड में वर्षों से पुल निर्माण की मांग अधूरी- बारिश में जान जोखिम में डालकर नदी पार करने को मजबूर ग्रामीण- विभाग ने की प्रस्ताव भेजे जाने की पुष्टि
खूंटी, 17 जुलाई (हि.स.)। झारखंड के खूंटी जिले के कर्रा प्रखंड की कुदलूम पंचायत स्थित धरनादा नदी पर पुल का निर्माण नहीं होने से दिगादोन, पतरा मुछिया सहित दर्जनों गांवों के हजारों ग्रामीण वर्षों से बरसात के मौसम में गंभीर परेशानियों का सामना कर रहे हैं। बारिश के दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ते ही इन गांवों का मुख्य सड़क मार्ग से संपर्क पूरी तरह टूट जाता है। इसका सीधा असर शिक्षा, स्वास्थ्य, आवागमन, खेती-बाड़ी और ग्रामीणों के सामाजिक-आर्थिक जीवन पर पड़ता है। वर्षों से पुल निर्माण की मांग के बावजूद अब तक कोई ठोस पहल नहीं होने से ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है।
बरसात शुरू होते ही धरनादा नदी उफान पर आ जाती है। तेज बहाव के कारण नदी पार करना जान जोखिम में डालने जैसा हो जाता है। ऐसे में दिगादोन, पतरा मुछिया और आसपास के कई गांवों के लोग कई दिनों तक मुख्य सड़क से कटे रहते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या हर वर्ष सामने आती है, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।
धरनादा नदी पर पुल नहीं होने का सबसे अधिक असर स्कूली बच्चों पर पड़ता है। नदी में पानी बढ़ने के बाद बच्चे स्कूल नहीं जा पाते और कई दिनों तक उनकी पढ़ाई बाधित रहती है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को तेज बहाव वाली नदी पार कराना संभव नहीं होता, इसलिए उन्हें घर पर ही रोकना पड़ता है। इससे उनकी नियमित पढ़ाई प्रभावित होती है और परीक्षा की तैयारी भी बाधित होती है।
ग्रामीणों के अनुसार, बरसात के मौसम में कई बच्चों की स्कूलों में उपस्थिति लगभग समाप्त हो जाती है। इससे शिक्षा व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है और ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
पुल के अभाव में स्वास्थ्य सेवाएं भी गंभीर रूप से प्रभावित होती हैं। यदि किसी ग्रामीण की तबीयत अचानक खराब हो जाए या किसी गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाना पड़े तो लोगों को लगभग 10 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाकर प्रखंड, पंचायत या जिला मुख्यालय पहुंचना पड़ता है। कई बार गंभीर मरीजों के लिए यह देरी जानलेवा साबित हो सकती है।
ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दौरान एंबुलेंस भी गांव तक नहीं पहुंच पाती। ऐसे में मरीजों को चारपाई या अन्य अस्थायी साधनों के सहारे सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की मजबूरी होती है।
धरनादा नदी का तेज बहाव पहले भी कई परिवारों को गहरा दर्द दे चुका है। ग्रामीणों के अनुसार तीन-चार वर्ष पहले एक स्कूली छात्र नदी पार करने के दौरान तेज धारा में बह गया था, जिससे उसकी मौत हो गई थी। इसके अलावा मार्शल हेरेंज भी नदी पार करते समय बह गए थे। बाद में उनका शव धरनादा नदी के चेक डैम के समीप बरामद हुआ था।
इन घटनाओं के बावजूद अब तक पुल निर्माण नहीं होने से ग्रामीणों में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के प्रति नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि जब तक कोई बड़ी दुर्घटना नहीं होती, तब तक उनकी समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया जाता।
दिगादोन गांव के ग्राम प्रधान प्यारा मिंज ने बताया कि धरनादा नदी पर पुल निर्माण की मांग कोई नई नहीं है। यह वर्षों पुरानी समस्या है, जिसे लेकर लगातार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का ध्यान आकृष्ट कराया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि हर वर्ष बरसात में वही स्थिति उत्पन्न होती है। यदि नदी पर पुल बन जाए तो न केवल आवागमन आसान होगा, बल्कि बच्चों की शिक्षा, किसानों की आजीविका, स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और ग्रामीणों के सामाजिक-आर्थिक जीवन में भी व्यापक सुधार आएगा।
पतरा मुछिया के ग्राम प्रधान ने बताया कि पुल और संपर्क सड़क निर्माण की मांग को लेकर कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन को ज्ञापन सौंपा जा चुका है। ग्रामीणों ने सांसद काली चरण मुंडा, विधायक राम सूर्या मुंडा, जिला प्रशासन तथा तत्कालीन ग्रामीण विकास मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा से भी कई बार इस संबंध में हस्तक्षेप की मांग की थी। उन्होंने कहा कि आश्वासन तो कई बार मिले, लेकिन जमीनी स्तर पर अब तक कोई कार्य शुरू नहीं हुआ। इससे ग्रामीणों में निराशा और असंतोष बढ़ता जा रहा है।
पतरा मुछिया की निवासी प्रभा बाखला, अर्चना मिंज और रूपुस आइंद ने कहा कि वर्षों से पुल की मांग की जा रही है, लेकिन न प्रशासन और न ही जनप्रतिनिधियों ने इस समस्या का स्थायी समाधान किया। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज भी ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जीवन जीने को मजबूर हैं। बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है और लोगों की जान तक खतरे में पड़ रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि धरनादा नदी पर पुल और संपर्क सड़क का निर्माण केवल एक विकास परियोजना नहीं, बल्कि हजारों लोगों की सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और सम्मानजनक जीवन से जुड़ा मुद्दा है। उनका मानना है कि यदि जल्द इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो हर बरसात में लोग इसी तरह अलग-थलग पड़ने और जान जोखिम में डालने को मजबूर होते रहेंगे।
विभाग ने प्रस्ताव भेजे जाने की पुष्टि की
धरनादा नदी पर पुल निर्माण को लेकर ग्रामीण कार्य विभाग के कनीय अभियंता मनोज कुमार ने बताया कि कुछ वर्ष पहले विभाग की ओर से पुल निर्माण का प्रस्ताव उच्च स्तर पर भेजा गया था। हालांकि, अब तक उस प्रस्ताव पर कोई स्वीकृति या जवाब प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि स्वीकृति मिलने के बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी।
ग्रामीणों ने कहा कि अब वे अपनी मांग सीधे मुख्यमंत्री के समक्ष रखेंगे। उनका कहना है कि यदि सरकार शीघ्र पुल निर्माण की दिशा में ठोस निर्णय नहीं लेती है तो आने वाले वर्षों में भी हजारों लोग हर बरसात में जान जोखिम में डालकर नदी पार करने को मजबूर होंगे।---------------
हिन्दुस्थान समाचार / अनिल मिश्रा

