प्राकृतिक सौंदर्य और लोककथाओं का संगम है जशपुर का रानीदाह जलप्रपात, सैलानियों को कर रहा आकर्षित
जशपुर, 28 जून (हि.स.)। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले की हरी-भरी पहाड़ियों और घने साल के जंगलों के बीच स्थित रानीदाह जलप्रपात इन दिनों पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। जशपुर नगर से लगभग 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह जलप्रपात प्राकृतिक सुंदरता का एक अद्भुत प्रतीक है। खूबसूरत मोड़ों और वादियों से होकर जब सैलानी इस स्थल तक पहुँचते हैं, तो सामने फैली हरियाली, चट्टानों से गिरता दूधिया जल और पक्षियों का कलरव मिलकर एक अविस्मरणीय दृश्य प्रस्तुत करते हैं।
खासकर मानसून के मौसम में रानीदाह अपने पूरे वैभव पर होता है, जब पानी कई धाराओं में बँटकर ऊँची चट्टानों से नीचे गिरता है। हालांकि, गर्मी के दिनों में यहाँ जल प्रवाह भले थोड़ा कम हो जाता है, लेकिन आसपास की प्राकृतिक शांति और वातावरण का सौंदर्य हमेशा समान रूप से मनमोहक रहता है, जो लोगों को सुकून का अहसास कराता है।
यह मनोरम पर्यटन स्थल केवल प्राकृतिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि अपनी सदियों पुरानी लोककथाओं और रहस्यमयी इतिहास के कारण भी बेहद प्रसिद्ध है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, बहुत समय पहले ओडिशा की एक राजकुमारी, रानी शिरोमणि जशपुर की इन खूबसूरत पहाड़ियों में आ पहुँची थीं। जब उनके पिता और पाँच भाई उनका पीछा करते हुए यहाँ पहुँचे, तो राजकुमारी ने अपने आत्मसम्मान की रक्षा और जबरन विवाह से बचने के लिए इसी गहरी खाई में छलांग लगा दी।
इसी ऐतिहासिक घटना के बाद से इस झरने का नाम “रानीदाह” पड़ गया, जिसका शाब्दिक अर्थ “रानी का जलप्रपात” होता है। आज भी झरने के पास स्थित कुछ विशेष चट्टानें “पाँच भैया” के नाम से जानी जाती हैं, जिन्हें रानी के भाइयों का प्रतीक माना जाता है। पीढ़ी दर पीढ़ी सुनी जाने वाली यह भावुक कथा इस स्थल को एक रहस्यमयी और भावनात्मक पहचान देती है। यदि आप भी प्रकृति की गोद में शांति और इतिहास को महसूस करना चाहते हैं, तो इस शांत और मनोरम पिकनिक स्पॉट का भ्रमण जरूर करें।
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हिन्दुस्थान समाचार / पारस नाथ सिंह

