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370 के बाद बदलता जम्मू कश्मीर-विकास की रफ्तार तेज, चुनौतियाँ बरकरार (लेखिका पूनम झा)

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370 के बाद बदलता जम्मू कश्मीर-विकास की रफ्तार तेज, चुनौतियाँ बरकरार (लेखिका पूनम झा)


कठुआ, 11 जून (हि.स.)। 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 और 35ए को निरस्त किए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में विकास, प्रशासन और सुरक्षा के क्षेत्र में कई बदलाव देखने को मिले हैं। केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद यहां केंद्र सरकार की योजनाओं और कानूनों का सीधा लाभ लोगों तक पहुंचना शुरू हुआ।

पर्यटन को मिला बढ़ावा-पिछले कुछ वर्षों में पर्यटन क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। बड़ी संख्या में पर्यटकों के आगमन से होटल, ट्रांसपोर्ट, हस्तशिल्प और छोटे कारोबारों को बढ़ावा मिला है जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। सुरक्षा व्यवस्था में सुधार हुआ है। सुरक्षा एजेंसियों के बेहतर समन्वय और लगातार अभियानों के चलते आतंकवाद और घुसपैठ की घटनाओं में कमी आई है। हालांकि सुरक्षा चुनौतियाँ पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं लेकिन स्थिति पहले की तुलना में अधिक नियंत्रित बताई जा रही है।

इन्फ्रास्ट्रक्चर में तेजी-

सड़क, रेल और सुरंग परियोजनाओं में तेजी आई है। बनिहाल-काजीगुंड सुरंग, चिनाब रेलवे पुल और राष्ट्रीय राजमार्ग-44 के विस्तार जैसी परियोजनाओं से कनेक्टिविटी बेहतर हुई है और यात्रा समय में कमी आई है।

उद्योग और निवेश में वृद्धि-

नई औद्योगिक नीतियों के तहत कठुआ, सांबा जैसे क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहन मिला है। बेहतर सुरक्षा और आधारभूत ढांचे के कारण निवेशकों का विश्वास बढ़ा है जिससे रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं।

स्वास्थ्य और सामाजिक योजनाओं का विस्तार-आयुष्मान भारत योजना के तहत लोगों को कैशलेस इलाज की सुविधा मिल रही है। इसके अलावा प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना और स्वच्छ भारत मिशन जैसी योजनाओं ने आम लोगों के जीवन स्तर में सुधार किया है।

वंचित वर्गों को मिले अधिकार-अनुच्छेद 370 हटने के बाद महिलाओं, शरणार्थियों और अन्य वंचित वर्गों को समान संवैधानिक अधिकार मिलने का रास्ता साफ हुआ है, जिससे सामाजिक न्याय को बल मिला है।

विशेष दर्जा हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में विकास की रफ्तार तेज हुई है और कई क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं। हालांकि कुछ चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं लेकिन बदलते हालात इस क्षेत्र में नई संभावनाओं की ओर इशारा करते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / सचिन खजूरिया