ऐसा मंदिर जहां असाध्य बीमारी से मिलती है निजात , नागपंचमी पर श्रद्धालुओं की जुटी भारी भीड़
सांपों के आतंक से छुटकारा दिलाने को कई दशक पहले बना था नाग देवता का मंदिर
हमीरपुर, 17 अगस्त (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में एक ऐसा मंदिर पूरे क्षेत्र में विख्यात है जहां नाग देवता की पूजा कर सर्पदंश के शिकार लोगों का इलाज किया जाता है। हर साल नागपंचमी के दिन यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटती है। मंदिर में बेशकीमती पत्थर के नाग देवता विराजमान है। जिसके सम्मुख असाध्य बीमारी से पीड़ित लोगों का भी इलाज नागपंचमी के दिन होता है।
जिले के कुरारा क्षेत्र के टोडरपुर गांव में नागपंचमी पर्व की तैयारियां मकई दिनों से शुरू हो गयी थी। इस मंदिर का निर्माण 25 बरस पहले किया गया था। मंदिर का निर्माण गांव के ही लाखन प्रजापति ने करवाया था। मंदिर में पत्थर के नाग देवता विराजमान है। मंदिर के पिछले हिस्से में नाग देवता की लम्बी पूछ जमीन पर है जिसे लोग बड़े ही श्रद्धा भाव से नमन करते है। इस स्थान की मान्यता हमीरपुर के अलावा महोबा, जालौन, फतेहपुर, कानपुर देहात, कानपुर के लोगों में है जो हर साल नागपंचमी के दिन यहां दर्शन करने आते है। बड़ी संख्या में बीमार लोग भी परिजनों के साथ इलाज कराने के लिये मंदिर आते है। यह मंदिर सर्पदंश के शिकार लोगों के लिये पूरे क्षेत्र में जाना जाता है। मंदिर के बुजुर्ग पुजारी लाखन प्रजापति ने बताया कि इस स्थान पर दूरदराज से सर्पदंश से पीड़ित लोग इलाज कराने आते है। यदि कुछ ही घंटे में सर्पदंश का शिकार व्यक्ति मंदिर आ जाता है तो वह पूरी तरह से ठीक होकर जाता है। इस गांव में सर्पदंश के कारण किसी के मरने की खबरें प्रकाश में नहीं आयी है।
सांपों के आतंक से छुटकारे को निर्मित हुआ मंदिरटोडरपुर गांव के लाखन प्रजापति ने बताया कि गांव में किसी जमाने में सांपों का आतंक था। गांव के आसपास के इलाके में हर साल बड़ी संख्या में लोग सर्पदंश से मरते थे। इस संकट से छुटकारा के लिये ही गांव में नाग देवता का मंदिर बनवाया गया है। उनका कहना है कि नाग देवता का मंदिर बनने के बाद आसपास के इलाकों में भी सांपों का आतंक खत्म हो गया है।
मंदिर में असाध्य बीमारी भी हो जाती है छूमंतर
मंदिर के बुजुर्ग पुजारी लाखन प्रजापति ने बताया कि पिछले दो दशक के अंदर सैकड़ों मरीज इस मंदिर से ठीक हुये है। गले में कैंसर जैसे फोड़े का भी इस नाग देवता के मंदिर में चीरा लगाकर पूरा पस (मवाद) मुंह से पीया जाता है जिससे रोगी कुछ ही दिन में पूरी तरह से ठीक हो जाता है। मंदिर में बारी-बारी से मरीजों का नाग देवता के सामने झाड़ फूंक कर इलाज किया जाता है।
श्रद्धालुओं को मंदिर से मिलती है दुआयें
पुजारी ने बताया कि कानपुर की सीता रावत यहां नागपंचमी के दिन आयी थी। वह गले की गांठ से पीड़ित थी। इसका इलाज नाग देवता के सामने किया गया था। वह पूरी तरह से ठीक हो चुकी है। ईश्वरीय विधान के चलते केवल नाग देवता के मंदिर में मरीजों और अन्य लोगों को दुआयें दी जाती है। यहां पर होने वाले हवन पूजन की राख भी बीमारी छूमंतर होती है।
रात भर नाग देवता मंदिर में लगता है दरबार
टोडरपुर गांव में नाग देवता के मंदिर में आने वाले मरीजों और श्रद्धालुओं के रुकने और भोजन की व्यवस्थायें पुजारी ही करते है। मंदिर परिसर पर दिन भर मेले की धूम रहती है। यहां नाग देवता मंदिर में मरीजों के इलाज के लिये पुजारी रात भर दरबार लगाते है। सर्पदंश के शिकार लोगों का भी झाड़ फूंक और तंत्रमंत्र से इलाज होता है। मंदिर परिसर में दो दिन तक मेला भी लगता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज मिश्रा

