सूरत के गणेशोत्सव में दिखेगा आधुनिकता का संगम, 22 फीट की ईको-फ्रेंडली प्रतिमा बनेगी आकर्षण
सूरत, 12 सितंबर (हि.स.)। सूरत में इस वर्ष गुजरात के सबसे बड़े गणेशोत्सव आयोजनों में से एक की तैयारी की जा रही है। लोकमान्य तिलक गणेश उत्सव मंडल की ओर से बालर फार्म में करीब 3.60 लाख वर्गफीट क्षेत्रफल में 11 दिवसीय भव्य गणेशोत्सव आयोजित किया जाएगा। आयोजन पर 6 करोड़ से अधिक खर्च होने का अनुमान है।
इस बार गणेशोत्सव में परंपरा और आधुनिकता का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। जेन-ज़ी युवाओं को भारतीय संस्कृति और भक्ति से जोड़ने के लिए भजन क्लबिंग और जेमिंग जैसे नए प्रयोग किए जाएंगे। आयोजकों के अनुसार, इसका उद्देश्य युवाओं को परिवार के साथ गणेशोत्सव से जोड़ना और भक्ति को आधुनिक अंदाज में उनके बीच पहुंचाना है।
आयोजन का प्रमुख आकर्षण 22 फीट ऊंची टिश्यू पेपर से तैयार ईको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमा होगी। प्रतिमा को पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ स्थापित किया जाएगा। रॉयल सिंहासन पर विराजमान बप्पा की प्रतिमा को करीब 50 लाख रुपये के सोने-चांदी के आभूषणों से सजाया जाएगा।
पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए प्रतिमा का विसर्जन नदी या समुद्र में नहीं किया जाएगा। इसके लिए बालर फार्म के पंडाल ग्राउंड में ही कृत्रिम कुंड तैयार किया जाएगा।
गुजरात में पहली बार किसी गणेशोत्सव मंडल का नेतृत्व महिला कर रही हैं। मंडल की अध्यक्ष पूजा पटेल के नेतृत्व में 11 दिनों तक धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। उनका कहना है कि महिलाएं भी इतने बड़े आयोजन का सफलतापूर्वक नेतृत्व कर सकती हैं।
गणेशोत्सव के दौरान सुरक्षा व्यवस्था संभालने वाले पुलिसकर्मियों का जेन-ज़ी युवाओं की ओर से विशेष सम्मान किया जाएगा। इसके साथ ही दिव्यांग और अनाथ बच्चों की सेवा जैसे सामाजिक प्रकल्पों में युवाओं को सहभागी बनाया जाएगा।
यातायात और पार्किंग व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए स्वयंसेवकों की तैनाती की जाएगी। आयोजकों का अनुमान है कि पूरे उत्सव के दौरान करीब 10 लाख श्रद्धालु यहां पहुंच सकते हैं।
बड़े स्तर पर होने वाले आयोजन को देखते हुए मंडल ने संभावित दुर्घटनाओं और अप्रत्याशित घटनाओं से सुरक्षा के लिए 100 से 110 करोड़ रुपये का बीमा कवर लिया है। इंश्योरेंस कंसल्टेंट निग्रेश माधवानी के अनुसार आयोजन के लिए पर्याप्त रिस्क कवर लिया गया है, ताकि किसी दुर्घटना की स्थिति में आयोजकों पर आर्थिक बोझ न पड़े।
भक्ति, युवा सहभागिता, सामाजिक सेवा और पर्यावरण संरक्षण के इस संगम के जरिए सूरत का यह गणेशोत्सव इस बार एक अलग पहचान बनाने की तैयारी में है।
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हिन्दुस्थान समाचार / यजुवेंद्र दुबे

