सूरत में दो वर्षों में 2,645 नेत्रदान, राज्य के कुल नेत्रदान में 23 प्रतिशत योगदान : पानशेरिया
सूरत, 10 सितंबर (हि.स.)। गुजरात के सूरत जिले में वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान विभिन्न संस्थाओं को कुल 2,645 नेत्रदान प्राप्त हुए। राज्य में प्राप्त कुल नेत्रदान में सूरत जिले का करीब 23 प्रतिशत योगदान है। विधानसभा में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया ने यह जानकारी दी।
पानशेरिया ने बताया कि सूरत की सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं सिविल अस्पताल में वर्ष 2024-25 में 152 और वर्ष 2025-26 में 118 नेत्रदान प्राप्त हुए। स्मिमेर अस्पताल में क्रमशः 47 और 32, दिव्य चक्षु आई बैंक में 493 और 498 तथा लोकदृष्टि ट्रस्ट में 776 और 529 नेत्रदान प्राप्त हुए। इस प्रकार इन संस्थाओं को 2024-25 में कुल 1,468 और 2025-26 में 1,177, यानी 2 वर्षों में कुल 2,645 नेत्रदान प्राप्त हुए।
मंत्री ने बताया कि पहले एक कॉर्निया का उपयोग केवल एक मरीज के प्रत्यारोपण के लिए किया जाता था। आधुनिक तकनीक और नए शोध के कारण अब कॉर्निया की अलग-अलग परतों को जरूरत के अनुसार अलग करके प्रत्यारोपित किया जा सकता है। इससे एक नेत्रदान से 3 से 4 लोगों की दृष्टिहीनता दूर करना संभव है।
मृत्यु के बाद 6 घंटे तक आंखें दान की जा सकती हैं। राज्य में नई आई बैंक शुरू करने के लिए करीब ₹40 लाख तक की सहायता तथा प्रत्येक नेत्रदान स्वीकार करने पर ₹2,000 की सहायता दी जाती है।
देश में करीब 1 से 1.5 लाख मरीजों को कॉर्निया प्रत्यारोपण की आवश्यकता है, जबकि प्रतिवर्ष केवल 55 से 60 हजार कॉर्निया उपलब्ध होते हैं। इसलिए नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना जरूरी है।
अंगदान और अंग प्रत्यारोपण की प्रक्रिया राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO) तथा राज्य अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (SOTTO) के नियमों के अनुसार पूरी तरह पारदर्शी और कंप्यूटर आधारित है। इसमें किसी प्रकार की व्यक्तिगत सिफारिश या पक्षपात की कोई व्यवस्था नहीं है।
उन्होंने बताया कि जन्मजात कॉर्निया संबंधी अंधत्व वाले बच्चों का उचित उपचार संभव है। वहीं मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की मंजूरी से कॉक्लियर इम्प्लांट करा चुके 612 बच्चों के सॉफ्टवेयर उन्नयन के लिए प्रति बच्चे ₹3 लाख का अतिरिक्त खर्च स्वीकृत किया गया है, जिससे इन बच्चों को बोलने और सुनने में सहायता मिल रही है।
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हिन्दुस्थान समाचार / यजुवेंद्र दुबे

