29 हजार में खरीदा गणपति के आकार का हीरा, आज कीमत का दावा 700 करोड़ रुपये
सूरत, 20 सितंबर (हि.स.)। हीरों के शहर सूरत में प्राकृतिक हीरों से जुड़ी कुछ ऐसी कहानियां भी हैं, जिनमें कारोबार के साथ आस्था का अनोखा मेल दिखाई देता है। सूरत के कतारगाम निवासी हीरा कारोबारी राजेश पांडव और कनुभाई आसोदरिया के पास गणपति के स्वरूप वाले दुर्लभ हीरे हैं। इनमें से एक हीरे को राजेश पांडव ने वर्ष 2005 में महज 29 हजार रुपये में खरीदा था। आज इसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 700 करोड़ रुपये होने का दावा किया जाता है।
29 हजार में खरीदा था गणपति स्वरूप वाला हीरा
वर्ष 2005 में राजेश पांडव आर्थिक संघर्ष के दौर से गुजर रहे थे और हीरा दलाली का काम कर परिवार का गुजारा करते थे। महिधरपुरा हीरा बाजार में दक्षिण अफ्रीका से आया एक कच्चे हीरों का पैकेट बिक्री के लिए आया। हीरों की जांच के दौरान उनकी नजर एक ऐसे पारदर्शी पत्थर पर पड़ी, जिसमें उन्हें गणपति का स्वरूप दिखाई दिया।
राजेश पांडव ने इसे सामान्य सफेद क्रिस्टल मानने के बजाय गणपति का स्वरूप मानकर खरीदने का फैसला किया। आर्थिक स्थिति कठिन होने के बावजूद उन्होंने रिश्तेदारों और परिचितों से पैसे उधार लेकर इसे 29 हजार रुपये में खरीद लिया। बताया जाता है कि इस हीरे की लंबाई करीब 2.44 सेंटीमीटर और वजन लगभग 27.74 कैरेट है।
परिवार ने इस हीरे को घर में श्रद्धापूर्वक स्थापित किया और इसकी पूजा शुरू कर दी। राजेश पांडव के अनुसार, इसके बाद उनके कारोबार में लगातार प्रगति हुई। आज वे केवल हीरा दलाली तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कतारगाम में अपना हीरा पॉलिशिंग और निर्माण का कारोबार संचालित करते हैं। उनके बच्चे भी उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद कारोबार में उनका साथ दे रहे हैं।
बड़े कारोबारियों के प्रस्ताव ठुकराए
राजेश पांडव का कहना है कि कई बड़े कारोबारी इस हीरे को खरीदने में रुचि दिखा चुके हैं, लेकिन उन्होंने सभी प्रस्ताव ठुकरा दिए। उनके अनुसार “गणपति के साथ हमारी आस्था जुड़ी है। इसकी कोई कीमत नहीं हो सकती।”
परिवार इस हीरे की नियमित पूजा करता है। गणेश उत्सव और विशेष धार्मिक अवसरों पर इसे सुरक्षा व्यवस्था के बीच श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए रखा जाता है।
कनुभाई आसोदरिया के ‘करम गणेशा’ की कहानी भी अनोखी
सूरत के हीरा कारोबारी कनुभाई आसोदरिया के पास भी गणपति के स्वरूप वाला एक दुर्लभ कच्चा हीरा है, जिसे उन्होंने ‘करम गणेशा’ नाम दिया है।
बताया जाता है कि वर्ष 2002 के आसपास कनुभाई बेल्जियम से कच्चे हीरों का बड़ा खेप लेकर सूरत आए थे। इसी दौरान उनके पिता ने सपने में गणेशजी के दर्शन होने की बात कही। इसके बाद जब परिवार ने हीरों को ध्यान से देखा तो एक हीरे में गणेशजी का स्पष्ट स्वरूप दिखाई दिया। तभी से परिवार इस हीरे की पूजा करता आ रहा है।
इस हीरे का वजन 182.3 कैरेट यानी करीब 36.5 ग्राम बताया गया है। उपलब्ध विवरण के अनुसार इसकी लंबाई लगभग एक इंच और चौड़ाई करीब सवा एक इंच है। तुलना के लिए, प्रसिद्ध कोहिनूर हीरा 105.6 कैरेट का बताया जाता है। हालांकि दोनों की तुलना केवल वजन के आधार पर की जा सकती है; दोनों हीरों की प्रकृति और ऐतिहासिक संदर्भ अलग हैं।
तीन दुर्लभ हीरे होने का दावा
कनुभाई आसोदरिया के पास ‘करम गणेशा’ के अलावा 26.53 कैरेट का ‘ध्यानस्थ’ हीरा और 8.03 कैरेट का ‘शुभम’ हीरा होने की जानकारी दी गई है। इन तीनों प्राकृतिक स्वरूप वाले हीरों का अंतरराष्ट्रीय बाजार मूल्य करीब 2,200 करोड़ रुपये आंका जाने का दावा किया जाता है।
‘करम गणेशा’ के संबंध में वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज होने और प्रमाणपत्र मिलने की बात भी कही गई है। हालांकि इन सभी बाजार मूल्य संबंधी दावों का वास्तविक मूल्यांकन अंतरराष्ट्रीय बाजार, प्रमाणित गुणवत्ता, दुर्लभता और खरीदार की रुचि जैसे कई कारकों पर निर्भर करता है।
गणेश चतुर्थी पर होती है विशेष पूजा
कनुभाई हर वर्ष गणेश चतुर्थी के अवसर पर अपने निवास पर ‘करम गणेशा’ की विशेष स्थापना कर परिवार के साथ पूजा-अर्चना करते हैं। वर्ष के बाकी समय करोड़ों रुपये मूल्य के बताए जाने वाले इन हीरों को सुरक्षित तिजोरी में रखा जाता है और उनकी सुरक्षा पर विशेष व्यवस्था की जाती है।
कनुभाई का कहना है कि यह हीरा केवल उनके परिवार की संपत्ति नहीं, बल्कि आस्था से जुड़ा हुआ है। उनका मानना है कि यह गणपति स्वरूप भारत के लोगों को आशीर्वाद देने के लिए उनके पास आया है।
देश की कई जानी-मानी हस्तियों तक पहुंची तस्वीर
कनुभाई आसोदरिया ने ‘डायमंड गणेश’ की तस्वीर वाली विशेष फ्रेम देश की करीब 30 जानी-मानी हस्तियों को भेजने की जानकारी दी है। इनमें अभिनेता अमिताभ बच्चन, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, बाबा रामदेव और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित अन्य प्रमुख नाम शामिल बताए जाते हैं।
इन दोनों मामलों में हीरे की प्राकृतिक आकृति, परिवार की आस्था और सूरत के हीरा कारोबार से जुड़ी कहानी ने इन्हें आम हीरों से अलग पहचान दी है।
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हिन्दुस्थान समाचार / यजुवेंद्र दुबे

