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राजनीति से अछूती रही है देशप्रिय पार्क की दुर्गा पूजा, सामाजिक भागीदारी के जरिए दशकों से होता आ रहा भव्य आयोजन

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राजनीति से अछूती रही है देशप्रिय पार्क की दुर्गा पूजा, सामाजिक भागीदारी के जरिए दशकों से होता आ रहा भव्य आयोजन


कोलकाता, 03 जुलाई (हि.स.)। पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार बनने के बाद दुर्गा पूजा समितियों को लेकर विभिन्न तरह की चर्चाओं और दावों का दौर जारी है। इसी बीच दक्षिण कोलकाता की ऐतिहासिक देशप्रिय पार्क दुर्गोत्सव समिति को लेकर भी कई तरह की अटकलें सामने आई हैं। हालांकि, समिति के इतिहास और उसके संचालन की परंपरा पर नजर डालें तो यह स्पष्ट होता है कि देशप्रिय पार्क दुर्गोत्सव समिति का किसी राजनीतिक दल या किसी राजनीतिक नेता के प्रत्यक्ष नेतृत्व से कभी संबंध नहीं रहा है।

साल 1938 में स्थापित यह पूजा समिति दक्षिण कोलकाता की सबसे पुरानी और प्रतिष्ठित सार्वजनिक दुर्गा पूजा समितियों में गिनी जाती है। पिछले लगभग 90 वर्षों से समिति का संचालन स्थानीय नागरिकों, क्लब सदस्यों और आयोजकों की भागीदारी से होता आया है। समिति की पहचान हमेशा अपनी भव्य कलात्मक प्रस्तुतियों, सामाजिक गतिविधियों और सांस्कृतिक विरासत के कारण बनी रही है, न कि किसी राजनीतिक संरक्षण के कारण।

हाल के दिनों में यह दावा किया जा रहा है कि कोलकाता नगर निगम के पूर्व मेयर परिषद सदस्य देबाशीष कुमार का समिति पर प्रभाव या नियंत्रण था। हालांकि पूजा समिति के करीब चार दशक पुराने सदस्य दीपंकर सेन के अनुसार देवाशीष कुमार देशोप्रिया पार्क क्षेत्र के स्थानीय पार्षद होने के कारण पूजा के दौरान अन्य जनप्रतिनिधियों की तरह कार्यक्रमों में आते-जाते रहे, लेकिन समिति में उन्होंने कभी अध्यक्ष, सचिव, कार्यकारी अध्यक्ष या किसी अन्य महत्वपूर्ण संगठनात्मक पद की जिम्मेदारी नहीं संभाली। समिति का प्रशासनिक संचालन स्वतंत्र रूप से उसके पदाधिकारियों और सदस्यों द्वारा किया जाता रहा है।

सेन ने बताया कि देशोप्रिया पार्क दुर्गोत्सव समिति को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान वर्ष 2015 में मिली, जब यहां 88 फीट ऊंची मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की गई। इसके बाद हजार भुजाओं वाली दुर्गा प्रतिमा, माहिष्मती महल तथा विभिन्न अंतरराष्ट्रीय स्थापत्य शैलियों पर आधारित विषयों ने इस पूजा को वैश्विक पहचान दिलाई। समिति की पहचान हमेशा उसकी कलात्मक उत्कृष्टता और नवाचार से जुड़ी रही है।

समिति कै एक और वरिष्ठ सदस्य गौतम मैत्रा ने हिन्दुस्थान समाचार से विशेष बातचीत में कहा, समिति वर्ष भर रक्तदान शिविर, स्वास्थ्य जांच, राहत कार्य, खेलकूद प्रतियोगिताएं तथा जरूरतमंद लोगों की सहायता जैसे सामाजिक कार्यक्रम भी आयोजित करती रही है। यही कारण है कि देशोप्रिया पार्क दुर्गोत्सव समिति को केवल एक पूजा आयोजन नहीं, बल्कि दक्षिण कोलकाता की सामाजिक-सांस्कृतिक धरोहर के रूप में देखा जाता है।

कोलकाता की कई प्रमुख दुर्गा पूजा समितियां समय-समय पर विभिन्न राजनीतिक नेताओं या जनप्रतिनिधियों से जुड़ी रही हैं। इनमें चेतला अग्रणी, सुरुचि संघ, उदयन संघ, श्रीभूमि स्पोर्टिंग क्लब, त्रिधारा सम्मिलनी, एकडालिया एवरग्रीन, हिंदुस्तान पार्क और भवानीपुर 75 पल्ली जैसी समितियों के साथ अलग-अलग राजनीतिक हस्तियों की सक्रिय भूमिका चर्चा का विषय रही है। इसके विपरीत, देशप्रिय पार्क दुर्गोत्सव समिति ने अपनी स्थापना से अब तक स्वयं को राजनीतिक नेतृत्व से अलग रखते हुए स्वतंत्र सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था के रूप में अपनी पहचान बनाए रखी है।

समिति से जुड़े लोगों का कहना है कि देशप्रिय पार्क दुर्गा पूजा की सबसे बड़ी खासियत उसकी गैर-राजनीतिक परंपरा, स्थानीय लोगों की भागीदारी और सांस्कृतिक विरासत रही है। यही वजह है कि बदलते राजनीतिक परिवेश के बावजूद इस पूजा की मूल पहचान आज भी उसकी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और कलात्मक विरासत से ही जुड़ी हुई है।

हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर