सीताराम की देह मेडिकल कॉलेज को दान, ग्रामीणों ने एंबुलेंस को रथ बनाकर खींचा
हमीरपुर, 06 मार्च (हि.स.)। डा. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर को देहदान दान कर स्व. सीता राम ने अनुकरणीय मिसाल पेश की है। उन्होंने जीवंतकाल में ही अपना देह को मेडिकल कालेज के लिए दान कर दिया था ताकि यह भावी एमबीबीएस प्रशिक्षुओं के प्रशिक्षण में काम आ सके। शुक्रवार को सुबह के समय उनका देहांत हो गया तथा पार्थिव देह का मेडिकल कालेज हमीरपुर पहुंचाया गया है। ग्रामीणों ने उनकी इस पहल का स्वागत करते हुए शव को लाने गए एंबुलेंस का रथ के मुताबिक खींच कर सम्मान दिया। बैंड बाजों के साथ उनकी पार्थिव देह को एंबुलेंस में डाला गया।
नादौन के कोहला गांव निवासी 79 वर्षीय सीता राम पुत्र मुंशी राम ने देहदान करके एक अनुकरणीय उदहारण प्रस्तुत किया है। शुक्रवार सुबह करीब साढ़े चार बजे उनका निधन हो गया। इसके उपरांत घर पर सारे रस्मों रिवाज पूर्ण करने के बाद परिजनों ने पार्थिव देह को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी और नम आंखों से देह को हमीरपुर मेडिकल कॉलेज रवाना किया। गौर हो कि सीता राम बीएसएनल विभाग से सेवानिवृत्त हुए थे।
सीता राम के पुत्र एवं नादौन के प्रसिद्ध उद्यमी विनोद खावला ने बताया कि उनके पिता ने करीब दो वर्ष पहले ही अपने इस निर्णय की जानकारी परिजनों को दी थी। पहले तो परिजनों ने सामाजिक रीति रिवाजों सहित धर्म एवं संस्कृति का हवाला देकर उनसे इस निर्णय पर दोबारा विचार करने का आग्रह किया परंतु सीता राम की समाज के प्रति समर्पण की इस भावना के आगे पूरा परिवार नतमस्तक हो गया।
मेडिकल कालेज के एनाटोमी विभाग के चिकित्सक डा. हरविंदर ने इस देहदान के लिए मृतक के परिजनों का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने बताया कि यह बॉडी एमबीबीएस प्रथम वर्ष के प्रशिक्षुओं के अध्ययन में काम आएगी। उन्होंने कहा कि देहदान महादान है तथा एमबीबीएस प्रशिक्षु इसके माध्यम से अपनी डॉक्टरी की पढ़ाई करते हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / विशाल राणा

