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सूरत में गोबर से तैयार हो रहीं पर्यावरण अनुकूल गणेश प्रतिमाएं

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सूरत में गोबर से तैयार हो रहीं पर्यावरण अनुकूल गणेश प्रतिमाएं


सूरत में गोबर से तैयार हो रहीं पर्यावरण अनुकूल गणेश प्रतिमाएं


सूरत, 11 सितंबर (हि.स.)। गणेशोत्सव से पहले पर्यावरण अनुकूल प्रतिमाओं को बढ़ावा देने की पहल के तहत कामरेज के वाव-जोखा रोड स्थित सुंदरम गौ विज्ञान केंद्र ने गाय के गोबर से गणेश प्रतिमाएं तैयार की हैं। केंद्र के अनुसार इन प्रतिमाओं को प्राकृतिक गोंद और पानी आधारित पर्यावरण अनुकूल रंगों की मदद से तैयार किया गया है।

सुंदरम गौ विज्ञान केंद्र के अश्विन बलदाणिया और उनकी टीम पिछले करीब 5 वर्षों से 50 गायों की देखभाल कर गोमूत्र और गोबर से विभिन्न उपयोगी वस्तुएं तैयार कर रही है। इस वर्ष गणेश चतुर्थी के अवसर पर विशेष रूप से गोबर से गणेश प्रतिमाएं बनाई गई हैं।

प्रतिमा बनाने के लिए गाय के गोबर को बारीक पाउडर में बदलकर उसमें प्राकृतिक गोंद मिलाया जाता है। इसके बाद इसे सांचे में ढालकर आकर्षक प्रतिमाएं तैयार की जाती हैं। प्रतिमाओं को सजाने के लिए केवल पानी आधारित और पर्यावरण अनुकूल रंगों का उपयोग किया जाता है, ताकि किसी भी हानिकारक रसायन के पर्यावरण में मिलने की आशंका न रहे।

इन प्रतिमाओं को सामान्य पर्यावरण अनुकूल प्रतिमाओं की तुलना में ‘सुपर इको-फ्रेंडली’ बताया गया है। केंद्र के अनुसार, मिट्टी की प्रतिमा के लिए मिट्टी का खनन करना पड़ता है, जबकि गोबर प्राकृतिक रूप से उपलब्ध जैविक पदार्थ है।

इन गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन भी पर्यावरण के अनुकूल किया जा सकता है। घर में गमले या पेड़ की जड़ के पास विसर्जित करने पर प्रतिमा घुलकर जैविक खाद में बदल जाती है, जो पौधों के लिए उपयोगी होती है। वहीं, नदी या तालाब में विसर्जन करने पर गोबर प्राकृतिक रूप से विघटित होकर जलीय जीवों के लिए पोषक तत्व उपलब्ध करा सकता है।

सुंदरम गौ विज्ञान केंद्र ने 3 इंच से लेकर ढाई फीट तक की विभिन्न आकार की गणेश प्रतिमाएं तैयार की हैं। अधिक से अधिक लोग इस पर्यावरण संरक्षण अभियान से जुड़ सकें, इसके लिए प्रतिमाओं की कीमत ₹50 से ₹1,800 तक रखी गई है।

गणेशोत्सव के पवित्र पर्व पर पूजा-अर्चना के साथ प्रकृति की रक्षा और जीव-जगत को नुकसान से बचाने की यह पहल समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बन रही है।

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हिन्दुस्थान समाचार / यजुवेंद्र दुबे