छत्तीसगढ़ में पीएम सूर्य घर-मुफ्त बिजली योजना के तहत 95 हजार घरों की छतों पर सोलर पैनल, कार्बन उत्सर्जन में कमी
रायपुर, 08 सितंबर (हि.स.)। देश में ऊर्जा के भंडार के रूप में प्रसिद्धि हासिल करने वाले छत्तीसगढ़ में अगले वर्ष मार्च तक पांच लाख घरों को सौर ऊर्जा से जोड़ कर महत्वांकाक्षी योजना पर तेजी से काम चल रहा है। अब तक राज्य में 95 हजार से अधिक घर इसका लाभ उठा रहे हैं। सौर ऊर्जा के विस्तार और विशेष रूप से राजनांदगांव के नए सोलर पार्क की मदद से प्रदेश में सालाना लगभग 4.5 लाख मीट्रिक टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आ रही है। इससे पर्यावरण में सुधार हो रहा है।
छत्तीसगढ़ में वर्तमान में प्रदेश में करीब 30 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। राज्य की अपनी मांग पूरी होने के बाद, जो हजारों मेगावाट अतिरिक्त बिजली बचती है(जिसमें 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा थर्मल पावर का होता है) उसे नेशनल ग्रिड के माध्यम से देश के अन्य राज्यों जैसे महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात आदि को निर्यात कर दिया जाता है।
छत्तीसगढ़ में बड़े सोलर पार्क, पीएम-कुसुम योजना (कृषि पंप), पीएम सूर्य घर मुफ़्त बिजली योजना (छत पर सोलर) तथा क्रेडा द्वारा स्थापित रूफटॉप सोलर को मिलाकर कुल सौर ऊर्जा क्षमता 2,050 मेगावाट के स्तर पर पहुँच चुकी है। दिन के समय सौर ऊर्जा सीधे ग्रिड में आपूर्ति देकर तापीय विद्युत (थर्मल जेनरेशन) का स्थान लेती है। छत्तीसगढ़ में 01 मेगावाट सौर संयंत्र औसतन 19-20 फ़ीसदी कैपेसिटी यूटिलाइजेशन फैक्टर के साथ प्रतिवर्ष लगभग 15 लाख यूनिट बिजली बनाता है। औसत 0.65 किग्रा प्रति यूनिट कोयला खपत के आधार पर वर्तमान सौर क्षमता से प्रतिवर्ष लगभग 20 लाख टन कोयले की खपत कम हो रही है। अर्थात प्रतिदिन लगभग 5,400 टन कोयले की बचत हो रही है ।
छत्तीसगढ़ को भारत का 'पावर हब' (ऊर्जा केंद्र) कहा जाता है। 2025–26 तक राज्य की कुल संस्थापित बिजली उत्पादन क्षमता लगभग 30,672 मेगावाट है। कोयला (तापीय विद्युत) अब भी पूरी तरह से प्रमुख स्रोत है, जिसकी संस्थापित क्षमता लगभग 28,824 मेगावाट है, जो कुल क्षमता का 94 फ़ीसदी है। कोयला क्षेत्रों से नजदीकी होने के कारण राज्य बिजली-अधिशेष राज्य है। सौर ऊर्जा नवीकरणीय ऊर्जा में अग्रणी स्रोत है, जिसकी संस्थापित क्षमता लगभग 1,672 मेगावाट तक पहुँच गई है। इसमें जलविद्युत-220 मेगावाट, बायोमास-1,327 मेगावाट और लघु जलविद्युत परियोजनाएँ-240 मेगावाट शामिल हैं।
भारतीय केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024–25 में छत्तीसगढ़ के तापीय विद्युत संयंत्रों ने 1,205.04 लाख मीट्रिक टन कोयले की खपत की, जो लगभग 12.05 करोड़ (120.5 मिलियन) मीट्रिक टन कोयले के बराबर है। सौर ऊर्जा कई स्तरों पर कोयले पर निर्भरता घटा रही है। भिलाई इस्पात संयंत्र में 15 मेगावाट की तैरती सौर परियोजना सालाना 3.425 करोड़ यूनिट बिजली पैदा करती है। इससे प्रति वर्ष लगभग 23,000 टन कोयले की बचत होती है। परसा ईस्ट और कांता बसन (पीईकेबी) कोयला खदान छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में स्थित है। यह राज्य की पहली ऐसी कोयला खदान है जो पूरी तरह से सौर ऊर्जा से चलती है।
अन्य परियोजनाओं में अटल बिहारी वाजपेयी विद्युत संयंत्र के जलाशय पर 6 मेगा वाट की फ्लोटिंग सौर परियोजना और कोरबा में 32 मेगा वाट की परियोजना शामिल हैं। जब राज्य का गठन 2000 में हुआ था, तब 99 प्रतिशत बिजली कोयले से आती थी। आज सौर ऊर्जा कुल संस्थापित क्षमता का 5 फ़ीसदी हिस्सा बन चुकी है।
राज्य सरकार 2030 तक अपनी कुल बिजली खपत का 43.3 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा से पूरा करने की योजना बना रही है। भारतीय केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के अनुमानों के अनुसार 2035–36 तक राज्य की सौर क्षमता 6,468 मेगावाट तक पहुँचने की उम्मीद है। भौगोलिक दृष्टि से उपयुक्त होने के कारण छत्तीसगढ़ में सौर ऊर्जा उत्पादन की अनुमानित क्षमता लगभग 18,000 मेगावाट आंकी गई है। वर्तमान में राज्य की कुल नवीकरणीय ऊर्जा (सौर, पवन और बायोमास सहित) स्थापित क्षमता 3,000 मेगावाट से अधिक हो चुकी है, जो राज्य के कुल ऊर्जा मिश्रण का लगभग 25 फीसदी है। अब तक राज्य की संचयी सौर ऊर्जा क्षमता 2,519 मेगावाट से अधिक हो चुकी है।
हाल ही में छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य को ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिए 3.50 लाख करोड़ रुपये के एमओयू किए हैं। इसका उद्देश्य आने वाले समय में 30,000 मेगावाट अतिरिक्त बिजली उत्पादन क्षमता विकसित करना है, जिसमें सौर ऊर्जा की भागीदारी सबसे अहम होगी।
प्रदेश में करीब 30 हजार मेगावाट बिजली का हो रहा उत्पादन छत्तीसगढ़ में वर्तमान में प्रदेश में करीब 30 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। राज्य विशेष रूप से 4,000 मेगावाट 'ग्रीन एनर्जी' उत्पादन का लक्ष्य लेकर चल रहा है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा सौर ऊर्जा का होगा। कोल इंडिया की सहायक कंपनी एसईसीएल ने वर्ष 2028-29 तक अपनी सौर ऊर्जा क्षमता को बढ़ाकर 700 मेगावाट करने का लक्ष्य रखा है। एसईसीएल ने भटगांव (20 मेगावाट), शिवनंदनपुर (12 मेगावाट) और गोरखनाथपुर (8 मेगावाट) में सफलतापूर्वक सोलर प्लांट स्थापित कर लिए हैं, जिनसे बिजली उत्पादन शुरू हो चुका है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के अनुसार छत्तीसगढ़ में राज्य क्षेत्र केंद्रीय क्षेत्र और निजी क्षेत्र (आईपीपी जैसे जिंदल, अडानी, डीबी पावर आदि) को मिलाकर कुल तापीय विद्युत क्षमता लगभग 28,800 मेगावाट से 30,000 मेगावाट है। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी की अपनी उत्पादन क्षमता लगभग 2,978.70 मेगावाट है (जिसमें 2,840 मेगावाट थर्मल शामिल है)। इसके अतिरिक्त, एनटीपीसी और विभिन्न निजी कंपनियों (जैसे अडानी, जिंदल, लैंको) के ताप विद्युत संयंत्रों को मिलाकर राज्य की कुल स्थापित क्षमता 20,000 मेगावाट से अधिक है। भारत के कुल कोयला भंडार का 16-17 फीसदी हिस्सा अकेले छत्तीसगढ़ में मौजूद है। कोरबा जिले में स्थित विशाल ऊर्जा संयंत्रों और कोयला खदानों के कारण इसे भारत की पावर कैपिटल का दर्जा प्राप्त है।
महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात आदि को बिजली निर्यात करता छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ अपनी आवश्यकता से अधिक बिजली का उत्पादन करता है। प्रदेश में बिजली की अधिकतम मांग आमतौर पर 7,000 से 7,661 मेगावाट के बीच रहती है। हाल ही के आंकड़ों (जून 2026) के अनुसार, गर्मियों में राज्य की पीक डिमांड लगभग 7,080 मेगावाट दर्ज की गई थी। जुलाई 2026 के आंकड़ों के अनुसार पूरे राज्य की मासिक ऊर्जा मांग लगभग 3,653 गीगावाट-घंटे रही है। राज्य में सबसे ज्यादा बिजली की खपत औद्योगिक क्षेत्रों में लगभग 55 फीसदी में होती है, इसके बाद घरेलू (24फीसदी ) और कृषि (14प्रतिशत ) क्षेत्रों का स्थान आता है। राज्य की अपनी कुल खपत (करीब 7,600 मेगावाट) इस विशाल स्थापित क्षमता का केवल एक-चौथाई हिस्सा ही है। राज्य की अपनी मांग पूरी होने के बाद, जो हजारों मेगावाट अतिरिक्त बिजली बचती है(जिसमें 90प्रतिशत से अधिक हिस्सा थर्मल पावर का होता है) उसे नेशनल ग्रिड के माध्यम से देश के अन्य राज्यों जैसे महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात आदि को निर्यात कर दिया जाता है।
रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने बताया है कि छत्तीसगढ़ में सिंचाई के क्षेत्र में भी सौर ऊर्जा का व्यापक इस्तेमाल हो रहा है और करीब ढाई लाख सिंचाई पंप सौर ऊर्जा से ऊर्जीकृत किए जा चुके हैं। किसानों के लिए 1,70,689 सोलर सिंचाई पंप और ग्रामीण क्षेत्रों में जल सुविधा के लिए 29,451 सोलर पेयजल पंप स्थापित किए जा चुके हैं।
प्रधानमंत्री सूर्य घर-मुफ्त बिजली योजना के तहत उपभोक्ताओं को हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली की सुविधा मिल रही है। केंद्र सरकार की सब्सिडी के अलावा छत्तीसगढ़ में अतिरिक्त सहायता भी दी जा रही है, जिससे हितग्राहियों को कुल मिलाकर भारी आर्थिक राहत मिल रही है।
शासन के अनुसार छत्तीसगढ़ का राजनांदगांव जिला देश भर में सबसे अधिक क्षमता के सोलर कनेक्शन लगाने वाले अग्रणी जिलों में शामिल हो गया है। इस जिले में सबसे अधिक क्षमता का मुख्य सोलर कनेक्शन डोंगरगढ़ रोड पर स्थित ग्राम ढाबा में स्थापित 100 मेगावाट (एसी) क्षमता का सोलर और बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम पावर प्लांट है, जिसके साथ 40 मेगावाट/120 मेगावाट-घंटे का बैटरी स्टोरेज सिस्टम भी जुड़ा हुआ है। यह देश में अपनी तरह का एक बड़ा और अग्रणी ऑन-ग्रिड सोलर प्रोजेक्ट है, जिसे भारतीय सौर ऊर्जा निगम द्वारा स्थापित किया गया है। इस प्लांट से हर दिन लगभग 5 लाख यूनिट से अधिक बिजली का उत्पादन होता है और यह बैटरी के जरिए रात में भी बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करता है।
इससे उत्पादित होने वाली बिजली छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड को दी जाती है और बैटरी बैकअप के जरिए गैर-सौर पीक घंटों (रात के समय) में भी गांवों व ग्रिड को बिजली मिलती है। यहाँ 3,255 से अधिक घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने का काम पूरा हो चुका है, जिसकी कुल क्षमता लगभग 9 मेगावाट है। इसके अलावा यहाँ 162 व्यावसायिक कनेक्शन भी सक्रिय हैं।
धमतरी रोल मॉडल बनकर उभरा है। यहाँ अब तक 4,000 से अधिक उपभोक्ताओं ने योजना के तहत सफलतापूर्वक सोलर पैनल लगवाए हैं। बस्तर, दंतेवाड़ा और कांकेर जैसे जनजातीय क्षेत्रों में ऑफ-ग्रिड और ऑन-ग्रिड दोनों तरह के सोलर प्रोजेक्ट्स पर काम हो रहा है। दंतेवाड़ा जिला प्रशासन के अनुसार विशेष कैंप लगाकर 78,000 रुपये तक की केंद्रीय सब्सिडी का लाभ देकर सैकड़ों घरों को कवर किया जा चुका है।
छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी द्वारा जारी किए गए हालिया दिशा-निर्देशों और प्रगति रिपोर्टों के आधार पर ऊर्जा नगरी कोरबा में कई घरों में 3 किलोवाट से लेकर 6 किलोवाट तक के पैनल सफलतापूर्वक काम कर रहे हैं, जिससे उपभोक्ताओं का बिजली बिल शून्य हो चुका है। विभाग के अनुसार सरगुजा जिले में शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों को मिलाकर कुल 2,000 सोलर संयंत्र स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके विरुद्ध अब तक 1,733 घरों में रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। इनमें शहरी क्षेत्र के 1,360 तथा ग्रामीण क्षेत्र के 373 संयंत्र शामिल हैं।
छत्तीसगढ़ में उत्पन्न सौर ऊर्जा का मुख्य उपयोग राज्य के भीतर ही कृषि कार्यों (जैसे 'सौर सुजला योजना' के तहत सिंचाई पंप), जल जीवन मिशन, घरेलू रूफटॉप, और राज्य के अपने रिन्यूएबल परचेस ऑब्लिगेशन (नवीकरणीय ऊर्जा खरीद दायित्व) को पूरा करने में किया जाता है। राज्य सरकार सीधे तौर पर अन्य राज्यों को सौर ऊर्जा का निर्यात नहीं करती है, लेकिन राज्य में स्थापित कुछ निजी क्षेत्र की नवीकरणीय ऊर्जा कंपनियां 'ओपन एक्सेस' नियमों के तहत अपनी सौर परियोजनाओं से उत्पन्न बिजली को अन्य राज्यों के उद्योगों या कॉर्पोरेट ग्राहकों को बेच सकती हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / केशव केदारनाथ शर्मा

