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विदेशी सैलानियों की पहली पसंद बन रहा छत्तीसगढ़, प्रकृति, संस्कृति और विकास की नई उड़ान

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विदेशी सैलानियों की पहली पसंद बन रहा छत्तीसगढ़, प्रकृति, संस्कृति और विकास की नई उड़ान


रायपुर 21 मई (हि.स.)। छत्तीसगढ़ अब धीरे-धीरे भारत के उन राज्यों में शामिल होता जा रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर अपनी अलग पहचान बना रहे हैं। कभी केवल खनिज संपदा और वनों के लिए पहचाने जाने वाला यह राज्य आज अपनी प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति, शांत वातावरण और आधुनिक पर्यटन सुविधाओं के कारण विदेशी पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है।

वर्ष 2025 में 820 विदेशी पर्यटकों का राज्य आगमन इस बदलाव का बड़ा संकेत माना जा रहा है। यह संख्या भले ही बड़े पर्यटन राज्यों की तुलना में कम हो, लेकिन छत्तीसगढ़ जैसे अपेक्षाकृत नए पर्यटन गंतव्य के लिए यह उपलब्धि महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

प्रकृति और संस्कृति का अनोखा संगम

छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी विशेषता इसकी अनछुई प्राकृतिक सुंदरता और जीवंत जनजातीय संस्कृति है। यहां के घने जंगल, पहाड़ियां, झरने और शांत घाटियां पर्यटकों को प्राकृतिक सुकून का अनुभव कराती हैं।

चित्रकोट जलप्रपात को भारत का “नियाग्रा फॉल” कहा जाता है। बारिश के मौसम में इसकी विशाल जलधारा विदेशी पर्यटकों को बेहद आकर्षित करती है। वहीं तीरथगढ़ जलप्रपात अपनी बहुस्तरीय जलधाराओं और हरियाली के कारण प्रकृति प्रेमियों की पहली पसंद बनता जा रहा है। कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान जैव विविधता और गुफाओं के लिए प्रसिद्ध है। यहां मिलने वाले दुर्लभ वन्यजीव, घने वन और प्राकृतिक गुफाएं विदेशी सैलानियों को रोमांचक अनुभव प्रदान करती हैं।

बस्तर : अंतरराष्ट्रीय पर्यटन का नया चेहरा

बस्तर क्षेत्र आज राज्य के पर्यटन विकास का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभर रहा है। यहां की जनजातीय संस्कृति, हस्तशिल्प, पारंपरिक जीवनशैली और लोककला दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित कर रही है। विशेष रूप से बस्तर दशहरा विदेशी पर्यटकों के लिए अद्भुत सांस्कृतिक अनुभव बन चुका है। यह दशहरा देश के अन्य हिस्सों से बिल्कुल अलग है और लगभग 75 दिनों तक चलने वाली अपनी अनूठी परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है।

राज्य सरकार चित्रकोट क्षेत्र में लक्जरी टेंट सिटी और “चित्रकोट स्वदेशी प्रकृति विश्राम केन्द्र” जैसी परियोजनाओं पर काम कर रही है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य बस्तर को विश्वस्तरीय ईको-टूरिज्म और सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करना है।

छत्तीसगढ़ सरकार की विशेष पहल

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ को वैश्विक पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने के लिए राज्य सरकार निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति, ऐतिहासिक विरासत और आत्मीयता दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित करने की अद्भुत क्षमता रखती है। उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार पर्यटन स्थलों में आधुनिक सुविधाओं का विस्तार, बेहतर संपर्क मार्ग, सुरक्षित वातावरण, प्रकृति पर्यटन और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। बस्तर, सरगुजा, मैनपाट और जशपुर जैसे क्षेत्रों को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के लिए विशेष योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है।

अग्रवाल ने कहा कि पर्यटन केवल राज्य की पहचान को ही मजबूत नहीं करता, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित करता है। आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ विदेशी पर्यटकों के लिए भारत का एक नया और आकर्षक पर्यटन केन्द्र बनकर उभरेगा। राज्य सरकार तथा छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल द्वारा पर्यटन क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का विकास, बेहतर सड़क संपर्क, पर्यटक सुरक्षा, डिजिटल प्रचार-प्रसार और पर्यटन अधोसंरचना के विस्तार से छत्तीसगढ़ अब राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय पर्यटन जगत में भी अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा रहा है।

जशपुर भी बन रहा आकर्षण का केंद्र

मैनपाट को “छत्तीसगढ़ का शिमला” कहा जाता है। यहां का शांत वातावरण, ठंडी जलवायु और तिब्बती संस्कृति पर्यटकों को आकर्षित करती है। वहीं जशपुर अपनी हरित घाटियों, पर्वतीय क्षेत्रों और जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध हो रहा है। यहां प्रकृति पर्यटन और एडवेंचर टूरिज्म की अपार संभावनाएं विकसित की जा रही हैं।

सरगुजा के मैनपाट में है ‘उल्टा पानी’ जगह

छत्तीसगढ़ का सरगुजा जिले के मैनपाट घूमने के लिए सबसे सुंदर स्थानों में से एक है। मैनपाट को ‘छत्तीसगढ़ का शिमला’ भी कहा जाता है। यहां का मौसम बहुत ही सुहाना रहता है। इसके कारण यहां पूरे वर्ष लोग घूमने के लिए आते हैं. मैनपाट में बहुत जगह देखने के लिए प्रसिद्ध है, जिसमें टाइगर प्वाइंट, मेहता प्वाइंट, दलदली, फिश प्वाइंट जैसे कई जगह हैं। मैनपाट के बिसरपानी गांव में ‘उल्टा पानी’ नाम की भी एक जगह है।

‘उल्टा पानी‘ नाम से ही पता चल रहा है कि यहां उल्टा पानी बहता है। मतलब की ढलान के विपरीत पानी नीचे से ऊपर की ओर बह रहा है। यह जगह गुरुत्वाकर्षण के नियम को भी फेल कर देती है. यहां एक छोटा-सा पत्थर पानी के नीचे से निकल रहा है, जहां नीचे ढलान की ओर बहने के बजाय एक विपरीत ऊपर की ओर ओर बहती है। इस कारण इस जगह का नाम ‘उल्टा पानी’ पड़ गया। यहां पानी क्यों उल्टा बह रहा है वैज्ञानिकों के लिए रहस्य बना हुआ है।

बेहतर सुरक्षा से बढ़ा पर्यटकों का भरोसा

कुछ वर्षों पहले तक बस्तर क्षेत्र नक्सलवाद के कारण पर्यटन के लिए चुनौतीपूर्ण माना जाता था। लेकिन अब सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने, सड़कों के विकास और प्रशासनिक प्रयासों के कारण माहौल काफी बदला है। पर्यटक अब बस्तर और अन्य क्षेत्रों में पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। यही कारण है कि देशी और विदेशी दोनों प्रकार के पर्यटकों की संख्या बढ़ने लगी है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रही छत्तीसगढ़ की पहचान

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र की मार्गदर्शक एवं हिवा प्रशिक्षण और परामर्श संस्था की संस्थापक किर्सी ह्यवारिनेन की बस्तर की छह दिवसीय यात्रा ने छत्तीसगढ़ पर्यटन को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाई है। उन्होंने बस्तर की जनजातीय संस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य और स्थानीय समुदायों की जीवनशैली की सराहना करते हुए इसे विश्व के लिए एक अनूठा पर्यटन अनुभव बताया। ऐसी अंतरराष्ट्रीय यात्राएं छत्तीसगढ़ की वैश्विक पहचान को मजबूत कर रही हैं और भविष्य में अधिक विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने में मददगार साबित हो सकती हैं।

नई पहचान की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़

आज छत्तीसगढ़ केवल एक राज्य नहीं, बल्कि प्रकृति, संस्कृति और आत्मीयता से भरा एक ऐसा अनुभव बनता जा रहा है, जिसे दुनिया करीब से महसूस करना चाहती है। यदि सरकार की योजनाएं इसी गति से आगे बढ़ती रहीं, तो आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ भारत के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थलों में शामिल हो सकता है। यह बदलाव न केवल राज्य की पहचान मजबूत करेगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के नए अवसरों को भी गति देगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / गेवेन्द्र प्रसाद पटेल