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ब्रिगेड परेड ग्राउंड : राजनीतिक उत्थान-पतन का साक्षी रहा है यह ऐतिहासिक मैदान

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ब्रिगेड परेड ग्राउंड : राजनीतिक उत्थान-पतन का साक्षी रहा है यह ऐतिहासिक मैदान


कोलकाता, 09 मई (हि.स.)।

कोलकाता के बहुचर्चित ब्रिगेड परेड ग्राउंड में पश्चिम बंगाल की नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित होने जा रहा है। यह अपने आप में ऐतिहासिक अवसर माना जा रहा है। महानगर के मध्य में स्थित यह विशाल मैदान कोलकाता के “हृदय” के रूप में भी जाना जाता है। शहर के बीचों-बीच फैला यह हरा-भरा खुला इलाका महानगर के पर्यावरण संतुलन और जनजीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि “खुली हवा में सांस लेनी हो तो ब्रिगेड चलो।” हर सुबह यहां हजारों लोग मॉर्निंग वॉक के लिए पहुंचते हैं। इनमें बड़ी संख्या युवाओं और बच्चों की होती है, जो क्रिकेट और फुटबॉल का अभ्यास करने आते हैं। यहां फुटबॉल खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों की भी नियमित मौजूदगी रहती है।

इतिहासकारों के अनुसार 18वीं शताब्दी में पलासी युद्ध के बाद अंग्रेजों ने इस इलाके को विकसित करना शुरू किया था। बताया जाता है कि कभी यहां घने जंगल हुआ करते थे, जिन्हें अंग्रेजों ने काटकर साफ किया। सेना के पूर्वी कमान मुख्यालय, रेस कोर्स और विक्टोरिया मेमोरियल के बीच स्थित यह मैदान करीब 900 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। इसे दुनिया के सबसे बड़े शहरी पार्कों में भी गिना जाता है।

जवाहरलाल नेहरू रोड, खिदिरपुर रोड, डफरिन रोड और हॉस्पिटल रोड से घिरे इस मैदान के चारों ओर बड़ी संख्या में पुराने और विशाल पेड़ मौजूद हैं। यही कारण है कि यह इलाका मॉर्निंग वॉक, खेलकूद और खुले वातावरण में समय बिताने वालों की पहली पसंद बना हुआ है।

उल्लेखनीय है कि इस विशाल मैदान का प्रबंधन भारतीय सेना के हाथ में है। ब्रिगेड परेड ग्राउंड पश्चिम बंगाल की राजनीति का सबसे बड़ा मंच माना जाता है। यहां कांग्रेस, वाम मोर्चा, तृणमूल कांग्रेस और भाजपा सहित सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपनी विशाल रैलियां आयोजित करते रहे हैं। विशेषकर वाम मोर्चा के शासनकाल के दौरान यहां सबसे अधिक राजनीतिक सभाएं हुईं।

राजनीतिक दलों के लिए ब्रिगेड में रैली करना शक्ति प्रदर्शन का प्रतीक माना जाता है। यहां होने वाली हर सभा के बाद सबसे अधिक चर्चा भीड़ की संख्या को लेकर होती है। आमतौर पर कोई भी दल यहां जुटी भीड़ को पांच लाख से कम नहीं बताता। कई बार आयोजक सात लाख से अधिक लोगों के पहुंचने का दावा भी करते रहे हैं। कोलकाता से लेकर दिल्ली तक के दिग्गज नेताओं की मौजूदगी इन सभाओं को और खास बना देती है। यही कारण है कि इस मैदान को भारतीय राजनीति का “मक्का” भी कहा जाता है।

स्मरणीय है कि वर्ष 2011 में सत्ता परिवर्तन से पहले ममता बनर्जी ने भी इसी मैदान में विशाल रैली कर तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार के खिलाफ राजनीतिक माहौल बनाया था। उसके कुछ समय बाद ही राज्य में 34 वर्षों का वाम शासन समाप्त हुआ और तृणमूल कांग्रेस सत्ता में आई। अब एक बार फिर ब्रिगेड मैदान नए राजनीतिक परिवर्तन का गवाह बनने जा रहा है।

खेल जगत में भी ब्रिगेड मैदान का विशेष महत्व रहा है। माना जाता है कि भारत में सबसे पहले क्रिकेट इसी मैदान पर खेला गया था। यहां ईस्ट इंडिया कंपनी और कोलकाता के खिलाड़ियों के बीच दो दिवसीय मैच आयोजित हुआ था, जिसमें कोलकाता की टीम 152 रनों से हार गई थी।

आज इसी ब्रिगेड परेड ग्राउंड के पास देश के सबसे प्रतिष्ठित क्रिकेट स्टेडियमों में से एक ईडन गार्डन्स स्थित है। इसके अलावा मोहन बागान सुपर जायंट, ईस्ट बंगाल एफसी और कई अन्य प्रतिष्ठित खेल क्लब भी इस इलाके की पहचान को और गौरवशाली बनाते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष विश्वकर्मा