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बिहार : गयाजी में 25 सितंबर से शुरू होगा पितृपक्ष मेला, 70 हजार श्रद्धालुओं के आवासन की तैयारी

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बिहार : गयाजी में 25 सितंबर से शुरू होगा पितृपक्ष मेला, 70 हजार श्रद्धालुओं के आवासन की तैयारी


बिहार : गयाजी में 25 सितंबर से शुरू होगा पितृपक्ष मेला, 70 हजार श्रद्धालुओं के आवासन की तैयारी


पटना, 12 सितंबर (हि.स.)। मोक्ष की भूमि गयाजी में विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला 25 सितंबर से शुरू होगा। 10 अक्टूबर तक चलने वाले इस मेले में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करेंगे। सामान्य श्रद्धालुओं के लिए पितृपक्ष मेला 16 दिनों का होगा, जबकि त्रैपाक्षिक श्राद्ध करने वाले श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक अनुष्ठान 11 अक्टूबर तक जारी रहेगा। मेले को लेकर जिला प्रशासन करीब 70 हजार लोगों के ठहरने की क्षमता विकसित कर रहा है।

पितृपक्ष मेले में श्रद्धालु अपनी सुविधा और धार्मिक परंपरा के अनुसार एक, तीन, पांच, सात या नौ दिनों तक गयाजी में रहकर पिंडदान करते हैं। गयापाल पंडा एवं विष्णुपद प्रबंधकारिणी समिति के सदस्य मणिलाल बारिक के अनुसार, इस बार 25 सितंबर से पिंडदान और श्राद्ध का सिलसिला शुरू होगा। अलग-अलग तिथियों पर गयाजी के विभिन्न पिंडवेदी स्थलों पर निर्धारित कर्मकांड संपन्न होंगे।

मेले की तैयारियों को लेकर प्रशासन ने आवासन, स्वच्छता, पेयजल, स्वास्थ्य, परिवहन और सुरक्षा पर विशेष जोर दिया है। पर्यटन विभाग की ओर से भी श्रद्धालुओं के लिए 2,500 बेड की क्षमता वाली टेंट सिटी, अस्थायी पर्यटक सूचना केंद्र और हेल्पलाइन की व्यवस्था की जा रही है।

अलग-अलग तिथियों पर निर्धारित हैं पिंडदान के कर्मकांड

25 सितंबर को अनन्त चतुर्दशी के दिन पुनपुन में पिंडदान और गयापाल तीर्थपुरोहित की पांव पूजा का विधान है। 26 सितंबर को फल्गु स्नान, श्राद्ध और पांव पूजा होगी। 27 सितंबर को ब्रह्मकुंड में जौ के चूर्ण से पिंडदान के साथ प्रेतशिला, रामशिला और रामकुंड में श्राद्ध तथा काकबली में पिंडदान किया जाएगा।

28 सितंबर को पंचतीर्थ श्राद्ध के तहत उत्तरमानस, उदीची, कनखल, दक्षिणमानस और जिह्वालोल में कर्मकांड होगा। 29 सितंबर को सरस्वती स्नान, पंचरत्न दान, मातंगवापी और धर्मारण्य कूप में श्राद्ध तथा बोधगया में बोधितरू दर्शन का विधान है। 30 सितंबर को ब्रह्मसरोवर और काकबली श्राद्ध के साथ आम्रसिंचन में पिंडदान किया जाएगा।

1 अक्टूबर को रुद्रपद, ब्रह्मपद और विष्णुपद में श्राद्ध होगा। इस दिन खीर और मावा के पिंड से पिंडदान तथा गयापाल तीर्थपुरोहित की पांव पूजा होगी। 2 अक्टूबर को कार्तिकपद, दक्षिणाग्निपद और गार्हपत्याग्निपद श्राद्ध तथा 3 अक्टूबर को सूर्यपद, चंद्रपद, गणेशपद, संध्याग्निपद, आवसंध्यग्निपद और दधीचीपद में श्राद्ध किया जाएगा।

4 अक्टूबर को अष्टमी और नवमी के अवसर पर कण्वपद, मातंगपद, क्रौंचपद, अगस्त्यपद, इन्द्रपद, कश्यपपद और गजकर्णपद में श्राद्ध होगा। सीताकुंड में बालू से पिंडदान, रामगया श्राद्ध, दूध तर्पण और अन्नदान का भी विधान है।

5 अक्टूबर को गयासिर और गयाकूप में त्रिपिंडी श्राद्ध किया जाएगा, जिसे पितृदोष और प्रेतदोष निवारण से जुड़ा कर्मकांड माना जाता है। 6 अक्टूबर को मुण्डपृष्ठा, आदि गदाधर और धौतपद में श्राद्ध होगा। 7 अक्टूबर को भीमगया, गौप्रचार और गदालोल श्राद्ध, जबकि 8 अक्टूबर को भगवान विष्णु का पंचामृत स्नान-पूजन और फल्गु में दुग्ध तर्पण किया जाएगा।

9 अक्टूबर को वैतरणी सरोवर पर गोदान और तर्पण तथा 10 अक्टूबर को अमावस्या के दिन अक्षयवट में श्राद्ध, खीर से पिंडदान, सुफल और पितृ विसर्जन का विधान है। त्रैपाक्षिक श्राद्ध करने वालों के लिए 11 अक्टूबर को गायत्री घाट पर दही-चावल से पिंडदान, आचार्य को दक्षिणा और पितृ विदाई का कर्मकांड होगा।

70 हजार लोगों के आवासन की तैयारी

श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन करीब 70 हजार लोगों के ठहरने की व्यवस्था कर रहा है। गांधी मैदान में 2,500 बेड की टेंट सिटी तैयार की जा रही है। इसके अलावा श्रद्धालुओं के लिए सस्ता भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। जीविका दीदियों की रसोई के माध्यम से 25 रुपये में भरपेट भोजन उपलब्ध कराने की योजना है।

पर्यटन विभाग की ओर से भी श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अस्थायी पर्यटक सूचना केंद्र, विशेष हेल्पलाइन, प्रशिक्षित गाइड और ई-रिक्शा की व्यवस्था की जा रही है। फल्गु नदी के तट पर महाआरती का आयोजन भी प्रस्तावित है। ई-पिंडदान और यात्रा पैकेज की सुविधा भी उपलब्ध कराने की तैयारी है।

पांच जोन और 54 सेक्टर में बांटा गया मेला क्षेत्र

स्वच्छता व्यवस्था के लिए नगर क्षेत्र को पांच जोन और 54 सेक्टर में बांटा गया है। मेला क्षेत्र में 364 स्थायी और 579 प्री-फैब्रिकेटेड अस्थायी शौचालय बनाए जा रहे हैं। इसके साथ 134 स्नानागार और 74 चेंजिंग रूम की व्यवस्था होगी। सड़कों को दुरुस्त करने के लिए नगर निगम 53 पथों तथा पथ निर्माण विभाग 35 मुख्य सड़कों की मरम्मत करा रहा है। पेयजल के लिए 280 चापाकल, 54 प्याऊ, 890 नल, 22 वाटर टैंकर और दो वाटर एटीएम उपलब्ध रहेंगे।

73 स्वास्थ्य शिविरों में 125 डॉक्टर तैनात

श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य को देखते हुए मेला क्षेत्र में 73 स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएंगे। इनमें 125 डॉक्टर, 178 पैरामेडिकल कर्मी और 52 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तैनात रहेंगे। आपात स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया है। आवागमन के लिए 50 रिंग बस और 150 ई-रिक्शा निशुल्क संचालित किए जाएंगे। बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं को पिंडवेदी तक पहुंचाने में स्काउट-गाइड, एनएसएस और एनसीसी के स्वयंसेवक व्हीलचेयर के साथ सहायता करेंगे।

घाटों पर एसडीआरएफ, 24 घंटे कंट्रोल रूम

सुरक्षा व्यवस्था के तहत प्रमुख तालाबों और घाटों पर एसडीआरएफ की टीम तैनात रहेगी। श्रद्धालुओं की सुविधा और आपात स्थिति से निपटने के लिए 24 घंटे हेल्पलाइन और कंट्रोल रूम संचालित किया जाएगा। प्रशासन तकनीक, सुरक्षा, स्वच्छता, स्वास्थ्य और यातायात व्यवस्था के समन्वय से मेले को व्यवस्थित बनाने की तैयारी में जुटा है।

विष्णुपद मंदिर के आसपास कॉरिडोर का प्रस्ताव

पितृपक्ष मेले की तैयारियों के साथ गयाजी में धार्मिक पर्यटन से जुड़ी दीर्घकालिक योजनाओं पर भी काम चल रहा है। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर विष्णुपद मंदिर के चारों ओर विश्वस्तरीय कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा करीब 120 करोड़ रुपये की लागत से 1,000 बेड वाली आधुनिक गयाजी धर्मशाला के निर्माण की योजना है। इससे मेले के अलावा वर्षभर गयाजी आने वाले श्रद्धालुओं को भी आवासीय सुविधा मिलने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री होमस्टे प्रोत्साहन योजना में विष्णुपद मंदिर, महाबोधि मंदिर, डुंगेश्वरी मंदिर और गुरपा पहाड़ी को शामिल किया गया है। पात्र लाभार्थियों को 11 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता देने का प्रावधान है। इसका उद्देश्य स्थानीय लोगों को पर्यटन गतिविधियों से जोड़ना और रोजगार के अवसर बढ़ाना है।

मोक्षधाम के रूप में गयाजी की विशेष मान्यता

धार्मिक मान्यता के अनुसार, गयाजी में पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण करने से पितरों का उद्धार होता है और पितृदोष से मुक्ति मिलती है। गयाजी को मोक्षधाम माना जाता है। विष्णुपद मंदिर में भगवान विष्णु के चरणचिह्न प्रतिष्ठित हैं। मान्यता है कि भगवान विष्णु ने गयासुर नामक असुर पर अपना दाहिना चरण रखा था। यही कारण है कि पितृपक्ष के दौरान गयाजी में पिंडदान को विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है।

देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पितृपक्ष केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर भी है। इस वर्ष प्रशासन का लक्ष्य मेले की विशालता के अनुरूप श्रद्धालुओं को सुरक्षित, स्वच्छ और सुगम वातावरण उपलब्ध कराना है।

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हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद चौधरी