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अमेठी : स्वयं सहायता समूह से जुड़कर नीतू हुई आत्मनिर्भर, अब गांव-गांव महिलाओं को कर रही जागरुक

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अमेठी : स्वयं सहायता समूह से जुड़कर नीतू हुई आत्मनिर्भर, अब गांव-गांव महिलाओं को कर रही जागरुक


अमेठी, 06 अक्टूबर (हि.स.)। कभी घर-परिवार और बच्चों की देखभाल तक सीमित रहने वाली विकासखंड अमेठी के ग्राम नरैनी निवासी नीतू आज न केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हैं, बल्कि गांव-गांव और घर-घर जाकर महिलाओं को सरकारी एवं गैर सरकारी योजनाओं की जानकारी देकर उन्हें जागरूक और सशक्त बनाने का काम कर रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद नीतू के जीवन में आए बदलाव ने उन्हें गांव की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बना दिया है।

नीतू ने मंगलवार को बताया कि कुछ समय पहले तक उनका जीवन पूरी तरह घर-परिवार की जिम्मेदारियों तक सीमित था। परिवार की आर्थिक स्थिति भी अच्छी नहीं थी और उन्हें सरकारी योजनाओं से मिलने वाले लाभों की पर्याप्त जानकारी नहीं थी। परिवार की आय बढ़ाने के साधन सीमित होने के कारण वह स्वयं भी आर्थिक रूप से कोई विशेष योगदान नहीं दे पा रही थीं।

इसी दौरान नीतू राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें बचत, आजीविका संवर्धन, स्वरोजगार और विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी मिलने लगी। बैठकों, प्रशिक्षण और मार्गदर्शन के माध्यम से उनके भीतर आत्मविश्वास बढ़ा। उन्होंने महसूस किया कि उचित अवसर और मार्गदर्शन मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। एनआरएलएम से जुड़ने के बाद नीतू ने पूरी मेहनत और लगन से अपनी जिम्मेदारियां निभानी शुरू कीं। वह गांव-गांव और घर-घर जाकर महिलाओं से संपर्क करती हैं तथा उन्हें सरकारी एवं गैर सरकारी योजनाओं की जानकारी देती हैं। महिलाओं को योजनाओं का लाभ लेने, स्वयं सहायता समूह से जुड़ने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करती हैं।

उनके प्रयासों से ग्रामीण महिलाओं में योजनाओं और उपलब्ध अवसरों को लेकर जागरूकता बढ़ी है। नीतू का कहना है कि महिलाओं को सही जानकारी मिल जाए तो वे अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं। नीतू की मेहनत का असर उनकी अपनी आर्थिक स्थिति पर भी दिखाई देने लगा है। आज वह करीब 30 से 40 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं। आर्थिक रूप से सक्षम होने के बाद उन्होंने अपने पति का भी सहयोग किया और उन्हें आर्थिक सहायता देकर दुकान खुलवाने में मदद की। इससे परिवार के लिए आय का एक अतिरिक्त साधन तैयार हुआ और घर की आर्थिक स्थिति पहले की तुलना में बेहतर हुई।

आर्थिक आत्मनिर्भरता ने नीतू के जीवन में केवल आमदनी ही नहीं बढ़ाई, बल्कि उनके आत्मविश्वास और सामाजिक सम्मान में भी इजाफा किया है। जो नीतू कभी घर-परिवार की जिम्मेदारियों तक सीमित थीं, वही आज दूसरी महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं। नीतू का मानना है कि महिलाओं को यदि सही अवसर, प्रशिक्षण और मार्गदर्शन मिले तो वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के साथ-साथ समाज के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।

जनपद अमेठी में जिलाधिकारी शशांक चौधरी के मार्गदर्शन में ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। एनआरएलएम के माध्यम से महिलाओं को आजीविका के अवसरों से जोड़ने, सरकारी योजनाओं की जानकारी देने और स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। नीतू की सफलता इसी दिशा में किए जा रहे प्रयासों का प्रेरणादायी उदाहरण है।

नीतू अपनी सफलता के लिए मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी अमेठी तथा एनआरएलएम के अधिकारियों एवं पूरी टीम के प्रति आभार व्यक्त करती हैं। उनका कहना है कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आगे बढ़ने का अवसर मिला और उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया।नीतू की कहानी ग्रामीण महिलाओं के लिए यह संदेश देती है कि अवसर, सही मार्गदर्शन और आत्मविश्वास के साथ महिलाएं न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बदल सकती हैं, बल्कि समाज में बदलाव की नई कहानी भी लिख सकती हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / लोकेश त्रिपाठी