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निबंध साहित्य के पुरोधा बाबू गुलाब राय की साहित्यिक सृजन यात्रा का भागीदार रहा है आगरा, पुण्यतिथि पर विभिन्न आयोजन

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निबंध साहित्य के पुरोधा बाबू गुलाब राय की साहित्यिक सृजन यात्रा का भागीदार रहा है आगरा, पुण्यतिथि पर विभिन्न आयोजन


निबंध साहित्य के पुरोधा बाबू गुलाब राय की साहित्यिक सृजन यात्रा का भागीदार रहा है आगरा, पुण्यतिथि पर विभिन्न आयोजन


निबंध साहित्य के पुरोधा बाबू गुलाब राय की साहित्यिक सृजन यात्रा का भागीदार रहा है आगरा, पुण्यतिथि पर विभिन्न आयोजन


निबंध साहित्य के पुरोधा बाबू गुलाब राय की साहित्यिक सृजन यात्रा का भागीदार रहा है आगरा, पुण्यतिथि पर विभिन्न आयोजन


आगरा , 13 अप्रैल (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के जनपद आगरा को हिंदी जगत के साहित्यिक पटल पर विशेष पहचान दिलाने वाले निबंध साहित्य के अजेय पुरोधा बाबू गुलाब राय की आज 13 अप्रैल को 63 वीं पुण्यतिथि है। आज ही के दिन 13 अप्रैल 1963 को आगरा में चिर निद्रा में लीन हुए थे।

बाबू गुलाब राय स्मृति संस्थान आगरा की अध्यक्ष डा0 शशि तिवारी ने बताया कि आगरा में थाना हरी पर्वत क्षेत्र अंतर्गत दिल्ली गेट बाबू गुलाब राय की यादें और विरासत को संजोए हुए हैं। दिल्ली गेट पर दीप केमिस्ट के सामने गली में अंदर बाबू गुलाब राय जी का मकान आज भी मौजूद है जिसमें उनके प्रपोत्र गौरव(63) और संजय राय (55) रह रहे हैं; यह मार्ग उन्हीं के नाम से बाबू गुलाब राय मार्ग के रूप में जाना जाता है। इस मकान की दोनों गेटों पर लगी उनके नाम की पट्टीकायें जिन पर बाबू 'गुलाब राय एम. ए' अंकित है उनके मकान को साहित्यिक धरोहर के रूप में प्रस्तुत कर रही हैं।

बाबू गुलाब राय के प्रपोत्र संजय राय की पत्नी प्रेरणा राय बताती हैं कि बाबू जी का जन्म जन्म 17 जनवरी 1888 को इटावा में हुआ था, प्रारंभिक शिक्षा भी वही हुई लेकिन आगे की शिक्षा के लिए वे आगरा आ गए।उन्होंने आगरा कॉलेज से बी ए करने के बाद दर्शनशास्त्र में एमए किया और एल एल बी भी किया। उसके बाद छतरपुर रियासत के महाराजा द्वारा अपनी रियासती जिम्मेदारी के लिए छतरपुर बुला लिया गया। वहां कई वर्षों तक सेवाएं देने के बाद वह पुन:आगरा लौट आए और सेंट जोस कॉलेज में हिंदी विभाग के विभाग के अध्यक्ष बन गए।

आगरा आकर साहित्यिक सृजन को दिया पूरा समय

आगरा आकर शिक्षण और अध्यापन कार्य से जुड़ने के बाद वह अपनी साहित्यिक रचनाओं के सृजन में पूरा समय देने लगे। प्रारंभिक रचनाओं में उनके साहित्य में दार्शनिक पुट का भरपूर समावेश है लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने अपने साहित्य सृजन को जन भावनाओं के अनुरूप मोड़ दिया। गुलाबराय जी अपने जीवन के अन्तिम काल तक साहित्य -साधना में लीन रहे । उनकी साहित्यिक सेवाओं के फलस्वरूप आगरा विश्वविद्यालय ने उन्हें डी. लिट की उपाधि से सम्मानित किया ।

बाबू गुलाब राय जी के प्रपोत्र संजय राय सभासद नगर निगम आगरा साहित्यिक चर्चा करते हुए कहते हैं कि कोई लेखक हमारे लिए तब और महत्वपूर्ण हो जाता है, जब उसकी दृष्टि युग पर होती है, समय पर होती है और युग को एक नई दृष्टि देने की ललक उसके साहित्य में दृष्टिगोचर होती है। बाबू गुलाबराय एक ऐसे ही साहित्यकार थे,जो अपनी दार्शनिक विचारधारा के साथ कहीं एक सफल निबंधकार, कहीं सशक्त इतिहास लेखक, कहीं सफल सम्पादक और बहुमुखी रचनाकार के रूप में दिखाई देते हैं। बाबू गुलाबराय का साहित्यिक क्षितिज अत्यन्त व्यापक है।

बाबू गुलाब राय की स्मृति में होंगे कई कार्यक्रम

संजय राय ने बताया कि बाबूजी ने कई वर्ष तक सेंट जॉन्स कॉलेज आगरा में हिंदी विभाग अध्यक्ष रहकर अध्यापन कार्य किया। इसलिए इस अवसर पर उनको विनम्र श्रद्धांजलि देने के लिए दोपहर 2 बजे से 4 बजे तक कॉलेज सभागार में साहित्यकारों को आमंत्रित किया गया है जिसमें हम परिजनों को भी विशेष रूप से बुलाया गया है और हम लोग वहां भाग लेंगे। इसके अलावा दिल्ली गेट पर क्वीन विक्टोरिया इंटर कॉलेज गेट के सामने बाबू गुलाब राय की स्मृति में स्थापित की गई उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि देने का भी कार्यक्रम है।

डाक विभाग जारी कर चुका है डाक टिकट

बाबू गुलाब राय के सम्मान में भारतीय डाकतार विभाग ने 22 जून 2002 को एक टिकट जारी किया था; इसका मूल्य पांच रुपये था; इस डाक टिकट पर बाबू गुलाबराय के चित्र के साथ उनकी तीन प्रमुख पुस्तकों को भी प्रदर्शित किया गया था।

गुलाब राय स्मृति संस्थान की अध्यक्ष डा0 शशि तिवारी के अनुसार गुलाब राय जी ने मौलिक ग्रन्थों की रचना के साथ-साथ अनेक ग्रन्थों का सम्पादन भी किया है । उनकी कृतियों में नवरस, हिन्दी साहित्य का सुबोध इतिहास, हिन्दी नाट्य विमर्श, आलोचना कुसुमांजलि, काव्य के रूप, सिद्धान्त और अध्ययन,कर्तव्य शास्त्र, तर्क शास्त्र, बौद्ध धर्म, पाश्चात्य दर्शनों का इतिहास, भारतीय संस्कृति की रूपरेखा, प्रकार प्रभाकर, जीवन- पशु, ठलुआ क्लब, मेरी असफलताएँ, मेरे मानसिक उपादान, मन की बातें, विज्ञान वार्ता, बाल प्रबोध, सत्य हरिश्चन्द्र, भाषा-भूषण, कादम्बरी कथा - सार आदि प्रमुख हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / Vivek Upadhyay