राजस्थान विधानसभा : विपक्ष ने किया सदन की कार्यवाही का बहिष्कार
जयपुर, 26 फ़रवरी (हि.स.)। राजस्थान विधानसभा में गुरुवार को अनुदान मांगों पर बहस के दौरान जबरदस्त हंगामा देखने को मिला। कांग्रेस विधायक श्रवण कुमार को बोलने की अनुमति देने और फिर उसे रद्द करने के मामले ने इतना तूल पकड़ा कि सदन की कार्यवाही को आधे घंटे के लिए स्थगित करना पड़ा। अंततः, विपक्षी दल के सदस्यों ने सदन की कार्यवाही का बहिष्कार कर दिया।
विवाद उस समय शुरू हुआ जब सभापति ने कांग्रेस विधायक श्रवण कुमार को बोलने की अनुमति दे दी और उन्होंने अपनी बात रखना शुरू किया। इसी बीच स्पीकर वासुदेव देवनानी सदन में आए और उन्हें टोकते हुए कहा कि मैंने आपको पहले ही आज के लिए मना किया था। आप पिछले छह दिनों से बोल रहे हैं, आपको बाद में अवसर दिया जाएगा, लेकिन आज नहीं। मैं अपने आदेशों की अवहेलना सहन नहीं करूंगा।
इस पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने 'व्यवस्था का प्रश्न' उठाते हुए इसे विधायक का अपमान करार दिया। जूली ने कड़े शब्दों में कहा कि हम आप लोगों की मेहरबानी से यहां नहीं हैं। अनुमति देकर सदस्य की बेइज्जती करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर सदन को दादागिरी से ही चलाना है, तो चला लीजिए, यह उचित तरीका नहीं है। इस दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई, जिसके बाद सदन को स्थगित कर दिया गया। शाम 7:27 बजे जब सदन की कार्यवाही पुनः आरंभ हुई, तब भी स्थिति सामान्य नहीं हो सकी। अपनी बात अनसुनी किए जाने से नाराज कांग्रेस विधायक सदन की कार्यवाही का बहिष्कार कर बाहर चले गए।
बीएसी की बैठक
विधानसभा अध्यक्ष की अध्यक्षता में आयोजित कार्य सलाहकार समिति (बीएसी) की बैठक में आगामी 6 मार्च तक के विधायी कार्यों का रोडमैप तैयार किया गया है। समिति के निर्णयानुसार सदन की कार्ययोजना में छुट्टियों और महत्वपूर्ण विधेयकों को प्राथमिकता दी गई है। सदन की कार्यवाही के बीच आगामी 28 फरवरी से 4 मार्च तक विधानसभा में अवकाश रहेगा। इस विराम के पश्चात 5 मार्च को सदन में 'जन विश्वास विधेयक' और 'राजस्थान दुकान एवं वाणिज्य संशोधन विधेयक' पर विस्तार से बहस की जाएगी और इसी दिन इन्हें पारित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अगले दिन, यानी 6 मार्च को 'डिस्टर्ब एरिया बिल' (अशांत क्षेत्र विधेयक) को पारित करने की योजना है। हालांकि कैबिनेट द्वारा बुधवार को मंजूर किए गए पंचायतीराज और नगर पालिका संशोधन बिलों जिनका उद्देश्य दो से अधिक संतान वाले प्रत्याशियों के चुनाव लड़ने पर लगी बाध्यता को हटाना है को पारित करने का समय फिलहाल तय नहीं किया जा सका है।
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हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर

