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मीडिया छात्रों के लिए सतही नहीं, गहन अध्ययन जरूरी: प्रो. के.जी. सुरेश

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मीडिया छात्रों के लिए सतही नहीं, गहन अध्ययन जरूरी: प्रो. के.जी. सुरेश


जयपुर, 08 सितंबर (हि.स.)। हरिदेव जोशी पत्रकारिता और जनसंचार विश्वविद्यालय (एचजेयू) में मंगलवार को नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए ‘दीक्षारम्भ-2026’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों के साथ संवाद सत्र हुआ, जिसमें पत्रकारिता एवं जनसंचार के क्षेत्र में बदलती तकनीक, अध्ययन की उपयोगिता और मीडिया की जिम्मेदारियों पर चर्चा की गई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. नन्द किशोर पाण्डेय ने की। मुख्य वक्ता के रूप में इंडिया हैबिटेट सेंटर नई दिल्ली के निदेशक प्रो. के.जी. सुरेश मौजूद रहे। राजस्थान सरकार के अतिरिक्त निदेशक जनसंपर्क, लेखक एवं साहित्य समीक्षक डॉ. राजेश कुमार व्यास मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कुलगुरु ने अतिथियों का शॉल और श्रीफल भेंटकर स्वागत किया। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. गरिमाश्री ने किया, जबकि मंच संचालन डॉ. रतन सिंह शेखावत ने किया।

कुलगुरु प्रो. नन्द किशोर पाण्डेय ने विश्वविद्यालय और यहां संचालित पाठ्यक्रमों की जानकारी देते हुए विद्यार्थियों से अपने विषय की गहराई से समझ विकसित करने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में प्रवेश के बाद विद्यार्थियों को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रहना चाहिए। अपने विषय से जुड़े विभिन्न पहलुओं को समझने के साथ तथ्यात्मक जानकारी हासिल करना और लगातार पढ़ते रहना आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों को सीखने की निरंतर प्रक्रिया के साथ अपने ज्ञान का दायरा व्यापक बनाने की सलाह दी।

मुख्य वक्ता प्रो. के.जी. सुरेश ने कहा कि एक पत्रकार के लिए शिक्षण के साथ प्रशिक्षण भी जरूरी है। मीडिया के विद्यार्थियों को सतही जानकारी के बजाय गहन अध्ययन पर ध्यान देना चाहिए, ताकि वे अपने विषय के विशेषज्ञ बन सकें। उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर में कृत्रिम बुद्धिमत्ता मीडिया क्षेत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रही है, लेकिन विद्यार्थियों को तकनीक के साथ अपनी बुद्धिमत्ता का भी इस्तेमाल करना होगा। किसी भी सूचना को आगे बढ़ाने से पहले उसका सत्यापन और दोबारा जांच करना पत्रकारिता की मूल जिम्मेदारी है।

डॉ. राजेश कुमार व्यास ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता की चुनौतियों पर विचार रखते हुए कहा कि तकनीक साधन है, साध्य नहीं। इसका उपयोग मानव जीवन और कार्यक्षमता को बेहतर बनाने के लिए होना चाहिए। तकनीक का इतना अधिक इस्तेमाल भी नहीं होना चाहिए कि वह इंसान पर ही नियंत्रण करने लगे। उन्होंने विद्यार्थियों को तकनीक के विवेकपूर्ण इस्तेमाल की सलाह दी और विश्वविद्यालय में आयोजित दीक्षारम्भ कार्यक्रम की सराहना की।

कार्यक्रम के दौरान नवप्रवेशित विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों, पत्रकारिता के बदलते स्वरूप और जिम्मेदार मीडिया कर्मी के रूप में उनकी भूमिका से परिचित कराया गया। संवाद सत्र में विद्यार्थियों ने अतिथियों से विभिन्न विषयों पर सवाल भी किए।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित