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मानसून में बच्चों की सेहत पर मंडराया संक्रमण का खतरा:डॉ. महेश सिंह

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मानसून में बच्चों की सेहत पर मंडराया संक्रमण का खतरा:डॉ. महेश सिंह


जयपुर, 04 अगस्त (हि.स.)। मानसून की बारिश जहां भीषण गर्मी से राहत लेकर आई है, वहीं बच्चों के स्वास्थ्य के लिए नई चुनौतियां भी लेकर आई है। बारिश के मौसम में बढ़ी नमी, दूषित पानी और स्वच्छता में कमी के कारण बैक्टीरिया एवं वायरस तेजी से सक्रिय हो रहे हैं, जिससे बच्चों में मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। चिकित्सक डॉ. महेश सिंह ने चेतावनी दी है कि थोड़ी-सी लापरवाही भी बच्चों के लिए गंभीर बीमारी और कई मामलों में जानलेवा साबित हो सकती है।

चिकित्सक डॉ. महेश सिंह ने बताया कि मानसून के दौरान वायरल फीवर, टाइफाइड, हेपेटाइटिस-ए, डेंगू और विशेष रूप से डायरिया (दस्त) के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। राजधानी के अस्पतालों में मौसमी बीमारियों से पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ रही है। अस्पतालों की ओपीडी और आईपीडी में बड़ी संख्या में बच्चे उपचार के लिए पहुंच रहे हैं।

उन्होंने बताया कि बारिश के मौसम में दूषित पानी और संक्रमित भोजन के कारण बैक्टीरिया व वायरस तेजी से पनपते हैं। छोटे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) अपेक्षाकृत कमजोर होने के कारण वे संक्रमण की चपेट में जल्दी आ जाते हैं। स्कूलों और खेल के मैदानों में बच्चों के आपसी संपर्क से संक्रमण तेजी से फैलता है, जिससे सामूहिक संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

डॉक्टर महेश सिंह ने बताया कि मौसमी बीमारियों में डेंगू और डायरिया सबसे गंभीर हैं। लगातार उल्टी और दस्त के कारण बच्चों के शरीर में पानी और आवश्यक लवणों की कमी (डिहाइड्रेशन) तेजी से होने लगती है। समय पर उपचार नहीं मिलने पर बच्चे की स्थिति गंभीर हो सकती है और शरीर के महत्वपूर्ण अंग प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि तेज बुखार, लगातार दस्त, उल्टी या अत्यधिक सुस्ती जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

डॉक्टर सिंह ने अभिभावकों को सलाह दी है कि बच्चों को केवल उबला या शुद्ध पेयजल ही पिलाएं। खुले खाद्य पदार्थ, कटे फल और सड़क किनारे मिलने वाले खाद्य पदार्थों से बच्चों को दूर रखें। मच्छरों से बचाव के लिए घर के आसपास पानी जमा नहीं होने दें, बच्चों को पूरी आस्तीन के कपड़े पहनाएं और व्यक्तिगत स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। नियमित रूप से साबुन से हाथ धोने की आदत भी संक्रमण से बचाव का प्रभावी उपाय है।

ज्ञात रहे कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (एनएफएचएस-6) की वर्ष 2023-24 की रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान में बच्चों में डायरिया के मामलों में कमी दर्ज की गई है। प्रदेश में डायरिया की दर 6.1 प्रतिशत से घटकर 5.8 प्रतिशत हो गई है, जो राष्ट्रीय औसत 7.9 प्रतिशत से कम है। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के दौरान राहत देने वाले इन आंकड़ों के बावजूद सतर्कता बरतना बेहद जरूरी है, क्योंकि मौसम में थोड़ी-सी लापरवाही भी बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश