पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड बना अनजान, औद्योगिक क्षेत्र से द्रव्यवती में छोड़ा रहा गंदा पानी
जयपुर, 10 जून (हि.स.)। राज्य सरकार द्वारा द्रव्यवती नदी को प्रदूषण मुक्त और स्वच्छ बनाने के निर्देशों के बावजूद नदी में गंदे पानी का प्रवाह पूरी तरह नहीं रुक पाया है। इसके लिए गठित संयुक्त समन्वय समिति के सर्वे में सामने आया है कि द्रव्यवती नदी में लगभग 30 स्थानों से सीधे प्रदूषित पानी छोड़ा जा रहा है, जिनमें से कई बिंदुओं पर अब भी सुधारात्मक कार्रवाई अधूरी है।
सरकार के निर्देश पर नगरीय विकास विभाग, जेडीए और राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अधिकारियों की संयुक्त टीम ने अतिरिक्त मुख्य सचिव आलोक गुप्ता के नेतृत्व में बंबाला पुलिया से स्वर्ण जयंती पार्क तक लगभग 40 किलोमीटर क्षेत्र का निरीक्षण किया। निरीक्षण में पाया गया कि कई स्थानों पर सीवरेज लाइनें बरसाती नालों से जुड़कर सीधे नदी में गिर रही हैं, जबकि सांगानेर क्षेत्र की रंगाई-छपाई इकाइयों से निकलने वाला अपशिष्ट भी नदी को प्रदूषित कर रहा है।
सर्वेक्षण के दौरान चिन्हित 30 प्रदूषण बिंदुओं में से 15 स्थानों पर गंदे पानी की रोकथाम की जिम्मेदारी राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल को सौंपी गई थी। आरोप है कि इन बिंदुओं पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से सांगानेर, सीतापुरा, वीकेआई और सुदर्शनपुरा औद्योगिक क्षेत्रों से प्रदूषित पानी लगातार द्रव्यवती में पहुंच रहा है। इससे नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने की योजना को झटका लगा है।
निरीक्षण में यह भी सामने आया कि सुशीलपुरा पुलिया क्षेत्र में बड़ी मात्रा में सीवरेज सीधे नदी में गिर रहा है। समस्या के समाधान के लिए जेडीए द्वारा लगभग 15 करोड़ रुपये की लागत से नई पाइपलाइन बिछाने का कार्य किया जा रहा है। साथ ही औद्योगिक इकाइयों को कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) से जोड़ने के निर्देश दिए गए हैं ताकि बिना उपचारित अपशिष्ट नदी में न पहुंचे। दूसरी ओर जेडीए और नगर निगम को भी 15 स्थानों पर प्रदूषित जल के प्रवाह को रोकने की जिम्मेदारी दी गई थी। विभागीय अधिकारियों के अनुसार अब तक 10 स्थानों पर सुधार कार्य पूरे कर लिए गए हैं, जबकि पांच स्थानों पर अभी भी गंदा पानी नदी में गिर रहा है। हालांकि दोनों विभागों का कहना है कि शेष बिंदुओं पर भी कार्य जारी है।
राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के मुख्य पर्यावरणविद् प्रेमा लाल ने कहा कि द्रव्यवती नदी के प्रदूषण को रोकने के लिए लगातार सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं और नदी को स्वच्छ बनाने में कोई कमी नहीं छोड़ी जाएगी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उनके विभाग के हिस्से में कितने कार्य पूर्ण हुए हैं, इसकी विस्तृत जानकारी फिलहाल उनके पास उपलब्ध नहीं है।
उल्लेखनीय है कि लगभग 1,500 करोड़ रुपये की लागत से विकसित द्रव्यवती नदी परियोजना को जयपुर की प्रमुख शहरी पुनर्विकास योजनाओं में गिना जाता है। ऐसे में नदी में लगातार प्रदूषित जल का प्रवाह प्रशासनिक प्रयासों और पर्यावरणीय प्रबंधन की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश

