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तबादलों पर भड़का आक्रोश : स्थानांतरण रद्द न होने पर बुधवार को शिक्षा मंत्री का पुतला फूंकने की चेतावनी

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तबादलों पर भड़का आक्रोश : स्थानांतरण रद्द न होने पर बुधवार को शिक्षा मंत्री का पुतला फूंकने की चेतावनी


तबादलों पर भड़का आक्रोश : स्थानांतरण रद्द न होने पर बुधवार को शिक्षा मंत्री का पुतला फूंकने की चेतावनी


डूंगरपुर, 14 जुलाई (हि.स.)।

शिक्षा विभाग में हाल ही में हुए प्राध्यापकों एवं द्वितीय श्रेणी शिक्षकों के बड़े पैमाने पर स्थानांतरणों को लेकर राजस्थान शिक्षक संघ (एसटीएफआई) ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संगठन ने इन तबादलों को पूरी तरह गैर-पारदर्शी, अनैतिक और पक्षपातपूर्ण करार दिया है। एसटीएफआई उपशाखा पाल देवल के ब्लॉक अध्यक्ष केशव कोटेड के नेतृत्व में शिक्षकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने देवल तहसीलदार को मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर विरोध दर्ज कराया। संगठन ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि 15 जुलाई तक इन विवादित आदेशों की समीक्षा कर इन्हें निरस्त नहीं किया गया, तो जिला मुख्यालय पर शिक्षा मंत्री का पुतला दहन कर उग्र आंदोलन किया जाएगा।

एसटीएफआई के जिला उपाध्यक्ष नारायण लाल कोटेड एवं ब्लॉक उपाध्यक्ष शंकर कोटेड ने सरकार की वर्तमान तबादला नीति पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग द्वारा हाल ही में जारी की गई स्थानांतरण सूचियों में पारदर्शिता का दूर-दूर तक कोई नामोनिशान नहीं है। अनेक शिक्षकों के तबादले बिना किसी स्पष्ट, तार्किक और न्यायसंगत आधार के कर दिए गए हैं, जिससे धरातल पर कार्यरत शिक्षकों में भारी असंतोष और आक्रोश व्याप्त है। उन्होंने साफ किया कि अगर विभाग ने शिक्षक हितों को ताक पर रखकर अपनी मनमानी जारी रखी, तो संगठन चरणबद्ध तरीके से आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए बाध्य होगा।

वहीं, ब्लॉक अध्यक्ष केशव कोटेड और जिला संयुक्त मंत्री विनोद मीणा ने कहा कि शिक्षक हमेशा छात्र हित और राष्ट्र निर्माण को सर्वोपरि मानकर कार्य करते हैं। इसके बावजूद विभाग द्वारा लिए जा रहे ऐसे भेदभावपूर्ण और मनमाने निर्णयों से निष्ठावान शिक्षकों का मनोबल बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। संगठन ने सरकार से पुरजोर मांग की है कि हाल ही में हुए सभी स्थानांतरणों की एक उच्च स्तरीय निष्पक्ष समीक्षा की जाए ताकि पात्र और पीड़ित शिक्षकों को न्याय मिल सके।

ब्लॉक मंत्री नारायण डामोर ने बताया कि ज्ञापन के माध्यम से सरकार के समक्ष मुख्य रूप से यह मांग रखी गई है कि स्थानांतरण की पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह से ऑनलाइन और पारदर्शी बनाया जाए। साथ ही, जितने भी अनियमित और विवादित स्थानांतरण आदेश जारी हुए हैं, उन्हें तुरंत प्रभाव से वापस लिया जाए। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन और सरकार ने समय रहते उनकी जायज मांगों पर सकारात्मक रुख नहीं अपनाया, तो 15 जुलाई को जिला मुख्यालय पर बड़ा विरोध प्रदर्शन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

इस अवसर पर संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी शंकरलाल कोटेड, कमलेश जोशी, बसन्ती कटारा, लक्ष्मी कोटेड और राजेन्द्र गडहा सहित क्षेत्र के सैकड़ों शिक्षक और पदाधिकारी अपनी मांगों के समर्थन में उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष