जीत की खुशी के बीच मातम, एक दिन बाद निर्दलीय पार्षद की मौत
पाली, 15 सितंबर (हि.स.)। नगर पालिका चुनाव में जीत की खुशी के बीच मारवाड़ जंक्शन में मंगलवार सुबह उस समय मातम छा गया, जब वार्ड-7 से निर्दलीय पार्षद चुने गए अबरार खान मेव (58) की मौत हो गई। चुनाव परिणाम घोषित होने के महज एक दिन बाद हुई इस घटना से परिवार, समर्थकों और क्षेत्रवासियों में शोक की लहर दौड़ गई। घर पर जीत की बधाई देने पहुंचे लोगों के बीच अचानक हुई इस घटना ने सभी को स्तब्ध कर दिया।
जानकारी के अनुसार अबरार खान मंगलवार सुबह अपने घर पर थे। चुनाव में जीत की बधाई देने के लिए लोग उनके घर पहुंच रहे थे। इसी दौरान सुबह करीब 8 बजे चाय पीते समय उनके सीने में अचानक दर्द हुआ। परिवार के लोग और वहां मौजूद अन्य लोग उन्हें तत्काल बांगड़ अस्पताल लेकर पहुंचे। अस्पताल में करीब 9 बजे चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
अबरार खान की मौत की खबर से मारवाड़ जंक्शन में शोक का माहौल बन गया। पूर्व विधायक खुशवीर सिंह जोजावर भी पाली के बांगड़ अस्पताल पहुंचे।
उन्होंने बताया कि 14 सितंबर को चुनाव जीतने के बाद अबरार खान को बधाई दी थी और उनका मुंह भी मीठा करवाया था। किसी ने नहीं सोचा था कि जीत की खुशी के अगले ही दिन परिवार और समर्थकों को ऐसी दुखद खबर सुननी पड़ेगी।
अबरार खान मेव क्षेत्र में सामाजिक और व्यापारिक रूप से भी सक्रिय थे। वे कोयले के बड़े व्यापारी होने के साथ मुस्लिम समाज के सदर (अध्यक्ष) भी रहे। इसके अलावा वे वार्ड पंच की जिम्मेदारी भी निभा चुके थे।
स्थानीय लोगों के बीच उनकी पहचान एक सामाजिक रूप से सक्रिय व्यक्ति के रूप में थी।
मारवाड़ जंक्शन नगर पालिका में कुल 25 वार्ड हैं। सोमवार को घोषित चुनाव परिणामों में भाजपा और कांग्रेस ने 11-11 वार्डों पर जीत दर्ज की, जबकि तीन वार्ड निर्दलीयों के खाते में गए थे। ऐसे में दोनों प्रमुख दलों को बोर्ड बनाने के लिए निर्दलीय पार्षदों के समर्थन की आवश्यकता थी।
अब वार्ड-7 से निर्वाचित निर्दलीय पार्षद अबरार खान की मौत के बाद नगर पालिका बोर्ड गठन के सियासी समीकरण पर भी असर पड़ा है।
चुनावी जीत के अगले ही दिन हुई इस दुखद घटना ने मारवाड़ जंक्शन की राजनीति और सामाजिक माहौल को गमगीन कर दिया है।
मारवाड़ जंक्शन पहली बार नगरपालिका बनी है। ऐसे में नए नगर पालिका बोर्ड के गठन को लेकर भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही थी। अब अबरार खान के निधन से इस प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित

