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जयपुर में सोमवार को निकलेगी लोकमंथन यात्रा, लोक संस्कृति के विविध रंग होंगे प्रस्तुत

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जयपुर में सोमवार को निकलेगी लोकमंथन यात्रा, लोक संस्कृति के विविध रंग होंगे प्रस्तुत


जयपुर, 20 सितंबर (हि.स.)। लोकमंथन-2026 के तहत ‘लोकमंथन यात्रा—जयपुर महानगर’ का आयोजन सोमवार, 21 सितंबर को होगा। यात्रा सुबह आठ बजे श्री गोविंद देवजी मंदिर से शुरू होगी। उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी यात्रा को रवाना करेंगी। यात्रा हवा महल, बड़ी चौपड़ और अल्बर्ट हॉल होते हुए महारानी कॉलेज पहुंचेगी, जहां सुबह 10 बजे स्वागत और सांस्कृतिक कार्यक्रम शुरू होंगे।

यात्रा में पारंपरिक खेलों के खिलाड़ी और अखाड़ों के पहलवान शामिल होंगे। मलखम्ब और पारंपरिक खेलों का प्रदर्शन भी होगा। लोक परंपरा के ध्वज, लोक वाद्य, पारंपरिक वेशभूषा और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए राजस्थान की लोक संस्कृति को प्रदर्शित किया जाएगा।

महारानी कॉलेज में यात्रा का पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ स्वागत होगा। छात्राओं की ओर से तिलक, कच्छी घोड़ी नृत्य, शहनाई वादन और ढोल-नगाड़ों के साथ स्वागत किया जाएगा। मुख्य सभागार में वैदिक मंगलाचरण, लोक नृत्य, मांड़ गायन, भवई, चरी, कालबेलिया, कच्छी घोड़ी और कठपुतली नृत्य सहित लोकगीतों की प्रस्तुतियां होंगी। लोक साहित्य और लोक संस्कृति पर व्याख्यान तथा ‘लोक में भारत’ और ‘लोक साहित्य और संस्कृति’ विषयों पर संवाद भी होंगे। यात्रा में बाबा रामदेवजी, वीर तेजाजी और संत रविदासजी से जुड़ी झांकियां भी शामिल होंगी। परिसर में लोक परंपराओं तथा वीर-वीरांगनाओं से संबंधित प्रदर्शनियां लगाई जाएंगी।

महारानी कॉलेज में मुख्य सभागार के अलावा सेमिनार हॉल और खुले मंच पर भी कार्यक्रम होंगे। सेमिनार हॉल में जयपुर की लोक कला एवं संस्कृति पर प्रश्नोत्तरी, ‘लोक परम्पराएं’ पर लोक संवाद और ‘हम भारत के लोग—हमारी भाषा, हमारी पहचान’ विषय पर गोष्ठी होगी। खुले मंच पर संस्कृत संभाषण, जादू, लोक रंग, लोक कथा, लोक कविता और लोक स्मृतियों से जुड़े कार्यक्रम होंगे। ‘हम भारत के लोग : संविधान और लोक संस्कृति का समन्वय’ विषय पर भी कार्यक्रम होगा। इतिहास संकलन समिति की ओर से इतिहास लेखन की लोक परंपरा और वंशावली का प्रस्तुतीकरण किया जाएगा।

परिसर के विभिन्न उद्यानों में लोक कला, लोक विज्ञान, भारतीय संविधान, गुरुकुल एवं भारतीय शिक्षा परंपरा, राजस्थान की वीर-वीरांगनाओं तथा औषधीय पौधों से संबंधित प्रदर्शनियां लगाई जाएंगी। साहित्य और लोक संस्कृति से जुड़े स्टॉल भी लगाए जाएंगे। खेल मैदान में कबड्डी, रस्साकशी और तीरंदाजी सहित पारंपरिक खेलों की गतिविधियां होंगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / पारीक