चैत्र नवरात्रा:तिथियों के घटने-बढऩे से अष्टमी एवं नवमी का एक ही दिन संयोग
जयपुर, 17 मार्च (हि.स.)। चैत्र नवरात्र पर इस बार मां दुर्गा का पालकी में आगमन एवं गमन होगा। वहीं तिथियों के घटने-बढ़ने से अष्टमी एवं नवमी का संयोग एक ही दिन पड़ रहा है। मां दुर्गा के नवरात्र 19 मार्च से प्रारंभ हो रहे हैं।
ज्योतिषाचार्य बनवारी लाल शर्मा ने बताया कि गुरुवार का दिन, उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र तथा शुक्ल योग का अद्भुत संयोग पड़ रहा है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से रौद्र नामक नए संवत्सर का प्रारंभ हो जाएगा। गुरुवार के दिन प्रारंभ होने से माता का आगमन पालकी और शुक्रवार को समापन होने से विदाई भी पालकी पर होगी। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को कई नामों से जाना जाता है। ब्रह्म पुराण के अनुसार इसी दिन ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी और सतयुग का आरंभ हुआ था। इसलिए इस तिथि को युगादि तिथि तथा स्वयं सिद्ध मुहूर्त भी कहा जाता है। इस बार तिथियों के घटने-बढऩे के कारण नवरात्र में अष्टमी एवं नवमी का संयोग एक ही दिन पड़ रहा है।
19 मार्च को कलश स्थापना के लिए सुबह 6:50 से 7:50 के मध्य शुभ मुहूर्त रहेगा। इसके बाद सुबह 10:30 से अपराह्न 3:00 बजे तक भी अच्छा मुहूर्त रहेगा। इस दौरान चर, लाभ और अमृत की चौघडिय़ा के साथ अभिजीत मुहूर्त भी रहेगा।
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से रौद्र नामक नए संवत्सर 2083 का प्रारंभ होगा, जो अपने नाम के अनुरूप आम जनमानस के लिए अधिक अनुकूल नहीं माना जा रहा है। नव संवत्सर के साथ वर्ष के पदाधिकारी भी बदलते हैं। इस वर्ष का राजा बृहस्पति और मंत्री मंगल होंगे, जिसके प्रभाव से प्राकृतिक आपदाओं, उथल-पुथल और अग्निकांड की आशंका बताई जा रही हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

