चंद्रग्रहण के सूतक का होलिका दहन और रंगों की होली पर कोई विशेष प्रभाव नहीं
जयपुर, 01 मार्च (हि.स.)। प्रदेश में होलिका दहन 2 और 3 मार्च की मध्य रात्रि में होगा, जिसके बाद 3 मार्च की सुबह रंगों की होली खेली जाएगी। ज्योतिष विद्वानों के अनुसार इस दौरान लगने वाले चंद्र ग्रहण के सूतक का होलिका दहन और रंगों की होली पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ेगा। शहर के प्रमुख आराध्य गोविंददेवजी मंदिर में होलिका दहन से पहले ही 2 मार्च को रंगों और फूलों की होली खेली जाएंगी। इस अवसर पर शहर के लोग दर्शन के लिए ठाकुर जी के दर पहुंचेंगे और सुख-समृद्धि की कामना करेंगे।
पंडित राजेश शर्मा के अनुसार कुछ लोग 3 मार्च को होली जलाने की बात कर रहे हैं,जबकि सही तिथि 2 मार्च ही है। फाल्गुन पूर्णिमा जब प्रदोष काल में रहती है। उसी दिन होलिका दहन किया जाता है। इस साल पूर्णिमा 2 मार्च को शाम 5.56 मिनट से शुरू होकर 3 मार्च को शाम 5.08 मिनट तक रहेगी। वहीं 3 मार्च को सूर्यास्त से पहले पूर्णिमा समाप्त हो जाएगी, इसलिए उस दिन प्रदोष काल में पूर्णिमा नहीं रहेगी। इसी कारण 2 मार्च को ही होलिका दहन का निर्णय शास्त्र सम्मत माना गया है।
2 मार्च की रात भद्रा का प्रभाव रहेगा और भद्रा में होलिका दहन नहीं किया जाता है। लेकिन भद्रा के मुख को छोड़कर पुच्छ में दहन करना श्रेष्ठ माना गया है। इसलिए 2 मार्च की अर्धरात्रि के बाद यानी 3 मार्च की रात 1.26 मिनट से 2.38 मिनट के बीच होलिका दहन करना सर्वश्रेष्ठ रहेगा। धुलंडी होलिका दहन के ठीक अगले दिन सूर्यास्त से पहले मनाई जाती है। इस बार 3 मार्च को सुबह 6.55 मिनट से सूतक शुरू हो जाएगा, जिससे लोगों में भ्रम की स्थिति बनी है। धुलंडी होलिका दहन के अगले दिन ही मनाई जाएगी। चंद्रग्रहण के सूतक का इस पर विशेष प्रभाव नहीं पड़ेगा। वहीं राजस्थान सरकार ने भी प्रदेशभर में होली के अवसर पर 2 मार्च को होलिका दहन और 3 मार्च को धुलंडी का अवकाश घोषित किया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

