कविता, मिथक, विज्ञान और समकालीन बहसों के साथ जयपुर लिटरेचर फ़ेस्टिवल 2026 का समापन
जयपुर, 19 जनवरी (हि.स.)। वेदांता द्वारा प्रस्तुत जयपुर लिटरेचर फ़ेस्टिवल 2026 का 19वां संस्करण अपने पाँचवें और अंतिम दिन साेमवार काे कविता, मिथक, मांगा कॉमिक्स, इतिहास, चिकित्सा, विज्ञान, जलवायु परिवर्तन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे विषयों पर गहन और विचारोत्तेजक चर्चाओं के साथ संपन्न हुआ। अंतिम दिन ने एक बार फिर इस उत्सव को विचारों और संवाद का वैश्विक मंच सिद्ध किया।
अंतिम दिन की शुरुआत ब्रिटिश कवयित्री एलिस ऑसवाल्ड के कविता सत्र से हुई, जहाँ उन्होंने समय, स्मृति, जल और युद्ध जैसे विषयों पर अपनी रचनाएँ प्रस्तुत कीं। इसके बाद मांगा और ग्राफिक नॉवेल्स पर आधारित सत्र में योशितोकी ओइमा, उजान दत्ता, अबीर कपूर सहित लेखकों ने दृश्यात्मक कहानी कहने की ताकत पर चर्चा की।
मिथक और इतिहास से जुड़े सत्रों में आनंद नीलकंठन, मृदुला रमेश और इतिहासकार जनीना रामिरेज़ ने लुप्त सभ्यताओं, मिथकीय कथाओं और इतिहास में महिलाओं की भुला दी गई भूमिकाओं पर संवाद किया। समाज में बदलते मूल्यों पर केंद्रित सत्र जेन ज़ी, द मिलेनियल्स एंड मम्मीजी में पीढ़ियों के बीच बदलते रिश्तों और डिजिटल संस्कृति पर चर्चा हुई।
चिकित्सा और विज्ञान से जुड़े सत्र में लेखिका रैचेल क्लार्क ने अंगदान पर आधारित अपनी पुस्तक पर बात की, वहीं जलवायु और ऊर्जा पर हुए संवाद ने सतत विकास की चुनौतियों को रेखांकित किया। बहुप्रतीक्षित क्लोज़िंग डिबेट फ़्रीडम ऑफ़ स्पीच इज़ अ डेंजरस आइडिया में इयान हिस्लॉप, पवन वर्मा, प्रियंका चतुर्वेदी सहित वक्ताओं ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सत्ता और लोकतंत्र के जटिल संबंधों पर गहन बहस की।
जयपुर लिटरेचर फ़ेस्टिवल 2026 का समापन विविध विचारों, बहसों और रचनात्मक अभिव्यक्तियों के साथ हुआ, जिसने पीढ़ियों और सीमाओं से परे संवाद की इसकी परंपरा को एक बार फिर सशक्त किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

