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एम्स जोधपुर में वैस्कुलर रिपेयर एवं एनास्टोमोसिस पर हैंड्स-ऑन कार्यशाला

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एम्स जोधपुर में वैस्कुलर रिपेयर एवं एनास्टोमोसिस पर हैंड्स-ऑन कार्यशाला


जोधपुर, 04 फरवरी (हि.स.)। एम्स जोधपुर के बाल शल्य चिकित्सा विभाग द्वारा वैस्कुलर रिपेयर एवं एनास्टोमोसिस विषय पर एक दिवसीय हैंड्स-ऑन कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला क्षमता निर्माण एवं शल्य कौशल विकास के उद्देश्य से आयोजित की गई, जिसे मेडट्रॉनिक द्वारा सहयोग प्रदान किया गया।

कार्यशाला में बाल शल्य चिकित्सा, ईएनटी तथा कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग के फैकल्टी सदस्यों एवं रेजिड़ेंट डॉक्टरों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। लगभग तीस सर्जनों ने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में सहभागिता की।

कार्यशाला के सुचारु संचालन में बाल शल्य चिकित्सा विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. मनीष पाठक, डॉ. कीर्ति राठौड़, डॉ. अविनाश, डॉ. राहुल सक्सेना एवं डॉ. शुभलक्ष्मी का विशेष योगदान रहा।

कार्यशाला के रिसोर्स फैकल्टी के रूप में डॉ. आलोक शर्मा, डॉ. सुरेंद्र पटेल, डॉ. मधुसूदन, डॉ. अनिरुद्ध एवं डॉ. राजर्षि ने प्रतिभागियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया। इस अवसर पर डॉ. मनीष पाठक ने कहा कि वैस्कुलर स्यूचरिंग का कौशल जीवनरक्षक सिद्ध हो सकता है और प्रत्येक सर्जन के लिए इसमें दक्षता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि एम्स जोधपुर का बाल शल्य चिकित्सा विभाग राष्ट्रीय महत्व के प्रशिक्षण केंद्र के रूप में मान्यता प्राप्त है।

डॉ. राहुल सक्सेना ने प्रतिभागियों एवं रिसोर्स फैकल्टी का आभार व्यक्त करते हुए प्रमाण-पत्र वितरित किए। उन्होंने बताया कि बाल शल्य चिकित्सा विभाग द्वारा नियमित रूप से इस प्रकार की कार्यशालाएं आयोजित की जाती हैं, जो प्रशिक्षणार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होती हैं।

डॉ. मनीष पाठक ने बताया कि एम्स जोधपुर का बाल शल्य चिकित्सा विभाग वर्ष 2013 से नवजात शिशुओं एवं बच्चों में मूत्ररोग संबंधी समस्याओं के लिए सेवाएं प्रदान कर रहा है। अब तक हज़ारों बच्चों को विशिष्ट एवं चौबीसों घंटे उपलब्ध सेवाओं से लाभ मिला है।

विभाग में विशेषीकृत पीडियाट्रिक सर्जिकल आईसीयू एवं नियोनेटल सर्जिकल आईसीयू की सुविधाएं उपलब्ध हैं। एम्स जोधपुर में समर्पित बाल नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. अलीज़ा मित्तल की सेवाएं भी उपलब्ध हैं।

रोबोटिक सर्जरी की सुविधा से पीयूजे ऑब्स्ट्रक्शन एवं वेसिकोयूरेट्रल रिफ्लक्स जैसी बीमारियों में उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त हो रहे हैं। अब तक 50 से अधिक रोबोटिक पायलोप्लास्टी एवं 250 से अधिक लैप्रोस्कोपिक पायलोप्लास्टी सफलतापूर्वक की जा चुकी हैं, जिससे बच्चों को पारंपरिक बड़े चीरे वाली सर्जरी से बचाया जा सका है।

एक वर्ष से कम आयु के बच्चों का उपचार पूर्णत: नि:शुल्क है, जबकि अन्य आयु वर्ग के बच्चों को प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना एवं मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना, राजस्थान सरकार के अंतर्गत नि:शुल्क उपचार प्रदान किया जाता है।

हिन्दुस्थान समाचार / सतीश