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आयुर्वेद विश्वविद्यालय : आयुर्वेद की पराशल्य विधा ‘विद्धकर्म’ को मिला नया आयाम

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आयुर्वेद विश्वविद्यालय : आयुर्वेद की पराशल्य विधा ‘विद्धकर्म’ को मिला नया आयाम


जोधपुर, 23 फरवरी (हि.स.)। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय में एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला एवं हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण कार्यक्रम विद्धकर्म का आयोजन किया गया। यह अकादमिक कार्यक्रम मानव संसाधन विकास केंद्र एवं स्नातकोत्तर शल्य तंत्र विभाग के संयुक्त तत्वावधान में कुलगुरु प्रोफेसर (वैद्य) गोविंद सहाय शुक्ल की अध्यक्षता एवं कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर के कुलगुरू प्रोफेसर वीएस जैतावत के मुख्य आतिथ्य में हुआ।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं धन्वंतरि वंदना के साथ हुआ। इस अवसर पर पुणे के प्रख्यात आयुर्वेदाचार्य एवं विद्धकर्म विशेषज्ञ डॉ. अमोल उत्तम बंसोड़े मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। कुलगुरु प्रोफेसर (वैद्य) गोविंद सहाय शुक्ल ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि आयुर्वेद की पारंपरिक पराशल्य विधाओं का वैज्ञानिक पुनसर््थापन समय की आवश्यकता है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर जैतावत ने कहा कि आयुर्वेद एवं कृषि विश्वविद्यालय साथ मिलकर के आमजन की स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करेंगे। मुख्य वक्ता डॉ. अमोल उत्तम बंसोड़े ने अपने विस्तृत व्याख्यान में विद्धकर्म की मूल अवधारणा, शास्त्रीय संदर्भ, प्रक्रिया-विधि एवं वैज्ञानिक आधार पर प्रकाश डाला। उन्होंने रोगी चयन, संकेत–प्रतिषेध एवं सुरक्षा मानकों के महत्व को रेखांकित किया। कार्यशाला का प्रमुख आकर्षण लाइव डेमो एवं हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण सत्र रहा, जिसमें प्रतिभागियों को बिंदु चयन, सुई प्रवेश की तकनीक, गहराई नियंत्रण एवं पश्चात् देखभाल की व्यावहारिक जानकारी दी गई।

स्नातकोत्तर विद्यार्थियों, संकाय सदस्यों एवं चिकित्सकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए विशेषज्ञ मार्गदर्शन में प्रत्यक्ष प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस अवसर पर उप प्राचार्य प्रोफेसर ए नीलिमा, शल्य तंत्र विभागाध्यक्ष प्रो. महेंद्र कुमार शर्मा, बोर्ड ऑफ स्टडीज के अध्यक्ष प्रो. गोविंद प्रसाद गुप्ता एवं परीक्षा नियंत्रक प्रोफेसर राजाराम अग्रवाल, डॉ राकेश कुमार शर्मा, प्रोफेसर दिनेश शर्मा सहित संकाय सदस्य, छात्र उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / सतीश