राजस्थान के 19 मेडिकल कॉलेजों और 58 जिला अस्पतालों में अक्टूबर में शून्य मातृ मृत्यु
जयपुर, 22 अक्टूबर (हि.स.)। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि प्रदेश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के सुदृढ़ीकरण के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। प्रसव पूर्व देखभाल, उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं (एचआरपी) की समय पर पहचान एवं प्रबंधन, नियमित मॉनिटरिंग तथा गुणवत्तापूर्ण प्रसव सेवाओं की उपलब्धता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। समीक्षा बैठक में प्राप्त जानकारी के अनुसार, अक्टूबर माह में 19 मेडिकल कॉलेजों एवं 58 जिला अस्पतालों में शून्य मातृ मृत्यु दर्ज होना सकारात्मक उपलब्धि है।
वी. श्रीनिवास ने गुरुवार को स्वास्थ्य भवन में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित समीक्षा बैठक में प्रसव पूर्व देखभाल सेवाओं, एचआरपी की पहचान एवं प्रबंधन, मातृ मृत्यु, मॉड्यूलर ऑपरेशन थियेटर, दवाओं एवं सर्जिकल आइटम्स की उपलब्धता तथा रेफरल परिवहन सेवाओं की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने मेडिकल कॉलेजों के अधीक्षकों, गायनी विभागाध्यक्षों, संयुक्त निदेशकों एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों से चर्चा कर फीडबैक लिया और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि गर्भवती महिलाओं को समय पर प्रसव पूर्व जांच (एएनसी) सेवाएं उपलब्ध कराना तथा उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान कर उनका उचित उपचार एवं फॉलोअप सुनिश्चित करना प्राथमिकता है। अक्टूबर माह में 11,928 एएनसी पंजीकरण दर्ज किए गए तथा 6,175 उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को एएनसी कवरेज प्रदान किया गया। उन्होंने सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को माह में दो बार समीक्षा बैठक आयोजित कर एचआरपी की पहचान, प्रबंधन एवं फॉलोअप की नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में मॉड्यूलर ऑपरेशन थियेटर (ओटी) के निर्माण तथा पुराने ऑपरेशन थियेटर्स को मॉड्यूलर ओटी में अपग्रेड करने के कार्यों की समीक्षा की। समीक्षा के अनुसार, वर्ष 2026-27 में प्रदेश के 35 मेडिकल कॉलेजों में मॉड्यूलर ओटी का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने नए मॉड्यूलर ओटी के निर्माण एवं पुराने ओटी के अपग्रेडेशन के लिए प्रस्ताव तैयार कर केंद्र सरकार को भेजने के निर्देश भी दिए।
मुख्य सचिव ने मेडिकल कॉलेजों एवं अन्य अस्पतालों में दवाओं और सर्जिकल आइटम्स की उपलब्धता की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि मरीजों को उपचार के दौरान किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। सभी अस्पतालों में आवश्यक दवाओं एवं सर्जिकल आइटम्स की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
मुख्य सचिव ने गर्भवती महिलाओं एवं अन्य जरूरतमंद मरीजों के लिए संचालित 104 जननी एक्सप्रेस तथा आपातकालीन एम्बुलेंस सेवा 108 की उपलब्धता की समीक्षा की। 19 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इन सेवाओं के माध्यम से कुल 39,436 ट्रिप दर्ज किए गए। उन्होंने निर्देश दिए कि जरूरतमंद मरीजों को समय पर रेफरल परिवहन सुविधा उपलब्ध कराई जाए, ताकि उन्हें आवश्यक उपचार के लिए उचित स्वास्थ्य संस्थान तक पहुंचाने में देरी न हो।
प्रदेश में सरकारी चिकित्सा संस्थाओं प्रसव सखियों की संख्या 1,318 है। प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य श्रीमती गायत्री राठौड़ ने मेडिकल कॉलेजों के विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा आसपास के डिलीवरी पॉइंट्स पर कार्यरत चिकित्सकों एवं स्टाफ की मेंटरिंग लगातार जारी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रसव एवं जांच सेवाओं के उचित दस्तावेजीकरण तथा स्वास्थ्यकर्मियों के कौशल उन्नयन के लिए भी आवश्यक प्रयास करने पर बल दिया।
बैठक में मिशन निदेशक एनएचएम डॉ. जोगाराम, प्रबंध निदेशक आरएमएससीएल पुखराज सैन, आयुक्त चिकित्सा शिक्षा बाबूलाल गोयल, आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण अविचल चतुर्वेदी, निदेशक जनस्वास्थ्य डॉ. रवि प्रकाश शर्मा, अतिरिक्त मिशन निदेशक एनएचएम डॉ. टी. शुभमंगला, निदेशक आरसीएच डॉ. मधु रतेश्वर, मुख्य अभियंता सिविल अक्षय कुमार जैन सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / पारीक

