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वीएलटीडी के विरोध में दूसरे दिन भी थमे रहे ट्रकों के पहिए

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वीएलटीडी के विरोध में दूसरे दिन भी थमे रहे ट्रकों के पहिए


जयपुर, 14 जुलाई (हि.स.)। व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (वीएलटीडी), परमिट व्यवस्था और ई-डिटेक्शन चालान के विरोध में प्रदेशभर के ट्रांसपोर्टर्स की अनिश्चितकालीन हड़ताल मंगलवार को दूसरे दिन भी जारी रही। राजधानी के हरमाड़ा स्थित न्यू ट्रांसपोर्ट नगर में ट्रकों के पहिए पूरी तरह थमे रहे। ट्रांसपोर्ट नगर और 14 नंबर पुलिया के आगे दिल्ली हाईवे पर बड़ी संख्या में ट्रक खड़े रहे, जिससे माल की लोडिंग-अनलोडिंग बंद रही और परिवहन कारोबार लगभग ठप हो गया। वहीं आंदोलन के बीच परिवहन विभाग ने वीएलटीडी लगाने की व्यवस्था में बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है।

रविवार रात 12 बजे से शुरू हुई प्रदेशव्यापी हड़ताल के समर्थन में हरमाड़ा के ट्रांसपोर्टर्स सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते रहे। ट्रांसपोर्ट कारोबारियों ने स्पष्ट कहा कि जब तक उनकी जायज मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक हड़ताल समाप्त नहीं होगी।

जयपुर ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर्स एसोसिएशन के संयुक्त सचिव गुलशन नागपाल ने कहा कि हड़ताल मजबूरी में करनी पड़ी है। ट्रांसपोर्टर्स को वीएलटीडी लगाने से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इसे लागू करने के लिए पर्याप्त समय और आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए। उनका कहना है कि सरकार ने नियम तो लागू कर दिए, लेकिन अधिकृत डिवाइस, इंस्टॉलेशन सेंटर और तकनीकी सुविधाएं पर्याप्त संख्या में उपलब्ध नहीं कराई गईं, जिससे ट्रक मालिकों और परिवहन कारोबारियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

ट्रांसपोर्टर्स ने परमिट व्यवस्था और ई-डिटेक्शन चालान को लेकर भी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि बिना पर्याप्त तैयारी के लागू किए गए नियमों से परिवहन व्यवसाय पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ा है। कारोबारियों का कहना है कि सरकार पहले आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करे और उसके बाद ही नियमों को सख्ती से लागू करे। उनका कहना है, हड़ताल हमारा शौक नहीं, बल्कि आखिरी विकल्प है। सम्मानजनक समाधान होने तक ट्रकों के पहिए नहीं घूमेंगे।

हड़ताल के कारण दूसरे दिन भी हरमाड़ा ट्रांसपोर्ट नगर में सन्नाटा पसरा रहा। माल परिवहन प्रभावित होने से व्यापारियों ने चिंता जताई कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति, उद्योगों के लिए कच्चे माल और बाजार की सप्लाई व्यवस्था पर व्यापक असर पड़ सकता है।

इधर आंदोलन के बीच परिवहन विभाग ने वीएलटीडी लगाने की प्रक्रिया में बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है। विभाग ने नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का मसौदा वित्त विभाग को भेज दिया है। प्रस्ताव के अनुसार अब केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से अधिकृत 178 कंपनियां राजस्थान में वीएलटीडी डिवाइस लगा सकेंगी, जबकि वर्तमान में केवल 17 कंपनियां यह कार्य कर रही हैं।

नई व्यवस्था के तहत कंपनियों को प्रदेश में पंजीयन कराना होगा। इसके लिए एक लाख रुपए का नॉन-रिफंडेबल पंजीयन शुल्क और प्रत्येक डिवाइस पर एक हजार रुपए प्रोसेसिंग फीस देनी होगी। साथ ही राजस्थान में कार्यालय अथवा फिटमेंट सेंटर स्थापित करना अनिवार्य होगा। खराब सेवा या शिकायत मिलने पर कंपनी का पंजीयन निरस्त किया जा सकेगा तथा पूरी व्यवस्था की निगरानी के लिए एक नोडल अधिकारी भी नियुक्त किया जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश