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गौशाला में विवाह, गायों को छप्पन भोग—सांवलियाजी में अनोखी शादी बनी मिसाल

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गौशाला में विवाह, गायों को छप्पन भोग—सांवलियाजी में अनोखी शादी बनी मिसाल


चित्तौड़गढ़, 20 अप्रैल (हि.स.)। आज के दौर में जहां शादियां भव्य होटल, रिसॉर्ट और डेस्टिनेशन वेडिंग के रूप में आयोजित की जा रही हैं, वहीं सांवलियाजी कस्बे में एक परिवार ने परंपरा, आस्था और सामाजिक संदेश का अनूठा उदाहरण पेश किया है। यहां श्री सांवलियाजी मंदिर मंडल के कर्मचारी राजेंद्र शर्मा ने अपनी पुत्री आयुषी का विवाह गौशाला की पवित्र भूमि पर संपन्न कर एक नई सोच को जन्म दिया है।

जानकारी के अनुसार, चिकारड़ा कस्बे में स्थित श्री महावीर गौशाला परिसर इस विशेष विवाह का साक्षी बना। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूरे विधि-विधान से आयुषी के मंगल फेरे गौशाला में ही संपन्न करवाए गए। इस दौरान बड़ी संख्या में परिजन, रिश्तेदार, इष्ट मित्र और स्थानीय लोग उपस्थित रहे, जिन्होंने इस अनूठे आयोजन को करीब से देखा और सराहा। विवाह समारोह की सबसे खास बात रही गौशाला की गायों के प्रति विशेष श्रद्धा और सेवा भाव। विवाह के अवसर पर गौशाला में मौजूद गायों को विधिवत छप्पन भोग अर्पित किया गया। गायों की पूजा-अर्चना कर उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई। जैसे ही यह आयोजन शुरू हुआ, पूरे परिसर में “गौ माता की जय” और “श्री सांवलिया सेठ” के जयकारों से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। बालोटिया परिवार के सदस्यों का कहना है कि इस विवाह के पीछे केवल एक रस्म निभाना उद्देश्य नहीं था, बल्कि समाज को एक सकारात्मक संदेश देना भी था कि जीवन के सबसे महत्वपूर्ण अवसरों पर भी हम धर्म, संस्कृति और सेवा भाव को प्राथमिकता दे सकते हैं। उन्होंने बताया कि गौशाला में विवाह करवाने से जहां एक ओर पुण्य लाभ की भावना जुड़ी है, वहीं दूसरी ओर गौ सेवा के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी प्रयास किया गया है। इस अनूठे आयोजन के पीछे धार्मिक प्रेरणा का भी विशेष महत्व रहा। परिवार का कहना है कि धीरेंद्र शास्त्री के विचारों और मार्गदर्शन से प्रेरित होकर उन्होंने यह निर्णय लिया। परिवार का उनसे संपर्क भी रहा है और पूर्व में उन्हें निमंत्रण देकर श्री सांवलिया सेठ के दर्शन के लिए भी आमंत्रित किया गया था। सोमवार दोपहर को संपन्न हुई इस शादी ने पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना दिया है। स्थानीय लोगों के साथ-साथ आसपास के गांवों में भी इस पहल की खूब सराहना हो रही है। कई लोग इसे परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन का बेहतरीन उदाहरण मान रहे हैं, जहां भव्यता के बजाय आस्था और संस्कारों को प्राथमिकता दी गई।

समाज के लिए यह विवाह एक प्रेरणा बनकर सामने आया है कि यदि सोच सकारात्मक हो तो हर आयोजन को एक सामाजिक संदेश के साथ जोड़ा जा सकता है। गौशाला में संपन्न यह विवाह न केवल एक पारिवारिक आयोजन रहा, बल्कि यह आस्था, सेवा और संस्कृति का जीवंत प्रतीक बन गया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / अखिल