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केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में गहराया जल संकट, सैकड़ों मछलियों की मौत, पक्षियों का पलायन शुरू

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केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में गहराया जल संकट, सैकड़ों मछलियों की मौत, पक्षियों का पलायन शुरू


भरतपुर, 30 जुलाई (हि.स.)। विश्व प्रसिद्ध केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (घना पक्षी विहार) इन दिनों भीषण जल संकट से जूझ रहा है। पांचना बांध से पानी नहीं मिलने और इस वर्ष सामान्य से कम बारिश होने के कारण उद्यान के अधिकांश वेटलैंड और तालाब सूखने की कगार पर पहुंच गए हैं। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि सैकड़ों मछलियां दम तोड़ चुकी हैं, कछुए पानी के अभाव में तड़प रहे हैं और बड़ी संख्या में पक्षी दूसरे वेटलैंड क्षेत्रों की ओर पलायन करने लगे हैं।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान की जीवनरेखा माने जाने वाले पांचना बांध से इस बार अब तक पानी नहीं छोड़ा गया है। बांध में जलस्तर कम होने के कारण पानी उपलब्ध नहीं कराया जा सका। सामान्यतः पांचना बांध का पानी पहले अजान बांध में पहुंचता है और वहां से घना पक्षी विहार के वेटलैंड में छोड़ा जाता है, जिससे पूरे उद्यान की पारिस्थितिकी संतुलित रहती है।

उद्यान के उप वन संरक्षक (डीएफओ) चेतन कुमार ने बताया कि पानी की लगातार कमी के कारण घना के अधिकांश तालाब और वेटलैंड लगभग खाली हो चुके हैं। गर्मी के दौरान जलस्तर लगातार गिरने से सैकड़ों मछलियों की मौत हो चुकी है।

जिन क्षेत्रों में पानी तेजी से कम हो रहा था, वहां से मछलियों को बचाकर डी ब्लॉक के अपेक्षाकृत गहरे जलाशय में स्थानांतरित किया गया, लेकिन जल संकट लगातार बढ़ने से अब अन्य वन्य जीव और पक्षी भी प्रभावित हो रहे हैं।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने आपात व्यवस्था के तहत धौलपुर स्थित चंबल नदी से पानी मंगाना शुरू किया है। इस सीजन में अब तक चार बार चंबल का पानी उद्यान तक पहुंचाया जा चुका है। इसके अलावा कई संवेदनशील क्षेत्रों में टैंकरों से पानी डलवाया जा रहा है तथा सोलर ऊर्जा से संचालित मोटरों को 24 घंटे चलाकर उपलब्ध पानी को विभिन्न जलाशयों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

हालांकि वन विभाग का कहना है कि यह व्यवस्था केवल अस्थायी राहत दे सकती है। अधिकारियों के अनुसार चंबल का पानी स्वच्छ तो है, लेकिन केवलादेव की प्राकृतिक पारिस्थितिकी के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता। पांचना बांध के पानी के साथ आने वाले जलीय पौधे, मछलियां, बीज और अन्य प्राकृतिक तत्व पक्षियों तथा वन्य जीवों के भोजन और उनके प्राकृतिक आवास का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं, जबकि चंबल के पानी में ये तत्व नहीं मिलते।

जल संकट का असर अब उद्यान की जैव विविधता पर भी दिखाई देने लगा है। पानी की तलाश में अनेक प्रवासी और स्थानीय पक्षी दूसरे वेटलैंड क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं।

वहीं कछुओं सहित अन्य जलीय जीवों का अस्तित्व भी खतरे में पड़ता जा रहा है। वन विभाग का मानना है कि यदि जल्द ही पांचना बांध से पानी नहीं छोड़ा गया तो आने वाले दिनों में वन्य जीवों और पक्षियों की मौत का आंकड़ा बढ़ सकता है।

वन विभाग ने संबंधित विभागों से जल्द पानी उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान की समृद्ध जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर नुकसान से बचाया जा सके।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित