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जनता के प्यार से बड़ा कोई पद नहीं-वसुन्धरा राजे

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जनता के प्यार से बड़ा कोई पद नहीं-वसुन्धरा राजे


जयपुर, 11 अप्रैल (हि.स.)। पूर्व मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे ने हाल ही झालावाड़ जिले के कामखेड़ा बालाजी प्रांगण में दिए गए अपने बयान को लेकर उठे विवाद पर सफाई देते हुए कहा कि उनके संवाद को गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है। उन्होंने इसे एक “षड्यंत्र” करार दिया।

राजे ने साफ किया कि उन्होंने कभी किसी पद की इच्छा व्यक्त नहीं की। उन्होंने दोहराया कि उनके लिए जनता का प्यार ही सबसे बड़ा सम्मान है। उनका कहना है कि उनके लिए जनता के प्यार से बड़ा कोई पद नहीं है और यह उन्हें प्रदेश में भरपूर मिल रहा है। उन्होंने बताया कि उक्त संवाद सांसद दुष्यंत सिंह की पदयात्रा के दौरान स्थानीय लोगों से बातचीत के दौरान हुआ था, जिसे अब गलत तरीके से प्रचारित किया जा रहा है।

राजे ने कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र में बन रही फोरलेन सड़क के बाइपास को लेकर स्थानीय लोग एलाइनमेंट बदलवाने की मांग कर रहे थे। इस संदर्भ में उन्होंने धौलपुर का उदाहरण देते हुए बताया कि उनके अपने घर के सामने से राष्ट्रीय राजमार्ग निकला था और उन्हें भी अपनी बाउंड्री पीछे करनी पड़ी थी। उन्होंने कहा कि जब मैं अपने घर को नियमों के कारण नहीं बचा सकी, तो दूसरों के लिए नियमों से हटकर कैसे लड़ सकती हूँ?

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने झालावाड़ को हमेशा राजनीतिक क्षेत्र नहीं, बल्कि अपना परिवार माना है। वहां के लोगों से उनका संवाद हमेशा आत्मीय और अनौपचारिक रहता है। ऐसे संवाद को गलत तरीके से पेश करना दुर्भावनापूर्ण है। राजे ने अंत में कहा कि जनता के साथ उनके संबंध हमेशा विश्वास और स्नेह पर आधारित रहे हैं, और वे आगे भी इसी भावना के साथ काम करती रहेंगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित