राजस्थान आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा विश्वविद्यालय अजमेर विधेयक 2026 ध्वनिमत से पारित
जयपुर, 09 मार्च (हि.स.)। विधानसभा में सोमवार को राजस्थान आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा विश्वविद्यालय अजमेर विधेयक 2026 ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि अजमेर को 38 वर्ष बाद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में दूसरा राजकीय विश्वविद्यालय मिला है और इसकी स्थापना से उनका एक सपना साकार हुआ है।
सदन में विधेयक पर चर्चा के बाद उपमुख्यमंत्री एवं आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा मंत्री प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि राज्य सरकार पारम्परिक चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देने और स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि अजमेर में इस विश्वविद्यालय की स्थापना एक ऐतिहासिक पहल है, जिससे “स्वस्थ राजस्थान से समृद्ध राजस्थान” के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि इस विश्वविद्यालय की घोषणा वर्ष 2024-25 के बजट में की गई थी। इसकी स्थापना से उच्च शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में नई संभावनाएं विकसित होंगी और यह विद्यार्थियों तथा शिक्षाविदों के लिए उत्कृष्ट अनुसंधान का केंद्र बनेगा। विश्वविद्यालय के माध्यम से आयुर्वेद, यूनानी, योग और होम्योपैथी जैसी भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा मिलेगा और इनसे जुड़े नवाचारों को भी प्रोत्साहन दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि अधिनियम के अनुसार विश्वविद्यालय में प्रबंध बोर्ड, विद्या परिषद, संकाय बोर्ड, अध्ययन, वित्त एवं लेखा समिति, अनुसंधान, खेल एवं छात्र कल्याण तथा नवाचार बोर्ड का गठन किया जाएगा। कुलाधिपति द्वारा कुलगुरु की नियुक्ति के बाद प्रबंध बोर्ड का गठन होगा।
विश्वविद्यालय के संकाय बोर्ड के अंतर्गत आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध तथा होम्योपैथी सहित राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप अन्य विषयों में भी अध्ययन और अनुसंधान की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए एमडीएस यूनिवर्सिटी अजमेर की भूमि में से 11.93 हेक्टेयर भूमि आवंटित की गई है।
सरकार का मानना है कि इस विश्वविद्यालय की स्थापना से अजमेर सहित पूरे प्रदेश में पारम्परिक चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा मिलेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित

