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ठेके की ई बसों में सफर करेंगे जयपुरवासी

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ठेके की ई बसों में सफर करेंगे जयपुरवासी


जयपुर, 26 फ़रवरी (हि.स.)। गुलाबी नगर के बाशिंदे अब ठेके की इलेक्ट्रिक बस में सफर करेंगे। चंडीगढ़ के बाद अब राजधानी में पहली बार गुलाबी इलेक्ट्रिक बस दौड़ती नजर आएंगी। जेसीटीएसएल ने गुरुवार को ट्रायल के तौर पर तीन बसों की शुरूआत की है। ये 9 और 12 मीटर लम्बाई की आधुनिक संसाधनों से लैस बसें है। जयपुर में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से शहर में वायु प्रदूषण कम होगा और डीजल पर होने वाला खर्च भी घटेगा। जबकि इन बसों से ध्वनि प्रदूषण भी कम होगा। ये बसें एक निजी कम्पनी चलाएगी, सरकार इस कम्पनी को प्रति किलोमीटर के हिसाब से भुगतान करेगी। जयपुर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड ने गुरुवार को 3 दिवसीय ट्रायल शुरू किया है। आधुनिक ई-बसों की तकनीकी क्षमता, बैटरी परफॉर्मेंस और यात्री सुविधाओं की जांच की जा रही है। ट्रायल सफल रहने पर जून तक 300 से ज्यादा नई इलेक्ट्रिक बसें शामिल हो सकती है। अग्रवाल फार्म से सुबह 11 बजे पहली ई-बस रवाना हुई। बसों को शहर के प्रमुख रूटों पर चलाकर उनकी लोड क्षमता, चार्जिंग क्षमता और संचालन की व्यवहारिक स्थिति को जांचा जा रहा है। जेसीटीएसएल के प्रबंध निदेशक नारायण सिंह ने बताया कि केंद्र सरकार की ई-बस सेवा योजना के तहत राजस्थान को 1150 इलेक्ट्रिक बसें मिलनी हैं। इनमें से पहले चरण में 675 बसें आवंटित की गई हैं। जयपुर में पहले चरण में 150 बसें चलाई जाएंगी। इसके बाद 168 नई बसें और शामिल की जाएंगी। गुरुवार को 2 इलेक्ट्रिक बसों का ट्रायल रन शुरू हुआ है। शहर में बगराना और टोडी डिपो पर इन बसों के संचालन की तैयारी की गई है। शुरुआती चरण में दोनों डिपो को 75-75 बसें दी जाएंगी। जयपुर में संचालित होने वाली नई इलेक्ट्रिक बसों में पैसेंजर्स की सुविधा और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया है। बसों में जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम, सीसीटीवी कैमरे, पैनिक बटन, ऑटोमेटिक दरवाजे और दिव्यांगजनों के लिए विशेष रैंप की सुविधा होगी। साथ ही बसों का सफर आरामदायक और शोर रहित होगा।

जयपुर में ई बसों के लिए दो जगह चार्जिंग डिपो बनाए जा रहे है। एक डिपो बगराना तो दूसरा टोडी में है। फिलहाल दोनों ही डिपो का काम अधूरा पड़ा है। बगराना के डिपो का काम मार्च में पूरा होने की संभावना है। टोडी के डिपो बनाने और सुविधाओं में कई अड़चन आ रही है।

जयपुर में ई बस सेवा के संचालन को लेकर केंद्र से सहायता राशि मिलेगी, बाकी राशि राज्य सरकार को वहन करनी पड़ेगी। केंद्र सरकार 9 मीटर की बस के लिए 22 तो वहीं 12 मीटर की बस के लिए 24 रुपये प्रति किलोमीटर के हिसाब से भुगतान करेगा। जेसीटीएसएल के प्रबंध निदेशक नारायण सिंह ने बसों का संचालन जीसीसी ग्रॉस कॉस्ट कांटेक्ट मॉडल पर किया जाएगा। इसके तहत बसों की खरीद, संचालन और मेंटीनेंस निजी कम्पनी करेगी, जबकि सरकार इसे प्रति किलोमीटर के हिसाब से भुगतान करेगी। बस के संचालन में करीब 70 रुपये प्रति किमी की लागत आ रही है। फिलहाल यह तय नहीं है कि बस संचालक को प्रतिकिलोमीटर पर कितने रुपये दिए जाएंगे। बसों में जनता से लिए जाने वाला किराया जेसीटीसीएल ही तय करेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश