home page

ट्रेड लाइसेंस और फायर एनओसी नवीनीकरण की प्रक्रिया से कारोबारी परेशान

 | 
ट्रेड लाइसेंस और फायर एनओसी नवीनीकरण की प्रक्रिया से कारोबारी परेशान


जयपुर, 12 जून (हि.स.)। राज्य सरकार जहां विभिन्न सेवाओं को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाने पर जोर दे रही है, वहीं नगर निगम की ट्रेड लाइसेंस और फायर एनओसी नवीनीकरण प्रक्रिया कारोबारियों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। होटल, रेस्टोरेंट और अन्य वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के संचालकों का आरोप है कि हर बार नवीनीकरण के लिए नया आवेदन करना पड़ता है, जिससे अनावश्यक देरी और परेशानी होती है।

कारोबारियों का कहना है कि ट्रेड लाइसेंस और फायर एनओसी के नवीनीकरण के लिए अधिकारियों के कई महीनों तक चक्कर लगाने पड़ते हैं। उनका तर्क है कि जिन संस्थानों को पहले से लाइसेंस या एनओसी जारी हो चुकी है, उनके लिए केवल ऑनलाइन नवीनीकरण की व्यवस्था होनी चाहिए। विभाग को निरीक्षण के बाद शुल्क जमा कराने की अनुमति देनी चाहिए तथा यदि कोई कमी हो तो उसे दूर कराने के बाद नवीनीकरण किया जाना चाहिए।

नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि हाल ही में ट्रेड लाइसेंस शुल्क में बढ़ोतरी के बाद पुराने लाइसेंसों के आधार पर ऑनलाइन शुल्क की सही गणना नहीं हो पा रही है। इसके कारण नवीनीकरण प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। हालांकि कारोबारियों का कहना है कि निगम अपने उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर शुल्क निर्धारण कर ऑनलाइन व्यवस्था को अपडेट कर सकता है। राज्य सरकार ने वर्ष 2017 के बाद होटल, रेस्टोरेंट, जिम, ब्यूटी पार्लर, बेकरी, मिठाई की दुकान तथा अन्य व्यवसायों के लिए ट्रेड लाइसेंस शुल्क में वृद्धि की है। कुछ श्रेणियों में शुल्क पांच गुना तक बढ़ाया गया है।

नई दरों के अनुसार 50 कमरों तक के होटलों के लिए लाइसेंस शुल्क 15 हजार से 25 हजार रुपये तक निर्धारित किया गया है। 51 से 100 कमरों तक के होटलों के लिए यह शुल्क 30 हजार से 50 हजार रुपये, 100 से 150 कमरों तक के होटलों के लिए 70 हजार से एक लाख रुपये तथा 150 से अधिक कमरों वाले होटलों के लिए एक लाख से डेढ़ लाख रुपये तक निर्धारित किया गया है। इसी प्रकार गैसयुक्त शीतल पेय विक्रेताओं, जिम, ब्यूटी पार्लर और मोबाइल फास्ट फूड व्यवसायों की लाइसेंस फीस में भी बढ़ोतरी की गई है। जिम के लिए नगर निगम क्षेत्र में शुल्क अब पांच हजार रुपये कर दिया गया है, जबकि ब्यूटी पार्लर के लिए यह दो हजार रुपये निर्धारित किया गया है।

जयपुर नगर निगम आयुक्त ओम कसेरा ने कहा कि मामले की जानकारी ली जाएगी। यदि नियमों या प्रक्रिया में कोई खामी पाई जाती है तो उसे दूर कर कारोबारियों और संस्थान संचालकों को राहत प्रदान की जाएगी।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश