home page

जेडीए-निगम में उपजा लैंड कन्वर्जन को लेकर विरोधाभास

 | 
जेडीए-निगम में उपजा लैंड कन्वर्जन को लेकर विरोधाभास


जयपुर, 02 नवंबर (हि.स.)। जयपुर। लैंड कन्वर्जन को लेकर लगातार जेडीए-निगम सहित अन्य निकायों के विरोधाभास बना हुआ था। इस विरोधाभास को दूर करने के लिए नगरीय विकास, आवासन एवं स्वायत्त शासन विभाग ने स्पष्टीकरण जारी किया है। जारी आदेशानुसार नगर निगम या नगर निकायों की आबादी भूमि को छोडक़र बाकी भूमि का कन्वर्जन जेडीए या नगर विकास न्यास द्वारा किया जाएगा।

राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर आवश्यकता अनुसार विकास प्राधिकरण, नगर विकास न्यास,स्थानीय निकायों के नगरीय क्षेत्र में विस्तार या नवीन विकास प्राधिकरण, नगर विकास न्यास,स्थानीय निकायों का गठन किया जाकर क्षेत्राधिकार का निर्धारण किया जाता है। प्राधिकरण, न्यास के क्षेत्राधिकार में पूर्व में स्थित एवं नवीन सम्मिलित नगर निगम,नगर परिषद,नगर पालिका क्षेत्रों के अन्तर्गत आने वाली भूमियों के प्रकरणों के निस्तारण के लिए कार्यक्षेत्र के संबंध में विरोधाभास की स्थिति रहती है।

राज्य सरकार द्वारा स्थानीय निकायों के कार्यक्षेत्र में प्रकरणों के निस्तारण के लिए पूर्व में 18 अगस्त 2022 एवं 12 जून 2025 में आदेश जारी किए गए है। जिनके संबंध में स्पष्ट किया जाता है कि प्राधिकरण, न्यास के क्षेत्राधिकार में सम्मिलित नगर निगम,नगर परिषद, नगर पालिका क्षेत्रों में निम्नानुसार कार्यवाही किया जाना अपेक्षित है।

विकास प्राधिकरण, न्यास से संबंधित नगर निगम, परिषद, पालिका को हस्तान्तरित कॉलोनियों एवं नगर निगम,परिषद,पालिका सीमा में स्थित आबादी भूमि को छोडक़र शेष भूमियों में धारा 90-ए के तहत कृषि से गैर कृषि प्रयोजनार्थ भूमि सम्परिवर्तन, ले-आउट प्लान अनुमोदन की कार्यवाही प्राधिकरण या न्यास द्वारा की जानी हो। उदाहरण स्वरूप जयपुर विकास प्राधिकरण के क्षेत्राधिकार में स्थित जयपुर नगर निगम सीमा तथा नगर विकास न्यास, सीकर के क्षेत्राधिकार में स्थित नगर परिषद सीकर सीमा में उपरोक्तानुसार कार्यवाही की जावेगी।

मास्टर प्लान अधिसूचित होने पर नगरीयकरण योग्य क्षेत्र में धारा 90-ए, ले-आउट प्लान अनुमोदन के लिए प्राप्त प्रकरणों में नगर परिषद्,पालिका के सक्षम अधिकारी द्वारा निष्पादन की कार्यवाही की जानी होगी। नगरीयकरण योग्य क्षेत्र से बाहर स्थित शेष नगरीय क्षेत्र में धारा 90-ए,ले-आउट प्लान अनुमोदन की कार्यवाही प्राधिकरण या न्यास द्वारा की जानी होगी। यदि मास्टर प्लान अधिसूचित नहीं है, उनमें नगर परिषद,पालिका सीमा में धारा 70-ए,ले-आउट प्लान अनुमोदन के लिए प्राप्त प्रकरणों में नगर परिषद, पालिका के सक्षम अधिकारी द्वारा निष्पादन की कार्यवाही की जानी होगी। भविष्य में प्राधिकरण या न्यास द्वारा ऐसी नगर परिषद या पालिका क्षेत्रों के विस्तार के लिए सुनियोजित विकास को दृष्टिगत नगरीयकरण योग्य क्षेत्र प्रस्तारित किए जाने पर उक्त कार्यवाही की जानी होगी।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश