टीबी मुक्त राजस्थान : 100 दिवसीय अभियान में 49,703 नए मरीजों की पहचान
जयपुर, 26 जुलाई (हि.स.)। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के टीबी मुक्त भारत संकल्प को साकार करने की दिशा में तेजी से कार्य कर रही है। राज्य सरकार की निरामय राजस्थान परिकल्पना के तहत क्षय रोग (टीबी) उन्मूलन को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए रोग की समय पर पहचान, निःशुल्क जांच, उपचार, पोषण सहायता और जनभागीदारी आधारित अभियान मिशन मोड में संचालित किए जा रहे हैं।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने बताया कि 24 मार्च से 5 जुलाई 2026 तक चलाए गए 100 दिवसीय विशेष टीबी मुक्त भारत अभियान के दौरान राजस्थान ने राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की। अभियान के तहत प्रदेशभर में 9,949 आयुष्मान आरोग्य शिविर आयोजित किए गए, जिनमें 35.86 लाख से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की गई। इस दौरान 31.91 लाख चेस्ट एक्स-रे और 2.31 लाख नॉट जांचें की गईं, जिनके आधार पर 49,703 नए टीबी मरीजों की पहचान हुई। इनमें 13,461 ऐसे मरीज भी शामिल रहे, जिनमें टीबी के स्पष्ट लक्षण नहीं थे, लेकिन सक्रिय जांच से समय रहते बीमारी का पता चल सका।
अभियान के दौरान 15.64 लाख संवेदनशील व्यक्तियों का चेस्ट एक्स-रे कराया गया, जबकि 28,473 मरीजों का डिफरेंशिएटेड टीबी केयर के तहत विस्तृत चिकित्सकीय आकलन किया गया। संक्रमण की रोकथाम के लिए 23,436 घरेलू संपर्कों को टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट (टीपीटी) प्रदान किया गया। सामाजिक सहभागिता को मजबूत बनाने के उद्देश्य से 2,795 नए निक्षय मित्र अभियान से जुड़े, जिनके सहयोग से 51,695 फूड बास्केट टीबी मरीजों तक पहुंचाई गईं।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि 100 दिवसीय अभियान की सफलता के बाद राज्य सरकार ने 14 जुलाई से विशेष सक्रिय क्षय रोग खोज (एक्टिव केस फाइंडिंग-एसीएफ) अभियान शुरू किया है, जिसे अब 7 अगस्त तक बढ़ा दिया गया है।
इस अभियान का उद्देश्य उन संभावित मरीजों की पहचान करना है, जो अब तक स्वास्थ्य प्रणाली की पहुंच से बाहर हैं।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया कि एसीएफ अभियान के तहत अब तक 28.91 लाख लोगों के घर-घर पहुंचकर स्क्रीनिंग की जा चुकी है। अभियान में 60 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों, मधुमेह और एचआईवी संक्रमित मरीजों, पूर्व टीबी रोगियों, कुपोषित व्यक्तियों, प्रवासी श्रमिकों, आदिवासी क्षेत्रों, खनन एवं निर्माण स्थलों पर कार्यरत श्रमिकों, जेलों तथा शहरी मलिन बस्तियों में रहने वाले लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है। जिन लोगों में टीबी के लक्षण मिल रहे हैं, उन्हें तत्काल चेस्ट एक्स-रे और नॉट जांच से जोड़कर निःशुल्क उपचार शुरू कराया जा रहा है।
100 दिवसीय अभियान के दौरान 7,997 विद्यालयों, 1,597 महाविद्यालयों, 38,970 मॉय भारत स्वयंसेवकों और 13,670 जनप्रतिनिधियों ने जागरूकता गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाई। इसी प्रभावी रणनीति और सामूहिक प्रयासों का परिणाम है कि प्रदेश में अब तक 6,574 ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त घोषित की जा चुकी हैं, जो राजस्थान को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित

