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हाई रिस्क गर्भवतियों के लिए रेफरल व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश

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हाई रिस्क गर्भवतियों के लिए रेफरल व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश


जयपुर, 01 अगस्त (हि.स.)। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने गर्भवती महिलाओं को समय पर गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने के लिए रेफरल परिवहन व्यवस्था को अधिक सुदृढ़ बनाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सुरक्षित प्रसव और जननी एक्सप्रेस सेवाओं के प्रभावी संचालन के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देशों के साथ परिपत्र जारी करने तथा उच्च जोखिम (हाई रिस्क) वाली गर्भवती महिलाओं को संभावित प्रसव तिथि से एक-दो दिन पहले ही उच्च स्तरीय स्वास्थ्य संस्थान में रेफर करने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव शनिवार को स्वास्थ्य भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्यों, अस्पताल अधीक्षकों, संयुक्त निदेशकों, पीएमओ, आरसीएचओ और सीएमएचओ के साथ सुरक्षित मातृत्व सेवाओं की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में उन्होंने गर्भवती महिलाओं में गंभीर एनीमिया के मामलों में कमी आने और उन्हें माइल्ड एनीमिया श्रेणी में लाने के प्रयासों पर संतोष व्यक्त किया।

बैठक के दौरान मातृ मृत्यु के विभिन्न कारणों की विस्तार से समीक्षा की गई।

भीलवाड़ा में हाल ही में हुई मातृ मृत्यु के मामले पर मुख्य सचिव ने शाहपुरा सीएचसी के स्त्री रोग विशेषज्ञ और एएनएम से सीधे संवाद कर घटनाक्रम की जानकारी ली तथा उपचार व्यवस्था और प्रोटोकॉल की समीक्षा की।

मुख्य सचिव ने 'प्रसव सखी' पहल के क्रियान्वयन की भी समीक्षा करते हुए गर्भवती महिलाओं को दी जा रही सहायता और सेवाओं का फीडबैक लिया। उन्होंने अलवर, भरतपुर और दौसा के अधिकारियों से हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की पहचान, उपचार तथा एएनएम द्वारा एनीमिया और हाईपरटेंशन के लक्षणों की निगरानी की जानकारी प्राप्त की। इस दौरान स्त्री रोग विशेषज्ञों ने संबंधित चिकित्सकों को उपचार प्रबंधन और प्रोटोकॉल के संबंध में आवश्यक मार्गदर्शन भी दिया।

उन्होंने निर्देश दिए कि हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं में एनीमिया और हाईपरटेंशन के उपचार एवं प्रबंधन के लिए जल्द ही मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की जाए, ताकि पूरे प्रदेश में एक समान उपचार प्रणाली लागू हो सके। साथ ही ब्यावर, चित्तौड़गढ़, बारां, झालावाड़ और सलूम्बर जिलों में एनीमिया तथा हाईपरटेंशन की स्क्रीनिंग और उपचार पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।

बैठक में सर्जिकल प्रोटोकॉल, आवश्यक दवाओं की उपलब्धता तथा 104 और 108 एम्बुलेंस सेवाओं की भी समीक्षा की गई।

मुख्य सचिव ने स्पष्ट कहा कि रक्त की कमी के कारण किसी भी गर्भवती महिला की मृत्यु नहीं होनी चाहिए। इसके लिए जरूरत वाले क्षेत्रों में विशेष रक्तदान शिविर आयोजित करने के निर्देश भी दिए।

बैठक में बीकानेर, अजमेर, जोधपुर, उदयपुर और कोटा मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्यों से हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं के प्रसव प्रबंधन, आईसीयू सुविधाओं और उपचार प्रोटोकॉल की जानकारी ली गई।

प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड़ ने 'प्रसव सखी' पहल, हाई रिस्क गर्भवतियों की सूचीबद्धता, गंभीर एनीमिया नियंत्रण के प्रयासों तथा उपचार प्रोटोकॉल के प्रभावी क्रियान्वयन की जानकारी प्रस्तुत की। बैठक में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, चिकित्सा शिक्षा विभाग, राजस्थान हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी तथा स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित