मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को और सुदृढ़ करने पर जोर, उप स्वास्थ्य केंद्रों को आशा सहयोगिनियों से जोड़ने के निर्देश
जयपुर, 28 अक्टूबर (हि.स.)। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने तथा आमजन को सुलभ एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
इसी क्रम में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने मातृ मृत्यु दर में कमी लाने को स्वास्थ्य क्षेत्र की प्रमुख चुनौती बताते हुए गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को समय पर आवश्यक चिकित्सा एवं देखभाल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं को आमजन तथा सभी जरूरतमंदों तक पहुंचाने पर जोर दिया।
श्रीनिवास बुधवार को शासन सचिवालय में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत राजस्थान स्टेट हेल्थ सोसायटी की 20वीं गवर्निंग बॉडी की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एवं प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (पीएम-अभिम) की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति तथा पिछली बैठक के निर्णयों की अनुपालना की समीक्षा की गई।
मुख्य सचिव ने 108 एम्बुलेंस एवं 104 जननी एक्सप्रेस सेवाओं की कार्यप्रणाली को और प्रभावी बनाने तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सा सेवाओं को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए। उन्होंने मा वाउचर योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और पात्र लाभार्थियों तक इसका लाभ पहुंचाने पर विशेष ध्यान देने को कहा।
श्रीनिवास ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के ऑपरेशन थिएटरों की क्रियाशीलता सुनिश्चित करने तथा अधिक रोगी भार वाले चिकित्सा संस्थानों के ऑपरेशन थिएटरों को मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटरों के रूप में उन्नत करने के निर्देश दिए। उन्होंने मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतर उपलब्धता को प्राथमिकता देने पर बल दिया।
मुख्य सचिव ने प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष ध्यान देते हुए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) की सेवाओं का उपयोग बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने विशेष रूप से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं उप जिला चिकित्सालयों (एसडीएच) में विशेषज्ञ ओपीडी, आईपीडी तथा शल्य चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता और ऑपरेशन थिएटरों का नियमित संचालन सुनिश्चित करने को कहा।
मुख्य सचिव ने उप स्वास्थ्य केंद्रों को आशा सहयोगिनियों से प्रभावी रूप से जोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि समुदाय और स्वास्थ्य संस्थानों के बीच बेहतर संपर्क से लोगों को आवश्यक जांच, उपचार एवं अन्य स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने में सहायता मिलेगी। उन्होंने टीबी मुक्त अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी जोर दिया। साथ ही, यूनिसेफ के सहयोग से जनजागरूकता अभियानों एवं आउटरीच गतिविधियों की योजना तैयार करने के निर्देश दिए, ताकि स्वास्थ्य कार्यक्रमों की पहुंच और समुदाय की भागीदारी बढ़ाई जा सके।
चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री ए. राठौड़ ने मातृ मृत्यु में कमी लाने के लिए विभाग की ओर से किए जा रहे विभिन्न प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने प्रसवपूर्व जांचों (एएनसी), उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं (एचआरपी) की पहचान एवं निगरानी तथा संबंधित गर्भवती महिलाओं को उनकी आवश्यकता के अनुरूप उपयुक्त चिकित्सा संस्थानों से जोड़ने की व्यवस्था के बारे में अवगत कराया। उन्होंने विभाग की ओर से किए जा रहे विभिन्न नवाचारों की भी जानकारी दी।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक डॉ. जोगाराम ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों की प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, टीबी उन्मूलन, आयुष्मान आरोग्य मंदिरों, निःशुल्क जांच सेवाओं तथा स्वास्थ्य अवसंरचना के विकास से संबंधित उपलब्धियां प्रस्तुत कीं।
उन्होंने बताया कि एसआरएस 2022–24 के अनुसार राजस्थान का मातृ मृत्यु अनुपात प्रति एक लाख जीवित जन्म पर 87 है। वित्तीय वर्ष 2026–27 में सितंबर तक 12 सप्ताह से पहले गर्भावस्था पंजीकरण 89.4 प्रतिशत तथा चार प्रसवपूर्व जांचों का कवरेज 91.79 प्रतिशत रहा। प्रदेश में 12,478 आयुष्मान आरोग्य मंदिर क्रियाशील हैं। टीबी मुक्त ग्राम पंचायतों की संख्या वर्ष 2025 में 6,547 रही।
एनएचएम के लिए वर्ष 2026–27 में लगभग 4,278 करोड़ रुपये के कुल संसाधन प्रावधान तथा पीएम-अभिम के अंतर्गत स्वास्थ्य संस्थानों के निर्माण एवं सुदृढ़ीकरण की प्रगति की भी जानकारी दी गई।
बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव जनजाति क्षेत्रीय विकास कुंजी लाल मीणा, अतिरिक्त मुख्य सचिव नगरीय विकास एवं आवासन आलोक गुप्ता, अतिरिक्त मुख्य सचिव सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता दिनेश कुमार, अतिरिक्त मुख्य सचिव स्कूल शिक्षा राजेश कुमार यादव, प्रमुख शासन सचिव जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी हेमंत कुमार गेरा, प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य तथा चिकित्सा शिक्षा गायत्री ए. राठौड़, प्रमुख शासन सचिव वित्त वैभव गालरिया तथा प्रमुख शासन सचिव आयुर्वेद एवं भारतीय चिकित्सा सुबीर कुमार सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजीव

