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कर्मचारियों की अनदेखी पर फूटा गुस्सा: पच्चीस सूत्री मांगों को लेकर प्रदेशव्यापी जागृति यात्रा शुरू

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कर्मचारियों की अनदेखी पर फूटा गुस्सा: पच्चीस सूत्री मांगों को लेकर प्रदेशव्यापी जागृति यात्रा शुरू


जयपुर, 08 जून (हि.स.)। राजस्थान सरकार स्वास्थ्य योजना (आरजीएचएस) की सुविधा बहाल करने, वेतन विसंगतियों को दूर करने सहित पच्चीस सूत्री मांगों को लेकर आंदोलनरत राज्य कर्मचारियों ने सोमवार से प्रदेशव्यापी जागृति यात्रा की शुरुआत कर दी। राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ (एकीकृत) के प्रदेशाध्यक्ष गजेंद्र सिंह राठौड़ के नेतृत्व में यह यात्रा जयपुर स्थित गवर्नमेंट हॉस्टल से रवाना हुई।

यात्रा को कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान यात्रा में शामिल कर्मचारियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया गया। जयपुर से रवाना हुई यात्रा बस्सी और कानोता होते हुए दौसा पहुंची, जहां स्थानीय कर्मचारियों ने यात्रा का स्वागत किया।

महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष गजेंद्र सिंह राठौड़ ने कहा कि यात्रा का उद्देश्य प्रदेशभर के कर्मचारियों को उनकी पच्चीस सूत्री मांगों के प्रति जागरूक करना और आगामी आंदोलन के लिए संगठित करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले ढाई वर्षों से राज्य कर्मचारी लगातार अपनी मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया जा रहा है। बजट घोषणाओं में कर्मचारियों के हितों से जुड़ी कई बातें कही जाती हैं, लेकिन उन्हें लागू नहीं किया जाता।

उन्होंने बताया कि कर्मचारियों ने पहले सांकेतिक प्रदर्शन, काली पट्टी बांधकर विरोध और सात दिन तक प्रतिदिन एक घंटे का कार्य बहिष्कार जैसे कार्यक्रम भी किए, लेकिन सरकार की ओर से कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई। इसके बाद कर्मचारियों ने प्रदेशव्यापी जागृति यात्रा निकालने का निर्णय लिया।

महासंघ के अनुसार जागृति यात्रा 8 जून से 25 जून तक प्रदेश के विभिन्न जिलों में पहुंचेगी। यात्रा के दौरान कर्मचारियों को उनकी मांगों और आगामी आंदोलन की रणनीति से अवगत कराया जाएगा।

राठौड़ ने बताया कि यात्रा समाप्त होने के बाद जुलाई में राजधानी जयपुर में प्रदेश स्तरीय कर्मचारी महासम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्रदेशभर के कर्मचारी भाग लेंगे। सम्मेलन में आंदोलन के अगले चरण और सरकार के खिलाफ आर-पार की रणनीति की घोषणा की जाएगी।

उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की जायज मांगों की लगातार अनदेखी से उनमें रोष बढ़ रहा है और यदि सरकार ने शीघ्र सकारात्मक कदम नहीं उठाए तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश