कोटा मंडल के 1890 सरकारी कंप्यूटरों पर लगेगा अत्याधुनिक साइबर सुरक्षा सॉफ्टवेयर
काेटा, 28 अप्रैल (हि.स.)। अब जब आप रेलवे काउंटर से टिकट खरीदें, ऑनलाइन आरक्षण कराएं या ट्रेन की जानकारी लें — तो यह जानकर आपको संतोष होगा कि आपका डेटा और आपकी बुकिंग एक मज़बूत साइबर सुरक्षा कवच के भीतर सुरक्षित है। भारतीय रेलवे की आईटी शाखा क्रिस द्वारा स्थापित इंडियन रेलवे सिक्योरिटी ऑपरेशंस सेंटर (आईआरएसओसी) के अंतर्गत पश्चिम मध्य रेलवे के कोटा मंडल के समस्त 1890 रेलनेट कनेक्शन वाले कार्यालयीन कंप्यूटरों पर अत्याधुनिक साइबर सुरक्षा एजेंट सॉफ्टवेयर स्थापित किया जा रहा है।
वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ जैन ने बताया कि यह राष्ट्रीय स्तर की साइबर सुरक्षा पहल पूरे भारतीय रेलवे में एक साथ लागू की जा रही है, जिसमें कोटा मंडल पूरी तरह सम्मिलित है। यह सुरक्षा तंत्र चौबीस घंटे, सातों दिन सक्रिय रहेगा। इसके लागू हो जाने के बाद कोटा मंडल की समस्त डिजिटल सेवाएँ — यात्री टिकट आरक्षण, माल-भाड़ा प्रबंधन, कर्मचारी वेतन और परिचालन सूचनाएँ — पूर्णतः साइबर सुरक्षित हो जाएंगी।
जब रेलवे का कंप्यूटर नेटवर्क साइबर हमले से सुरक्षित रहेगा, तो इसका सीधा असर यात्रियों पर पड़ेगा। टिकट बुकिंग प्रणाली में कोई बाधा नहीं आएगी, आरक्षण चार्ट समय पर तैयार होंगे, ट्रेनों की आवाजाही की सूचनाएँ सही और समय पर मिलेंगी तथा यात्रियों का व्यक्तिगत डेटा सुरक्षित रहेगा। कुल मिलाकर रेलवे की सेवाएँ अधिक विश्वसनीय और निर्बाध बनेंगी।
यह परियोजना निजी कंपनी द्वारा बहु-वर्षीय अनुबंध के तहत क्रियान्वित की जा रही है। इस तंत्र में सुरक्षा सूचना एवं घटना प्रबंधन, स्वचालित सुरक्षा प्रतिक्रिया, एंडपॉइंट सुरक्षा तथा नेटवर्क सुरक्षा जैसी अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियाँ शामिल हैं। किसी भी संदिग्ध गतिविधि का तत्काल पता लगाकर स्वचालित सुरक्षात्मक कार्रवाई की जाएगी। समूचे भारतीय रेलवे में एक लाख नब्बे हजार से अधिक डिवाइसों की एकीकृत निगरानी इस प्रणाली के अंतर्गत होगी।
मंडल रेल प्रबंधक अनिल कालरा ने कोटा मंडल के समस्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देशित किया है कि वे कार्यालयीन कंप्यूटरों पर केवल स्वीकृत एवं आधिकारिक सॉफ्टवेयर का ही उपयोग करें तथा किसी भी अज्ञात स्रोत से प्राप्त लिंक या संलग्नक न खोलें। साथ ही कर्मचारियों को विशेष रूप से सतर्क किया गया है कि यदि व्हाट्सऐप, ईमेल या किसी अनाधिकृत लिंक के माध्यम से कोई सॉफ्टवेयर इन्स्टॉल करने को कहा जाए, तो तत्काल मंडल के आईटी विभाग से सत्यापन कराएं। आधिकारिक सॉफ्टवेयर इन्स्टॉलेशन सदैव विभागीय आदेश एवं आईटी विभाग के माध्यम से ही होगी।
कोटा मंडल का यह डिजिटल कवच रेलवे को और अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय एवं यात्री-हितैषी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजीव

