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एसएमएस अस्पताल बना बोन मैरो ट्रांसप्लांट का नया केंद्र: एक माह में पांच सफल प्रत्यारोपण

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एसएमएस अस्पताल बना बोन मैरो ट्रांसप्लांट का नया केंद्र: एक माह में पांच सफल प्रत्यारोपण


जयपुर, 28 जुलाई (हि.स.)। एसएमएस मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के नवगठित क्लीनिकल हीमैटोलॉजी विभाग ने बोन मैरो प्रत्यारोपण (बीएमटी) के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। विभाग ने जुलाई माह में पांच मरीजों का सफल बोन मैरो प्रत्यारोपण कर उन्हें स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी है, जबकि एक अन्य मरीज का प्रत्यारोपण भी सफलतापूर्वक जारी है।

विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. विष्णु शर्मा ने बताया कि डिस्चार्ज किए गए मरीजों में एक युवा मरीज अत्यंत गंभीर वेरी सीवियर अप्लास्टिक एनीमिया से पीड़ित था। लंबे समय से बोन मैरो फेल्योर से जूझ रहे इस मरीज का एलोजेनिक बोन मैरो प्रत्यारोपण किया गया। जटिल उपचार प्रक्रिया के बावजूद प्रत्यारोपण सफल रहा और मरीज स्वस्थ होकर घर लौट सका।

उन्होंने बताया कि बोन मैरो प्रत्यारोपण, जिसे हेमाटोपोएटिक स्टेम सेल ट्रांसप्लांटेशन भी कहा जाता है, रक्त एवं अस्थि मज्जा से जुड़ी गंभीर बीमारियों जैसे एक्यूट ल्यूकेमिया, अप्लास्टिक एनीमिया, मायलोडिस्प्लास्टिक सिंड्रोम, लिम्फोमा और मल्टीपल मायलोमा के उपचार की अत्याधुनिक चिकित्सा पद्धति है। इस जटिल प्रक्रिया में क्लीनिकल हीमैटोलॉजिस्ट, ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ, नर्सिंग स्टाफ, ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विशेषज्ञ, इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट, पैथोलॉजिस्ट और माइक्रोबायोलॉजिस्ट सहित कई विशेषज्ञों की समन्वित भूमिका होती है।

डॉ. विष्णु शर्मा ने कहा कि एक ही माह में पांच सफल बोन मैरो प्रत्यारोपण मरीजों का डिस्चार्ज होना विभाग के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे अब राजस्थान के मरीजों को ऐसे जटिल उपचार के लिए दूसरे राज्यों में जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

विभाग के डॉ. देवेश पराशर ने बताया कि यह सफलता पूरी ट्रांसप्लांट टीम के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। विभाग लगातार अपनी प्रत्यारोपण सुविधाओं और विशेषज्ञ सेवाओं का विस्तार कर रहा है, ताकि अधिक से अधिक गंभीर रक्त रोगियों को समय पर अत्याधुनिक उपचार उपलब्ध कराया जा सके।

विभाग के अनुसार प्रत्यारोपण से पहले मरीजों का विस्तृत मूल्यांकन, उपयुक्त डोनर का चयन, संक्रमण की रोकथाम, रक्त अवयवों की उपलब्धता, ग्राफ्ट वर्सेस होस्ट डिजीज (जीवीएचडी) की रोकथाम तथा प्रत्यारोपण के बाद लगातार निगरानी जैसे सभी चरणों का विशेष ध्यान रखा जाता है। विभाग का लक्ष्य भविष्य में बोन मैरो प्रत्यारोपण कार्यक्रम का विस्तार कर राजस्थान सहित अन्य राज्यों के मरीजों को सुलभ, किफायती और विश्वस्तरीय उपचार उपलब्ध कराना है।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश