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वायरल रोगों की जांच एवं अनुसंधान सुविधाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल, बीकानेर पहुंचे आईसीएमआर-एनआईवी निदेशक

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वायरल रोगों की जांच एवं अनुसंधान सुविधाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल, बीकानेर पहुंचे आईसीएमआर-एनआईवी निदेशक


बीकानेर, 17 अक्टूबर (हि.स.)। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के प्रयासों से सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज, बीकानेर में वायरल रोगों की जांच एवं अनुसंधान सुविधाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हुई है। इसी क्रम में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (आईसीएमआर-एनआईवी) के निदेशक डॉ. नवीन कुमार ने मेडिकल कॉलेज का अवलोकन किया और वायरस रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लेबोरेटरी (वीआरडीएल) का निरीक्षण किया। कॉलेज पहुंचने पर प्राचार्य एवं नियंत्रक डॉ. सुरेंद्र कुमार वर्मा ने उनका स्वागत किया।

निरीक्षण के दौरान प्राचार्य डॉ. सुरेंद्र कुमार वर्मा ने मेडिकल कॉलेज में जोनल वायरल कल्चर जांच लैब शुरू करने का अनुरोध किया । इस विशेष सुविधा की शुरुआत से बीकानेर सहित आसपास के जिलों में वायरल रोगों की जांच एवं अनुसंधान क्षमता को मजबूत करने में मदद मिलेगी। केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के प्रयासों से इस प्रस्ताव को आगे बढ़ने और आवश्यक स्वीकृतियों एवं संसाधनों की उपलब्धता के बाद सुविधा शुरू होने की उम्मीद जगी है।

वायरल कल्चर जांच की सुविधा देश के चुनिंदा विशिष्ट केंद्रों पर ही उपलब्ध होने का उल्लेख करते हुए बीकानेर में इसकी आवश्यकता पर जोर दिया गया। मेडिकल कॉलेज में यह सुविधा विकसित होने से स्थानीय स्तर पर विशिष्ट प्रयोगशाला सेवाओं का विस्तार होगा तथा बीकानेर और आसपास के क्षेत्रों को इसका लाभ मिल सकेगा। इस पहल से कॉलेज की मौजूदा वीआरडीएल की क्षमताओं को आगे बढ़ाने और भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों के लिए संस्थागत तैयारी मजबूत करने की संभावनाएं बनी हैं। हालांकि, प्रस्तावित सुविधा की शुरुआत आवश्यक तकनीकी व्यवस्थाओं, जैव सुरक्षा मानकों, प्रशिक्षित मानव संसाधन और संबंधित स्वीकृतियों पर निर्भर करेगी।

इस अवसर पर डॉ. नवीन कुमार ने ‘भारत में महामारी से निपटने की तैयारी’ विषयक प्रस्तुति दी। उन्होंने वायरल संक्रमणों की समय रहते पहचान, प्रयोगशाला क्षमताओं के विस्तार और विभिन्न क्षेत्रों के बीच समन्वय की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। प्रस्तुति में बताया गया कि भारत उभरते और दोबारा फैलने वाले वायरल संक्रमणों से निपटने के लिए रोग निगरानी एवं त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था को मजबूत कर रहा है। निपाह, जीका, कोविड-19, एमपॉक्स और एवियन इन्फ्लुएंजा जैसे संक्रमणों के साथ डेंगू, चिकनगुनिया तथा जापानी इंसेफेलाइटिस जैसी बीमारियों की निगरानी भी इस तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

प्रस्तुति के अनुसार, आईसीएमआर-एनआईवी की पांच सुविधाओं और देशभर में 167 वीआरडीएल के नेटवर्क के माध्यम से वायरल रोगों की जांच, निदान, अनुसंधान तथा प्रकोप की जांच को सुदृढ़ किया जा रहा है। मेडिकल कॉलेजों में संचालित ये प्रयोगशालाएं स्थानीय स्तर पर जांच सुविधाओं की उपलब्धता और संक्रमण की पहचान का महत्वपूर्ण आधार हैं। बीकानेर की वीआरडीएल में सुविधाओं का विस्तार इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

कॉलेज की वीआरडीएल परियोजना से जुड़ी वरिष्ठ आचार्य एवं प्रधान अन्वेषक डॉ. अंजलि गुप्ता तथा प्रोफेसर एवं सह-प्रधान अन्वेषक डॉ. अभिषेक बिन्नानी का कोविड-19 काल में उत्कृष्ट योगदान रहा। महामारी जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में विश्वसनीय प्रयोगशाला सहयोग उपलब्ध कराने में वीआरडीएल की भूमिका महत्वपूर्ण रही। वीआरडीएल परियोजना का कार्यक्षेत्र वायरल संक्रमणों की पहचान, जांच की गुणवत्ता, प्रयोगशाला गतिविधियों के समन्वय और अनुसंधान से जुड़ा है। सह-प्रधान अन्वेषक के रूप में डॉ. बिन्नानी इस परियोजना से जुड़े हैं।

इस अवसर पर वरिष्ठ आचार्य एवं वीआरडीएल की प्रधान अन्वेषक डॉ. अंजलि गुप्ता, वरिष्ठ प्रदर्शक एवं एनओएचपीपीसीजेड के सह-प्रधान अन्वेषक डॉ. दीप शिखर आचार्य, डॉ. जितेंद्र आचार्य, डॉ. नीति शर्मा, डॉ. रेखा आचार्य, डॉ. इंद्र पुरी, डॉ. पी.डी. तंवर तथा पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. रामकुमार उपस्थित रहे। वैज्ञानिक-बी श्री अशोक एवं डॉ. दिव्या गोस्वामी तथा लैब टेक्नीशियन हीरालाल माली, नीरज और रानी तंवर भी मौजूद रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजीव